फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है. होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है.

होलाष्टक को अशुभ माना जाता है. ये होली से पहले 8 दिनों तक रहता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार ये फाल्गुन माह, शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है. ये पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक रहता है. ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ. अरविंद मिश्र के अनुसार इस साल होलाष्टक 10 मार्च से शुरू हुआ और 17 मार्च 2022 को समाप्त होगा. फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से पूर्णिमा तक होलाष्टक दोष रहेगा. होलिका दहन का त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारतीय क्षेत्रों जैसे पंजाब, बिहार, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्य में मनाया जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के अपराध में शिव जी ने फाल्गुन की अष्टमी में कामदेव को भस्म कर दिया था. कामदेव की पत्नी रति ने इन आठ दिनों तक तपस्या की. इसके बाद शिव जी ने कामदेव को पुनः जीवित करने का आश्वासन दिया. आइए जानें होली से 8 दिन पहले के अशुभ काल में क्या करें और क्या न करें.
होलाष्टक के दौरान करें ये चीजें
इस दौरान दान देना शुभ माना जाता है. अच्छे भाग्य के लिए जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, धन का दान करें.
पानी में गंगाजल डालकर अपने घर को साफ करें. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी.
इस दौरान भगवान का स्मरण भजन करना चाहिए. ये सभी मनोकामनाओं और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है.
जौ, तिल और शक्कर से हवन करना चाहिए. इससे करियर में सफलता मिलती है.
चावल, घी और केसर से हवन करें. इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
नवग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक करें.
अपनी बेटी के लिए बेहतर जीवनसाथी पाने के लिए कात्यायनी मंत्रों का जाप करें.श्री राम रक्षा स्तोत्र , हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
इस दौरान भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे स्वास्थ्य समस्याएं दूर होती हैं.
होलाष्टक के दौरान ये चीजें न करें
इस दौरान आपको शुभ कार्य करने से बचना चाहिए जैसे कि बच्चे का नामकरण, सगाई और घर प्रवेश आदि.
होलाष्टक के दौरान विवाह करना अशुभ माना जाता है.
इस दौरान कोई नई चीज या वस्त्र भी नहीं खीदने चाहिए.
होलाष्टक के दौरान कोई भी नया व्यवसाय या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए