हाईकोर्ट ने बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जो 2021 में उनके खिलाफ दर्ज मानहानि मामले को रद्द कराने के लिए दायर की गई थी। कंगना ने इस केस को खारिज कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।

बॉलीवुड अभिनेत्री और हाल ही में लोकसभा चुनाव 2024 में मांडसी सीट से बीजेपी सांसद बनी कंगना रनौत को एक बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 में दर्ज मानहानि मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कंगना पर एक बुज़ुर्ग महिला के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला सुनवाई योग्य है और इसे केवल सोशल मीडिया की ‘आजादी’ कहकर रद्द नहीं किया जा सकता।
🔍 मामला क्या है?
यह पूरा विवाद 2021 के किसान आंदोलन के दौरान शुरू हुआ था। कंगना ने ट्विटर पर एक बुज़ुर्ग महिला की तस्वीर साझा करते हुए दावा किया था कि यह महिला शाहीन बाग वाली ‘दादी’ हैं, जो अब पैसे लेकर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने पोस्ट में लिखा था:
“ऐसी दादी ₹100 में प्रदर्शन के लिए उपलब्ध हैं, पिछले आंदोलन में भी देखी थी। भारत के लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है इन टुकड़े-टुकड़े गैंग वालों ने।“
इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी और कई लोगों ने इसे “स्त्री विरोधी”, “वृद्धजनों के प्रति अपमानजनक” और “झूठ फैलाने वाली” करार दिया था।
बाद में, पंजाब की रहने वाली महिंदर कौर नाम की महिला, जिनकी तस्वीर कंगना ने ट्वीट में प्रयोग की थी, ने दिल्ली में कर्मजीत कौर नामक सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से कंगना के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया।
⚖️ हाईकोर्ट में क्या हुआ?
कंगना रनौत ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और मांग की थी कि मानहानि की कार्यवाही रद्द की जाए। उनका तर्क था कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वह “व्यंग्य” था, न कि मानहानि करने का इरादा।
लेकिन न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कंगना की याचिका खारिज करते हुए कहा:
“व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर किसी सम्मानित महिला की छवि को धूमिल करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। खासतौर पर तब, जब यह महिला अपनी मेहनत और संघर्ष के लिए पहचानी जाती है।”
📃 कोर्ट ने क्या टिप्पणियां कीं?
कोर्ट ने कहा कि:
- यह स्पष्ट है कि आरोपी (कंगना) ने शिकायतकर्ता (महिंदर कौर) को बदनाम करने की मंशा से टिप्पणी की।
- सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी को “आर्थिक लाभ के लिए प्रदर्शनकारी कहने या चरित्र हनन करने” के लिए नहीं किया जा सकता।
- एक बुज़ुर्ग महिला की गरिमा का इस तरह अपमान करना भारतीय मूल्यों और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
👩⚖️ कंगना के वकीलों की दलीलें
कंगना के वकीलों ने दलील दी कि:
- वह ट्वीट एक आम राजनीतिक राय था, न कि किसी खास महिला के खिलाफ।
- ट्विटर पर जो तस्वीर उन्होंने डाली थी, वह पहले से ही सोशल मीडिया पर घूम रही थी।
- उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वह महिला कौन है और उसका किसान आंदोलन से क्या संबंध है।
इस पर कोर्ट ने दो टूक कहा कि “कोई भी व्यक्ति, विशेषकर सार्वजनिक जीवन में मौजूद सेलिब्रिटी, यह दावा नहीं कर सकता कि उसे जिम्मेदारी से बचाया जाए।”
📢 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने एक बार फिर से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है:
- किसान संगठनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “यह बुज़ुर्गों के सम्मान की जीत है।”
- महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि “कंगना जैसी प्रभावशाली महिलाओं को अपनी बात कहने से पहले संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।”
- वहीं, भाजपा समर्थकों और कंगना के फैंस ने इस पर “अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला” बताया।
🎬 कंगना का राजनीतिक और फिल्मी सफर
कंगना रनौत सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि अब एक सक्रिय राजनेता भी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को हराकर मांडसी सीट जीती थी।
उनकी यह जीत भी काफी चर्चा में रही थी, लेकिन साथ ही उनका विवादों से भरा इतिहास एक बार फिर राजनीतिक मंच पर भी दिखाई देने लगा है।
कंगना हमेशा से बेबाक बयानों और सोशल मीडिया पर खुलकर बोलने के लिए जानी जाती हैं, लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब उनके ट्वीट या टिप्पणियों ने कानूनी मुश्किलें खड़ी की हों। इससे पहले भी वे शिव सेना, महाराष्ट्र सरकार, और फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों के खिलाफ बयानबाज़ी कर विवादों में घिर चुकी हैं।
📌 यह फैसला क्या संकेत देता है?
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है:
- सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों की ज़िम्मेदारी सिर्फ मनोरंजन या राजनीति तक सीमित नहीं है।
- प्रभावशाली लोग अगर झूठी जानकारी या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें कानून का सामना करना होगा।
- यह निर्णय खासकर उस समय में अहम है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को राजनीतिक और सामाजिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
🔚 निष्कर्ष
कंगना रनौत को यह झटका उस समय लगा है जब वह एक नए राजनीतिक किरदार में देश के सामने हैं। यह मामला सिर्फ एक मानहानि का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है।
अब देखना होगा कि कंगना इस फैसले के खिलाफ आगे कोई कानूनी कदम उठाती हैं या नहीं। लेकिन इतना तय है कि यह मामला न सिर्फ उनके करियर बल्कि उनकी सार्वजनिक छवि पर भी असर डालने वाला है।
