सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में मनमाने ढंग से इंटरनेट बंद करने का आरोप लगाने वाली याचिका पर शुक्रवार को केंद्र से यह कहते हुए जवाब मांगा कि वह जानना चाहता है कि क्या इस मसले पर कोई ‘प्रोटोकॉल’ है?

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी की उपलब्धता और बाल यौन शोषण के मामलों के बीच चिंताजनक संबंध का अध्ययन करने के निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी है. बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली ने ये जनहित याचिका दायर की थी. कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद BJP प्रवक्ता और वकील नलिन कोहली ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है.याचिका में कोहली का कहना था कि इस अध्ययन से भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट प्रतिबंध और निगरानी पर अमेरिकी शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘सुअर को पकाने के लिए घर में आग नहीं लगा सकते.’
CJI यू यू ललित ने कोहली से पूछा, “तो क्या जो लोग पोर्नोग्राफी देखते हैं, उनमें ऐसी आपराधिक प्रवृत्ति होती है?” इस पर कोहली ने कहा, “एनसीआरबी के आंकड़ों में केवल संख्याएं होती हैं. बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के खतरे से निपटने के लिए अधिकारियों को सक्रिय कदम उठाने में सक्षम बनाने के लिए प्रक्रिया/दिशानिर्देश लागू करना अनिवार्य है.”
कोहली ने याचिका में पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो को पोर्नोग्राफी तक फ्री पहुंच और बाल यौन शोषण के मामलों के बीच चिंताजनक संबंध का अध्ययन करने का निर्देश देने की मांग की.