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भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: पीएम मोदी की ब्रिटिश पीएम स्टार्मर से ऐतिहासिक मुलाकात, नए युग की शुरुआत!

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ यह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किअर स्टार्मर की मुलाकात के बाद संपन्न हुआ।

लंदन में बजा भारत का डंका, व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई
2025 के जुलाई महीने में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और आर्थिक मंच पर एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने एक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए। इस समझौते को लेकर बीते तीन वर्षों से चर्चा चल रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री किअर स्टार्मर (Keir Starmer) की मुलाकात ने इसे ऐतिहासिक रूप से पूरा कर दिया।

क्या है यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का अर्थ है – दो देशों के बीच व्यापार को अधिक सरल और कम करों के साथ संचालित करना। इस समझौते के तहत भारत और ब्रिटेन के बीच लगभग 95% से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क समाप्त किया जाएगा, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में भी भारी छूट मिलेगी। इसका सीधा असर दोनों देशों के व्यापार, निवेश और नौकरियों पर पड़ेगा।

बैठक का बड़ा एजेंडा
प्रधानमंत्री मोदी और किअर स्टार्मर के बीच लंदन में हुई इस उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीकी सहयोग, हरित ऊर्जा, आप्रवासन और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।

पीएम मोदी ने कहा,

“भारत और ब्रिटेन की दोस्ती वैश्विक प्रगति के लिए ज़रूरी है। यह समझौता हमारे आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।”

आर्थिक असर: USD 55 बिलियन का व्यापार और बढ़ेगा
2023-24 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 55 बिलियन डॉलर को पार कर गया था। यह समझौता इस आंकड़े को 2027 तक 75-80 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को ब्रिटिश बाजार में टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, IT सेवाओं के लिए बड़ा अवसर मिलेगा, वहीं ब्रिटेन की कंपनियों को भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज, एजुकेशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अधिक लाभ मिलेगा।

ब्रिटेन के बदले सियासी समीकरण
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब ब्रिटेन में लेबर पार्टी की नई सरकार बनी है और किअर स्टार्मर पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी और दोनों नेताओं ने ‘न्यू इंडिया – न्यू ब्रिटेन’ विज़न पर सहमति जताई।

किअर स्टार्मर ने कहा,

“भारत के साथ साझेदारी ब्रिटेन की प्राथमिकता है। हम मोदी जी के नेतृत्व में भारत के साथ नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं।”

प्रवास नीति पर भी बात
लाखों भारतीय छात्र और प्रोफेशनल्स जो ब्रिटेन में पढ़ाई या काम करते हैं, उनके लिए भी राहत भरी खबर है। इस समझौते में वीजा प्रक्रियाओं को सरल करने, छात्रों को पोस्ट-स्टडी वीज़ा में राहत देने, और उच्च कौशल वाले श्रमिकों के लिए नए अवसर देने की बात शामिल है।

रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
भारत-ब्रिटेन के बीच रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक में सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा देगा।

ब्रिटिश मीडिया की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश अख़बार ‘The Guardian’ और ‘BBC’ ने इस समझौते को “PM Starmer की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय जीत” बताया है। वहीं ‘The Financial Times’ ने इसे “Post-Brexit ब्रिटेन की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक सफलता” करार दिया।

भारतीय उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया
FICCI और CII जैसी भारतीय उद्योग संस्थाओं ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश में रोजगार, निर्यात और निवेश में बढ़ोत्तरी होगी। टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद, आईटी सेवाएं और फार्मा कंपनियों को इसका सबसे अधिक लाभ होगा।

राजनीतिक विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी पार्टियों ने इस समझौते पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि “यह एक अच्छा कदम है, बशर्ते कि इससे भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान न हो।”

विपक्ष की आलोचना: ‘शर्तों की पारदर्शिता होनी चाहिए’
कुछ आलोचकों का कहना है कि सरकार को इस समझौते की पूरी शर्तों को सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे यह तय किया जा सके कि कहीं इसमें भारत के छोटे व्यापारियों को नुकसान तो नहीं होगा। हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि सभी शर्तें पारदर्शी और संतुलित हैं।

निष्कर्ष: भारत-UK के रिश्तों में नया अध्याय
यह ऐतिहासिक समझौता सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक रिश्तों में भी नई जान फूंकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा न केवल व्यापारिक लाभ लेकर आई है, बल्कि यह भारत के वैश्विक प्रभाव और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाती है।

आपकी राय?
क्या यह समझौता भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा? क्या यह ब्रिटेन में बसे भारतीयों को बेहतर अवसर देगा? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं!

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Harshita Ahuja

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