अपने देश में गोल्ड के प्रति लोगों का लगाव जग जाहिर है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर और कंज्यूमर है. गोल्ड निवेश के लिहाज से भी अट्रैक्टिव है. जब महंगाई या इकोनॉमी में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ आकर्षित होते हैं और गोल्ड की कीमत बढ़ जाती है. अगर आपने अभी तक अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड शामिल नहीं किया है तो निवेश शुरू करने से पहले किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है उसके बारे में जानते हैं.

ईटी मनी के सीओओ संतोष नवलानी का कहना है कि इतिहास पर गौर करें तो पिछले 12-15 सालों में गोल्ड ने तभी परफॉर्म किया है जब किसी तरह की ग्लोबल क्राइसिस आई हो. 2008 की मंदी के बाद कुछ सालों तक गोल्ड में तेजी रही. उसके बाद कुछ सालों तक यह सुस्त पड़ा रहा. 2019 में अमेरिका-चीन ट्रेड वार के कारण इसमें वापस तेजी आई, 2020 में गोल्ड ने कोरोना के कारण करीब 30 फीसदी का रिटर्न दिया. 2021 में रिटर्न नहीं दिया और 2022 में यूक्रेन क्राइसिस के कारण फिर से सोने में तेजी देखी जा रही है
बात जब गोल्ड में निवेश की है तो इसका मतलब ज्वैलरी से नहीं होता है. अगर आपने ज्वैलरी खरीद ली तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपने गोल्ड में निवेश कर लिया. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ये सलाह देते हैं कि आपके पोर्टफोलियो में कम से कम 5-10 फीसदी गोल्ड जरूर होना चाहिए. यह निवेश डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में किया जा सकता है.
डिजिटल गोल्ड :की बात करें तो इसमें आप ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. इसमें ऑनलाइन खरीदारी के साथ-साथ बिकवाली भी की जा सकती है. डिजिटल गोल्ड में निवेशक 24 कैरेट का प्योर गोल्ड खरीदता है. इसमें इंश्योर्ड वॉलेट में गोल्ड को स्टोर किया जाता है. डिजिटल गोल्ड में 1 रुपए से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है. डिजिटल गोल्ड की खरीदारी करने पर खरीदार को पर्सनल सिक्यॉरिटी वॉलेट मिलता है जिसे इंश्योर्ड भी कराया जा सकता है. आप इसे किसी भी समय कैश में या फिजिकल गोल्ड में रिडीम करा सकते हैं.
गोल्ड ईटीएफ: अगर आप पेपर गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे अच्छा तरीका है गोल्ड ईटीएफ गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने के लिए ऑनलाइन स्टॉक ब्रोकर की जरूरत होती है. इसमें शेयर की तरह खरीदारी की जा सकती है. इसकी खरीदारी एक्सचेंज की मदद से होती है. गोल्ड ईटीएफ में पूरे दिन कारोबार होता है जिसके कारण कीमत में उतार-चढ़ाव देखा जाता है. गोल्ड ईटीएफ को एक्सचेंज की मदद से आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है. एक गोल्ड ईटीएफ का मतलब 1 ग्राम सोना होता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड आपके डीमैट अकाउंट में जमा होता है. इसकी खासियत ये है कि सोने की कीमत को लेकर स्टॉक एक्सचेंज पर पूरी पारदर्शिता होती है. इसके अलावा गोल्ड ईटीएफ पर किसी तरह का वेल्थ टैक्स भी नहीं लगता है. निवेश की शुरुआत 1 ग्राम गोल्ड या एक यूनिट से भी की जा सकती है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड :रिजर्व बैंक की तरफ से समय-समय पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को जारी किया जाता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में एक वित्त वर्ष में एक व्यक्ति कम से कम 1 ग्राम और अधिकतम 4 किलोग्राम सोना खरीद सकता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को हर साल 2.5 फीसदी की सालाना दर से ब्याज मिलेगा. यह ब्याज छमाही आधार पर मिलेगा. रिडम्पशन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा. इसका इस्तेमाल लोन के लिए कोलैट्रल के रूप में भी किया जा सकता है. गोल्ड बॉन्ड फिजिकल गोल्ड नहीं होता है, ऐसे में इसके स्टोरेज में कोई परेशानी नहीं होती है. इसे एक्सचेंजों पर ट्रेड किया जा सकता है, साथ ही फिजिकल गोल्ड के उलट इस पर कोई GST और मेकिंग चार्ज भी नहीं लगता है. गोल्ड बॉन्ड में सोने की शुद्धता की पूरी गारंटी मिलती है. यह बॉन्ड 8 सालों का होता है. टैक्स की बात करें तो 8 साल के बाद बॉन्ड से मिली रकम पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है.