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राम जन्मभूमि मंदिर में शुरू हुआ ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत: जय श्रीराम के नारों से गूंजा आसमान

अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं क्योंकि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का दूसरा चरण 3 जून से प्रारंभ हो गया है। इस दौरान 101 आचार्यों द्वारा वेद मंत्रों के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं, जो 5 जून को होने वाली रामलला की भव्य मूर्ति की प्रतिष्ठा से पहले सम्पन्न होंगे।

भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में एक बार फिर से इतिहास रचा जा रहा है। वर्षों की प्रतीक्षा, संघर्ष और श्रद्धा के बाद, अब वह क्षण आ गया है जब श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला को उनका भव्य और दिव्य मंदिर मिल चुका है। इसी कड़ी में प्राण प्रतिष्ठा की दिव्य परंपरा रविवार से आरंभ हो चुकी है। अयोध्या इन दिनों भक्ति, उत्साह और आस्था के महासागर में डूबी हुई है।

रामलला के राजतिलक की शुरुआत: प्राण प्रतिष्ठा के शुभ मुहूर्त में शुरू हुआ भव्य अनुष्ठान
21 जनवरी को सुबह-सुबह वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि के बीच प्राण प्रतिष्ठा का विधिवत अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। इस अनुष्ठान का नेतृत्व काशी और अयोध्या के प्रसिद्ध वेदाचार्य कर रहे हैं। मंदिर परिसर में दक्षिण भारत से आए 121 वेदपाठी ब्राह्मणों ने अनुष्ठान की शुरुआत की। सात दिनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया का समापन 22 जनवरी को होगा, जब रामलला को विधिपूर्वक नवग्रह, वास्तु, द्रव्य और महायज्ञ के बाद गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे मुख्य यजमान
इस ऐतिहासिक अवसर का मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति होगी, जो 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य यजमान की भूमिका निभाएंगे। यह पहला मौका होगा जब देश का प्रधानमंत्री, भारत की आत्मा माने जाने वाले श्रीराम के चरणों में विधिवत आहुति देगा। पीएम मोदी इस कार्यक्रम से पहले 11 दिन का विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं, जिसमें नियम, संयम और व्रत का पालन कर रहे हैं।

तीर्थराज अयोध्या में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
राम नगरी इन दिनों रंग-बिरंगी रोशनी, भजन-संध्या, श्रीराम की झांकियों और श्रद्धालुओं की भीड़ से जीवंत हो चुकी है। यूपी सरकार के अनुसार, पिछले 3 दिनों में लगभग 10 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और ट्रैफिक व्यवस्था को विशेष रूप से मॉनिटर किया जा रहा है।

गृह मंत्रालय ने सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। 20,000 से अधिक सुरक्षाबल, ड्रोन कैमरे, एनएसजी कमांडो और खुफिया एजेंसियां तैनात हैं। अयोध्या को 7 सुरक्षा जोनों में बांटा गया है और हर एक पर डिजिटल निगरानी हो रही है।

विश्व हिंदू परिषद और RSS की भूमिका
विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस पूरे आयोजन के प्रमुख आयोजक हैं। राममंदिर आंदोलन से जुड़े हजारों स्वयंसेवकों, कारसेवकों और नेताओं को विशेष निमंत्रण भेजा गया है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी की भी संभावना है, हालांकि उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अंतिम पुष्टि बाकी है।

‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ का सपना हुआ साकार
यह वही आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी और जिसने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद शुरू हुई लंबी कानूनी लड़ाई 2019 में खत्म हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामलला को सौंपते हुए मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया। आज वही सपना साकार होते हुए करोड़ों भारतीयों की आंखों में आंसू ला रहा है।

कल्याणकारी योजनाओं की बौछार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक हब के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। ₹85,000 करोड़ से अधिक की योजनाएं अयोध्या में चल रही हैं, जिनमें रामपथ, भक्ति पथ, जनकपुरी कॉरिडोर, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और नए होटल व धर्मशालाएं शामिल हैं। योगी सरकार ने ऐलान किया है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में हर महीने करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

राममंदिर से बदलेगा भारत का वैश्विक सांस्कृतिक चेहरा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राम मंदिर का प्रभाव महसूस किया जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका, मारीशस, इंडोनेशिया, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से रामभक्तों के दल अयोध्या पहुंचे हैं। सोशल मीडिया पर #RamMandir का हैशटैग ट्रेंड कर रहा है और कई विदेशी मीडिया हाउस इस घटना को भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देख रहे हैं।

राजनीतिक हलचल भी तेज
इस अवसर पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। कांग्रेस, टीएमसी, सपा और डीएमके जैसे दलों ने इसे बीजेपी का ‘राजनीतिक कार्यक्रम’ बताया है। हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि राम उनके भी हैं, और वे मंदिर पर कोई राजनीति नहीं करना चाहते। पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत और कमलनाथ ने भी कार्यक्रम में भाग लेने की इच्छा जताई है।

प्रसार भारती और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सीधा प्रसारण
21 और 22 जनवरी को होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन, यूट्यूब, फेसबुक और रेडियो पर किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और जिलों में बड़े स्क्रीन पर लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। मंदिरों में विशेष आरती, दीप प्रज्वलन और भजन कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

विश्व में सबसे सुंदर मंदिरों में शामिल होगा राममंदिर
5 मंडपों, 3 मंजिलों और 392 स्तंभों वाला यह मंदिर नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य 2020 में शुरू हुआ था और अब इसका प्रमुख हिस्सा लगभग पूरा हो चुका है। रामलला की प्रतिमा को राजस्थानी बलुआ पत्थर से निर्मित 51 इंच की मूर्ति के रूप में गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

रामराज्य की ओर बढ़ता भारत
राममंदिर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। आज जब भारत अमृतकाल में प्रवेश कर रहा है, तब श्रीराम की भव्य प्रतिमा और मंदिर से जुड़ी यह यात्रा पूरे देश को एक नई ऊर्जा, आस्था और आत्मबल दे रही है।

निष्कर्ष
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। अयोध्या में हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को देखकर साफ है कि भारत अब न केवल आर्थिक और सैन्य शक्ति बन रहा है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी पुनः स्थापित हो रहा है।

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Harshita Ahuja

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