उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पिछले साल से प्रियंका गांधी की सक्रियता बहुत ज्यादा देखी गई। लेकिन दिसंबर के बाद से ही प्रियंका लखनऊ नहीं आयी हैं।

लखनऊ: कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में भले ही अकेले दम पर सारी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हों लेकिन प्रियंका गांधी को लेकर अब कार्यकर्ताओं के मन में मायूसी दिख रही है। प्रियंका दिसंबर के बाद से लखनऊ दौरे पर नहीं आई हैं। हालांकि वह दिल्ली में रहकर वर्चुअली रैली कर रही है लेकिन जिस तरह से दूसरी पार्टियों के नेता घर-घर और संवाद के जरिये अपना कैंपेन कर रहे हैं उस लिहाज से प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अखर रही है। प्रियंका गांधी आखरी बार लखनऊ कांग्रेस का मेनिफेस्टो जारी करने दिसंबर महीने में लखनऊ आई थी उसके बाद से उनका लखनऊ आना नहीं हुआ वहीं चुनाव प्रचार में लगे नेता और प्रत्याशी अपने दम पर भले ही प्रचार कर रहे हो लेकिन ज़मीन पर उन्हें प्रियंका की कमी खल रही है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है की प्रियंका लगातार कार्यकर्त्ताओं से जुड़ी हैं वर्चुअली संवाद भी कर रही हैं। नेताओं का कहना है की प्रियंका जल्द लखनऊ और दूसरे जिलों का दौरा कर प्रचार करेंगी।
बीजेपी-सपा ने झोंकी ताकत 10 फरवरी को पश्चिमी यूपी में पहले चरण का मतदान होना है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी गठबंधन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ समेत यूपी के तमाम बड़े नेता पश्चिमी में डेरा डाले हुए हैं। अखिलेश यादव, जयंत चौधरी की पार्टी भी डोर-टू-डोर कैंपेन कर रही है। खुद सपा प्रमुख अखिलेश जयंत के साथ जिले वाइज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेसियों को प्रियंका गांधी की कमी खल रही है प्रियंका अब तक पश्चिम में एक भी बार चुनाव प्रचार के लिए नहीं आईं हैं। ऐसे में कहीं न कहीं उनके नेताओं में मायूसी जरूर झलक रही है।
कल नोएडा में किया था प्रचार
वहीं सोमवार को प्रियंका गांधी ने नोएडा से प्रत्याशी पंखुड़ी पाठक के समर्थन में प्रचार किया था और मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया था। नोएडा में प्रचार करने पहुंची प्रियंका ने कहा था यह एक बड़ी उपलब्धि है हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और अच्छी टक्कर देंगे। योगी सरकार के खिलाफ लड़ने और जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा था महिलाओं को राजनीतिक शक्ति नहीं माना जाता उन्हें अपनी शक्तियों अधिकार को समझना चाहिए। 50% होने के बावजूद आप लोगों को राजनीतिक भागीदारी नहीं मिल रही है, कांग्रेस ने इस बार महिलाओं को आगे लाने के लिए 40% टिकट उन्हें देने का वादा निभाया है क्योंकि आप एकजुट नहीं हैं महिलाओं को एकजुट करने की जरूरत है और उसके लिए हम कार्य कर रहे हैं।