बिजनेस

डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर, जानें क्या होगा इसका इकोनॉमी पर असर!

कमोडिटी में उछाल के कारण भारत की माइक्रो और मैक्रो इकोनॉमी कमजोर हो गई है. कच्चे तेल में तेजी से महंगाई बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा. अगर सरकार टैक्स में कटौती करती है तो फिस्कल डेफिसिट बढ़ जाता है.

वैश्विक राजनीति में भूचाल आया हुआ है जिसके कारण इकोनॉमी हिल गई है और इंडियन करेंसी की वैल्यु में भारी गिरावट देखी जा रही है. सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया इतिहास में पहली बार 77 रुपए के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि आज इसमें 20 पैसे से ज्यादा की मजबूत देखी जा रही है. रुपए पर जारी दबाव को लेकर ब्रोकरेज का कहना है रुपया 80 के स्तर तक फिसल सकता है. इकोनॉमिक टाइम्स 14 ब्रोकरेज, बैंक्स और ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है. इनका कहना है कि पूरी दुनिया के निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. इसके कारण डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपए में गिरावट देखी जा रही है. इनका कहना है कि अगर यूक्रेन क्राइसिस का कुछ हल नहीं निकलता है तो रुपए में गिरावट की रफ्तार तेजी होगी.

सीआर फॉरेक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पबारी का कहना है कि कमोडिटी की कीमत में तेजी के कारण भारत का एक्सटर्नल बैलेंस कमजोर हो सकता है. पिछले एक महीने में जिस तरह घटनाएं हुई हैं वह हाल-फिलहाल में ठीक होने वाली नहीं हैं. रुपए में सुधार लाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दखल दे सकता है, लेकिन फंडामेंटल कमजोर होने के कारण ट्रेडर्स रुपए पर लंबी दांव नहीं खेलेंग. विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और सुरक्षित निवेश की तरफ रुख कर रहे हैं. अक्टूबर महीने से अब तक एफपीआई 2 लाख करोड़ से ज्यादा भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं.

80 तक इसी साल फिसल सकता है रुपया

इस सर्वे के मुताबिक, साल 2022 में रुपया डॉलर के मुकाबले 77.93 के स्तर तक फिसल सकता है. 2 ब्रोकरेज का तो ये भी कहना है कि इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले 80-82 तक पहुंच सकता है. जेनिथ फिनकॉर्प के सीईओ सौरभ गोयनका ने कहा कि कैलेंडर ईयर 2022 में रुपया फिसल कर 80 तक पहुंच सकता है. रिजर्व बैंक सरकार के बॉरोइंग प्रोग्राम में मदद की पूरी कोशिश करेगा. इसके लिए वह उदार रुख पर कायम रहेगा. इसका मतलब है कि वह इंट्रेस्ट रेट में अभी बढ़ोतरी नहीं करना चाहेगा. गिरता हुआ रुपया सिस्टम में रुपए की लिक्विडिटी पैदा करता है. यह विदेशी निवेशकों को लोकल डेट के लिए लुभाता है.

जल्द खत्म होगी रुपए की वोलाटिलिटी

हालांकि, ट्रेडर्स का मानना है कि रुपए में जारी वोलाटिलिटी बहुत जल्द खत्म होगी. अगर यूक्रेन क्राइसिस लंबी अवधि के लिए जारी रहती है तो इसका फाइनेंशियल मार्केट पर बहुत बुरा असर होगा. अमेरिका और यूरोप रूस पर एक के बाद एक आर्थिक प्रतिबंध लगा रहे हैं. इसका असर ये होगा कि कच्चे तेल और गैस का भाव और बढ़ेगा. यह इंडियन करेंसी के लिए ठीक नहीं है.

खुदरा महंगाई में आ सकता है और उछाल

भारत के लिए महंगा कच्चा तेल ठीक नहीं है. भारत जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करता है. तेल की कीमत बढ़ने से इंपोर्ट बिल बढ़ जाएगा, जिसके कारण ट्रेड डेफिसिट बढ़ेगा. महंगे तेल के कारण खुदरा महंगाई में भी तेजी देखने को मिलेगी. इससे रुपए में और गिरावट आएगी.

सरकार के पास दो विकल्प है

जेफरीज का कहना है कि सरकार के सामने दो विकल्प हैं. कमोडिटी में उछाल के कारण भारत की माइक्रो और मैक्रो इकोनॉमी कमजोर हो गई है. अगर सरकार टैक्स में राहत देकर क्रूड के भाव में उछाल को मैनेज करती है तो फिस्कल डेफिसिट बढ़ेगा. अगर ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है तो रुपए पर दबाव और बढ़ेगा. अगर कच्चे तेल के भाव पर कंट्रोल नहीं किया जाता है तो महंगाई में भयंकर तेजी आएगी. वैसे रिजर्व बैंक के पास रुपए में गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त कैपिटल है. अभी RBI के पास 633 बिलियन डॉलर का रिजर्व है.

Avatar

Pooja Pandey

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Welcome to fivewsnews.com, your reliable source for breaking news, insightful analysis, and engaging stories from around the globe. we are committed to delivering accurate, unbiased, and timely information to our audience.

Latest Updates

Get Latest Updates and big deals

    Our expertise, as well as our passion for web design, sets us apart from other agencies.

    Fivewsnews @2024. All Rights Reserved.