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टाटा के हाथों में जाएगी ये दूसरी कंपनी, नीलांचल इस्पात को 12,100 करोड़ रुपये में टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स को बेचेगी सरकार

मौजूदा बीजेपी सरकार में एनआईएनएल का यह दूसरा सफल प्राइवेटाइजेशन है. इस लिस्ट में पहली कंपनी एयर इंडिया थी जिसे हाल में टाटा ग्रुप ने खरीदा है. टाटा ने एयर इंडिया की खरीद के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई और अपने नाम किया.

सरकार ने सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड को 12,100 करोड़ रुपये में टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स लिमिटेड को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. एनआईएनएल सार्वजनिक क्षेत्र की चार कंपनियों एमएमटीसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, भेल और मेकॉन लिमिटेड समेत ओडिशा सरकार की दो कंपनियों का जॉइंट वेंचर है. एनआईएनएल का ओडिशा के कलिंगनगर में 11 लाख टन की क्षमता वाला एक स्टील प्लांट है. कंपनी भारी घाटे में चल रही है और यह प्लांट 30 मार्च, 2020 से बंद है. जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के गठजोड़ और नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड और टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने एनआईएनएल को खरीदने के लिए वित्तीय बोली लगाई थी.

इसमें टीएसएलपी सबसे बड़ी बोलीदाता बनकर उभरी थी. टीएसएलपी को आशय पत्र (एलओआई) जारी किया जा रहा है. सरकार ने एआईएनएल के लिए 5,616.97 करोड़ रुपये रिजर्व प्राइस तय की थी जिसके लिए टीएसएलपी ने दोगुना बोली लगाई. एनआईएनएल में सरकार की कोई इक्विटी हिस्सेदारी नहीं है, इसलिए बिक्री के पैसे में उसकी हिस्सेदारी नहीं होगी. ये पैसे सार्वजनिक क्षेत्र की चार कंपनियों और राज्य सरकार की दो पीएसयू के खाते में जाएंगे. नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड ओडिशा में स्थित है.

12,100 करोड़ में बिकी कंपनी

एनआईएनएल की खरीद के लिए टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स लिमिटेड या टीएसएलपी ने सबसे अधिक 12,100 करोड़ रुपये की बोली लगाई. सरकार ने इसकी बिक्री के लिए 5,616.97 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस निर्धारित की थी जिसे दोगुने से भी अधिक रकम मिली है. इसकी जानकारी दीपम सचिव तुहिन कांत पांडेय ने एक ट्वीट के जरिये दी.

मौजूदा एनडीए सरकार में एनआईएनएल का यह दूसरा सफल प्राइवेटाइजेशन है. इस लिस्ट में पहली कंपनी एयर इंडिया थी जिसे हाल में टाटा ग्रुप ने खरीदा है. टाटा ने एयर इंडिया की खरीद के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई और अपने नाम किया. सरकार ने एयर इंडिया की बिक्री के लिए 12,100 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस तय की थी. एनआईएनएल की बिक्री के लिए टीएसपीएल ने सबसे अधिक बोली लगाई थी जिसे ‘ऑल्टरनेटिव मेकेनिज्म’ के तहत मंजूर कर लिया गया. ऑल्टरनेटिव मेकेनिज्म में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं.

कंपनी में बने रहेंगे पुराने कर्मचारी

स्टील मंत्रालय के मुताबिक एनआईएनएल के सभी कर्मचारी अपनी कंपनी में बने रहेंगे जिसके लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट किया गया है. इस एग्रीमेंट के तहत खरीदार कंपनी कर्मचारियों के लिए 1 साल का लॉक-इन पीरियड बनाए रखने के लिए बाध्य होती है. इस दौरान नई कंपनी कर्मचारियों की छंटनी नहीं कर सकती. टीएसएलपी को वीआरएस के टर्म को मानना होगा जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए निर्धारित होते हैं. अगर बिक्री वाली कंपनी ने अपने किसी कर्मचारी के लिए वीआरएस का नियम लगाया है, तो खरीदार कंपनी को भी इस नियम का पालन करना होगा.

मंत्रालय के मुताबिक टाटा की कंपनी टीएसएलपी को आशय पत्र जारी किया जा रहा है और कंपनी को एसपीए पर दस्तखत करने के लिए बुलाया जा रहा है. इस स्टेज में टीएसएलपी को बोली की कुल राशि का 10 फीसदी हिस्सा जमा करना होता है. यह पैसा एसक्रो अकाउंट में जमा किया जाएगा. एनआईएनएल पर 31 मार्च 2021 तक 6,600 करोड़ रुपये का बकाया है. इसमें प्रमोटर्स का 4,116 करोड़ रुपये का ओवरड्यू भी शामिल है. बैंकों का 1,741 करोड़ रुपये बकाया है. इसी में क्रेडिटर्स और कर्मचारियों का भी पैसा शामिल है. एनआईएनएल का 3,487 करोड़ रुपये का निगेटिव नेट वर्थ है और कंपनी 31 मार्च, 2021 तक 4,228 करोड़ रुपये का घाटा है. भारत में यह किसी पहली सरकारी स्टील कंपनी का निजीकरण है

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Pooja Pandey

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