राणा दंपति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था. इसको लेकर काफी विवाद हुआ था.

राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद अमरावती की सांसद नवनीत राणा और उनके पति एवं विधायक रवि राणा को जमानत मिल गई है. उन्हें सेशन कोर्ट ने शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश जारी किया है. बता दें कि हनुमान चालीसा विवाद को लेकर स्थानीय पुलिस ने 23 अप्रैल को राणा दंपति को उनके घर से गिरफ्तार किया था. नवनीत राणा भायखला स्थित महिला कारागार में हैं जबकि उनके पति पूर्वी महाराष्ट्र के तलोजा में स्थित जेल में बंद हैं. भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिनमें दो समुदायों के बीच शत्रुता को हवा देना और राजद्रोह भी शामिल है.
विशेष न्यायाधीश आर.एन रोकडे ने बुधवार को राणा दंपति को जमानत दी. अदालत ने कहा कि जमानत पर रिहा होने के बाद आवेदक इस तरह के किसी अपराध को अंजाम ना दे और मामले से संबंधित किसी भी विषय पर मीडिया से बात ना करें. याचिका में कहा गया कि राणा दंपति का मुख्यमंत्री के निजी आवास के पास हनुमान चालीसा का पाठ करके लोगों को भड़काने या नफरत फैलाने का कोई इरादा नहीं था. साथ ही याचिका में कहा गया कि आवेदकों ने जो किया, वह राजद्रोह का अपराध नहीं हो सकता.
कोर्ट में क्या कहा पुलिस ने?
पुलिस की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक प्रदीप घरात ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दम्पति की योजना भले ही ‘अबोध’ प्रतीत होती है, लेकिन तथ्य यह है कि यह सरकार के खिलाफ एक बड़ी साजिश थी. पुलिस ने दावा किया कि राज्य में विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी और उद्धव ठाकरे के राजनीतिक विरोधी यह साबित करना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री हिंदुओं के खिलाफ हैं.
14 दिन की न्यायिक हिरासत में थे
नवनीत राणा और उनके पति विधायक रवि राणा ने जमानत के लिए 25 अप्रैल को सेशन कोर्ट का रुख किया था. कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. राणा दंपति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था. इसको लेकर काफी विवाद हुआ था और इसी सिलसिले में मुंबई पुलिस ने पति-पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था.
अमानवीय व्यवहार का लगाया था आरोप
नवनीत राणा ने गिरफ्तारी के बाद आरोप लगाया था कि पुलिस स्टेशन की हवालात में उनके साथ ‘अमानवीय व्यवहार’ किया गया. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दावा किया था कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें खार थाने में पीने को पानी नहीं दिया गया और उन्हें जातिवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा. इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने महाराष्ट्र सरकार से नवनीत राणा के आरोपों पर 24 घंटे के अंदर जानकारी मांगा था.