कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया की विभिन्न उद्योगपतियों, राजनीतिज्ञों, अधिकारियों और पत्रकारों से फोन पर हुई बातचीत के करीब 800 टेप्स साल 2010 में मीडिया में सामने आए थे

कॉर्पोरेट की दुनिया में जिस नीरा राडिया टेप कांड से यूपीए- 2 सरकार हिल गई थी और तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री ए. राजा को इस्तीफा देना पड़ा था. अब देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई को उस मामले में किसी भी तरह की अपराधिकता नहीं मिली है. सीबीआई ने इस संबंध में अपना फाइनल अभी मत भी देश की सबसे बड़ी अदालत में दे दिया है.
नीरा राडिया टेप मामला में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि पूर्व कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के खिलाफ राडिया, राजनेताओं, वकीलों, पत्रकारों और उद्योगपतियों के बीच हुई बातचीत के टेप की सामग्री की जांच में उसे कोई आपराधिकता नहीं मिली है. 800 टेपों में इस बातचीत के बाद से ही 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नीरा राडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे. इन टेप्स में देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा से फोन पर की गई बातचीत भी शामिल थी.
कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए जनसंपर्क का काम करती थी. साल 2010 में नीरा राडिया की विभिन्न उद्योगपतियों, राजनीतिज्ञों, अधिकारियों और पत्रकारों से फोन पर हुई बातचीत के करीब 800 टेप मीडिया में आए थे.
नीरा राडिया के टेप कांड के कारण साल 2010 में यूपीए-2 की सरकार में तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री ए. राजा को इस्तीफा देना पड़ा था. उस समय 2जी स्पैक्ट्रम केस में नीरा राडिया के फोन टेप से उनकी मिलीभगत सामने आ गई थी. नीरा राडिया लाबिस्ट थी और कॉर्पोरेट की दुनिया में मुख्य भूमिका लॉबिंग करना थी. नीरा नेताओं-अफसरों-बिजनेसमैन के बीच संपर्क का काम करके एक दूसरे से काम करवाती थी.