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कारगिल विजय दिवस 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी शहीदों को श्रद्धांजलि, पूरा देश हुआ वीरता को सलाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई शीर्ष नेताओं ने देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की शुभकामनाएँ दीं।

आज देश ने 26वां कारगिल विजय दिवस मनाया — एक ऐसा दिन जो भारतीय सेना की शौर्यगाथा, बलिदान और अदम्य साहस का प्रतीक है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पहुँचकर वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

“ऑपरेशन विजय” का स्वर्णिम इतिहास
कारगिल विजय दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है ताकि 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन विजय में भारतीय सेना की निर्णायक जीत को याद किया जा सके। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ियों और कठिन परिस्थितियों में पाकिस्तान के घुसपैठियों को खदेड़ दिया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भावुक संबोधन
रक्षा मंत्री ने समारोह के दौरान कहा:

“कारगिल युद्ध में हमारे वीर जवानों ने जिस वीरता और समर्पण का परिचय दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। हम उन सभी शहीदों को नमन करते हैं, जिन्होंने भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत अब न केवल सीमाओं की रक्षा में सक्षम है, बल्कि “आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली” की दिशा में भी मजबूत कदम उठा रहा है।

तीनों सेनाओं के प्रमुखों की उपस्थिति और सैन्य सम्मान
इस खास मौके पर भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के प्रमुखों ने भी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। 21 तोपों की सलामी के साथ एक विशेष गार्ड ऑफ ऑनर भी आयोजित किया गया। सेना के बैंड द्वारा ‘Last Post’ और ‘Reveille’ की धुन ने माहौल को और भी गम्भीर और श्रद्धामयी बना दिया।

सैनिकों की वीरगाथाओं को किया गया याद
समारोह के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा, ग्रेनेडियर योगेंद्र यादव, राइफलमैन संजय कुमार, और कई अन्य वीरों की वीरता की कहानियाँ सुनाई गईं। उनके परिजनों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया और मंच पर सम्मानित भी किया गया।

सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की बाढ़
कारगिल विजय दिवस को लेकर सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि और भावनाओं की बाढ़ आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और तमाम फिल्मी हस्तियों ने ट्वीट कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया:

“कारगिल विजय दिवस पर मैं उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूँ जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। जय हिंद!”

स्कूलों और कॉलेजों में हुए विशेष कार्यक्रम
देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी कारगिल विजय दिवस को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। निबंध प्रतियोगिता, भाषण, देशभक्ति गीत और वीडियो प्रस्तुतियाँ के माध्यम से युवाओं को शहीदों की गाथाओं से अवगत कराया गया।

फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से श्रद्धांजलि
नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम और डीडी नेशनल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आज विशेष डॉक्यूमेंट्री और फिल्में दिखाई जा रही हैं। ‘शेरशाह’, ‘LOC कारगिल’, ‘लक्ष्य’ जैसी फिल्मों ने एक बार फिर लोगों को वीर जवानों की कहानी से जोड़ा।

भारत की सामरिक ताकत अब पहले से अधिक मजबूत
रक्षा विशेषज्ञों ने आज के दिन भारत की वर्तमान सामरिक स्थिति का भी विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि:

भारत के पास अब अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट्स, एस-400 मिसाइल सिस्टम, और AI आधारित ड्रोन तकनीक है।

बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर भी अब तेजी से विकसित किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय की नई घोषणाएं
रक्षा मंत्री ने इस मौके पर दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

कारगिल विजय संग्रहालय को अब डिजिटल रूप में भी विकसित किया जाएगा।

कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

जनता की भागीदारी और जन-जागरूकता
दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में ‘विजय मशाल यात्रा’, रन फॉर वीरता, और शहीदों की फोटो गैलरी जैसे आयोजन हुए। आम जनता की भारी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि देश अपने सैनिकों को कभी नहीं भूलता।

सिर्फ एक दिन नहीं, हर दिन है शहीदों का
कारगिल विजय दिवस एक महज तिथि नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है—अपने सैनिकों के बलिदान को याद रखने का, और उनके बताए रास्ते पर चलने का। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की कीमत हमेशा बलिदान होती है, और हमें हर दिन सैनिकों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।

निष्कर्ष
26 जुलाई 1999 को लिखी गई भारत की यह वीरता की गाथा अब भी जन-जन के दिलों में जीवित है। आज जब हम कारगिल विजय दिवस 2025 मना रहे हैं, तो यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि देश के लिए अपने कर्तव्यों को निभाने का एक संकल्प भी है।

देश आज गर्व से कह रहा है—
“आपका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। जय हिंद!”

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Harshita Ahuja

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