प्रसिद्ध भारतीय सिनेमा निर्देशक तरुण मजूमदार का निधन हो गया है। वह 92 वर्ष के थे। पद्म श्री पुरस्कार विजेता ने सुबह 11:17 बजे अंतिम सांस ली। निर्देशक लंबे समय से बीमार थे और 14 जून को उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में कई अंगों की खराबी के कारण भर्ती कराया गया था, जिसके बाद से ही वह अस्पताल में भर्ती थे।

बंगाली फिल्मों के दिग्गज निर्देशक और पद्म श्री तरुण मजूमदार का 91 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया. उम्र संबंधी बीमारियों के चलते तरुण लंबे समय से कोलकाता के एसएसकेएम के सरकारी अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. तरुण मजूमदार के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. 1985 में तरुण मजूमदार ने ‘अलोर पीपसा’ में बसंत चौधरी के साथ फिल्म उद्योग में एक निर्देशक के रूप में शुरुआत की थी.
पहले उन्होंने फिल्म निर्माताओं के ग्रुप ‘यात्रिक’ के तहत काम किया, जिसमें तरुण मजूमदार, दिलीप मुखोपाध्याय और सचिन मुखर्जी शामिल थे. इसके बाद साल 1963 में वो यात्रिक अलग हो गए. तरुण मजूमदार की कुछ बेहतरीन फिल्मों में बालिका बधू (1976), कुहेली (1971), श्रीमन पृथ्वीराज (1972), दादर कीर्ति (1980), स्मृति तुकू ठक (1960), पलटक (1963) और गणदेवता (1978) शामिल है.
अपने करियर के दशकों के दौरान उन्होंने उत्तम कुमार, सुचित्रा सेन, छबी विश्वास, सौमित्र चटर्जी और संध्या रॉय जैसे कई दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया. तरुण मजूमदार को 1990 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. 2021 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित पांच फिल्मफेयर पुरस्कार जीते. अपनी फिल्मों के बारे में बात करते हुए 2015 में तरुण मजूमदार ने कहा था, ‘मैं हमेशा मानवीय रिश्तों और मूल्यों से प्रभावित रहा हूं. मुझे लगता है कि एक आदमी की तलाश एक बेहतर इंसान बनने की होती है. मुझे लगता है कि मैं मध्यवर्गीय परिवेश को बेहतर ढंग से समझता हूं.