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9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद की टक्कर, उसी दिन होगा फैसला: सियासी गलियारों में हलचल तेज

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त तय की गई है। यह चुनाव जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के कारण कराना आवश्यक हो गया है।

देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला अब बहुत दूर नहीं है। चुनाव आयोग ने रविवार को ऐलान किया कि उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर 2025 को कराया जाएगा और खास बात यह है कि उसी दिन परिणाम की घोषणा भी कर दी जाएगी। इस बड़े संवैधानिक पद को लेकर अब दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।


🗳️ क्या बोले चुनाव आयोग?

भारत के चुनाव आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि नामांकन प्रक्रिया 12 अगस्त से शुरू होगी, और अंतिम तिथि 22 अगस्त रखी गई है। नामांकन पत्रों की जांच 23 अगस्त को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 26 अगस्त होगी। मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा और उसी दिन मतगणना कर दी जाएगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि संपूर्ण प्रक्रिया 11 सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी। यह सब कुछ संविधान के अनुच्छेद 66 और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम 1952 के तहत होगा।


🇮🇳 भारत के उपराष्ट्रपति का महत्व

भारत के संविधान में उपराष्ट्रपति देश के दूसरे सर्वोच्च पद पर होते हैं। वे राज्यसभा के सभापति भी होते हैं और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके दायित्वों का निर्वहन करते हैं। देश में अब तक 14 उपराष्ट्रपति हो चुके हैं। इस बार 15वें उपराष्ट्रपति का चुनाव होने जा रहा है।

पिछले चुनाव में जगदीप धनखड़ NDA उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए थे। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2025 को समाप्त हो रहा है, और इसी के चलते नए चुनाव की घोषणा की गई है।


🤝 सत्ता पक्ष की रणनीति: फिर से एनडीए की पकड़ मजबूत?

NDA खेमे की ओर से एक बार फिर से दमदार उम्मीदवार उतारने की तैयारी हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व इस बार एक अनुभवी, परंतु अपेक्षाकृत ‘कम विवादास्पद’ चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में है।

माना जा रहा है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, और वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नामों पर मंथन चल रहा है। वहीं कुछ अटकलें ऐसी भी हैं कि भाजपा इस बार किसी महिला नेता को उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में आगे लाकर विपक्ष को चौंका सकती है।


⚖️ विपक्ष की कवायद: INDIA गठबंधन के पास क्या है योजना?

इधर, विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने भी रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। कांग्रेस, तृणमूल, आम आदमी पार्टी, DMK, SP और अन्य दलों की बैठक जल्द होने वाली है जिसमें संयुक्त उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश होगी।

नामों की बात करें तो गोपालकृष्ण गांधी, मार्कंडेय काटजू, मेघालय की पूर्व राज्यपाल श्रीमती वी. शोभा राजगोपाल, और शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नाम चर्चा में हैं।

हालांकि विपक्ष के पास संख्या बल कम है, लेकिन राजनीतिक संदेश देने और एकता का प्रदर्शन करने के लिए यह चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण है।


🔢 कौन करता है वोट? जानिए वोटिंग प्रक्रिया

उपराष्ट्रपति पद के लिए आम जनता वोट नहीं डालती। यह चुनाव संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों द्वारा किया जाता है। इस बार 543 लोकसभा सदस्य और 245 राज्यसभा सदस्य, यानी कुल 788 सांसद वोट डालेंगे।

यह वोट गुप्त मतपत्र प्रणाली से डाला जाता है और प्रो-राटा वोटिंग नहीं होती, यानी प्रत्येक सांसद का वोट बराबर मूल्य का होता है।


📊 NDA बनाम INDIA: कौन भारी?

अगर केवल संख्याओं की बात की जाए, तो NDA के पास स्पष्ट बहुमत है। बीजेपी अकेले ही लोकसभा में 290 से ज्यादा सीटों के साथ मजबूत स्थिति में है, और राज्यसभा में भी उसके साथियों के वोट मिलाकर वह बहुमत के करीब पहुंच जाती है।

वहीं विपक्ष के पास सिर्फ रणनीति और नैरेटिव का खेल है। लेकिन पिछले राष्ट्रपति चुनाव में भी विपक्ष ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, हालांकि उन्हें भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।


🗯️ सियासी हमले भी शुरू: AAP ने कहा – लोकतंत्र में दिखावा है ये चुनाव!

आप सांसद राघव चड्ढा ने चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद बयान दिया कि “यह चुनाव एक औपचारिकता बनकर रह गया है। एनडीए बहुमत के बल पर जो चाहे कर लेती है। विपक्ष की आवाज को कुचला जा रहा है।”

इस पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “आप जैसी पार्टियाँ लोकतंत्र की दुहाई देती हैं, लेकिन खुद के अंदर चुनाव कराने से डरती हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका सम्मान होना चाहिए।”


🎯 क्या बन सकता है चौंकाने वाला मोड़?

राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। अगर विपक्ष कोई सर्वमान्य और सहानुभूति अर्जित करने वाला चेहरा सामने लाता है, तो कुछ “क्रॉस वोटिंग” की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर राज्यसभा में जहां कई छोटे दलों के सांसद खुलेआम पार्टी लाइन से हटकर वोट कर चुके हैं।

इसके अलावा, यदि किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत इसी चुनाव से हो जाए, तो यह 2029 के आम चुनाव के लिए संकेत हो सकता है।


🧾 इतिहास में झांकें: उपराष्ट्रपति चुनावों के कुछ रोचक तथ्य

  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति थे और बाद में राष्ट्रपति भी बने।
  • हमीद अंसारी लगातार दो बार इस पद पर रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
  • 2017 में वेंकैया नायडू ने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को भारी मतों से हराया था।
  • 2022 में जगदीप धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को मात दी थी।

📝 निष्कर्ष: चुनाव सिर्फ औपचारिकता या लोकतंत्र का उत्सव?

भले ही यह चुनाव मुख्य रूप से सांसदों के बीच हो रहा हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश बहुत गहरा होता है। यह केवल एक संवैधानिक पद की पूर्ति नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीतिक क्षमताओं की परीक्षा है।

अब देखना यह होगा कि 9 सितंबर को मतपेटियों से किसका नाम निकलता है – सत्ता की निरंतरता या विपक्ष की एकजुटता का संकेत?

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Harshita Ahuja

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