पाकिस्तान के आगामी दिनों में आतंकी घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं. हाल के दिनों में बढ़ी आतंकी घटनाओं के मद्देनजर स्थानीय मीडिया ने इस संबंध में विशेषज्ञों के हवाले से ये बात कही है. इसे लेकर गृहमंत्री शेख राशिद ने कहा, ‘सभी एजेंसियों को अलर्ट किया गया है. यह अलर्ट लाहौर के अनारकली इलाके में हुए धमाके के बाद किया गया है, जिसमें की मौत हुई थी.’
पाक अखबार ‘डॉन’ ने ‘ग्रोइंग टेरेरिज्म थ्रेट’ शीर्षक से एक लेख में बढ़ती आतंकी घटनाओं और तहरीक एक तालिबान पर चिंता जताई गई है. इसके मुताबिक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान में टीटीपी की आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं.

केंद्रीय मंत्री राशिद के मुताबिक 15 अगस्त 2021 के बाद से आतंकवाद की घटनाओं में करीब 35 फीसदी का इजाफा हुआ है. पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यहां तक बहस छिड़ी है कि टीटीपी अलकायदा और ईटीआईएम के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है. इस समझौते की वजह कहीं न कहीं कूटनीतिक विवाद है.
पाकिस्तानी अखबार में कहा गया है कि पिछले दो सालों के दौरान, टीटीपी और उसके गुटों ने रावलपिंडी और इस्लामाबाद में 11 आतंकवादी हमले किए, जिसके परिणामस्वरूप 13 सुरक्षाकर्मी मारे गए. इस हफ्ते इस्लामाबाद में हुए हमले में पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया. अगर इस तरह के और हमले होते हैं तो इस्लामाबाद की सड़कों पर बैरिकेड्स और चेक पोस्ट लगा दिए जाएंगे.
वहीं अफगानिस्तान में सक्रिय इस्लामिक स्टेट खुरासान (IS-K) ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की तुलना में पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा की शांति और अखंडता के लिए कहीं अधिक बड़ा खतरा पैदा किया है. ये बात प्रांतीय पुलिस प्रमुख ने कही है.
आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त में काबुल में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान के कई शहरों में हमले तेज करने वाले IS-K ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों पर आतंकवादी हमलों को भी अंजाम दिया था.
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