तेल, साबुन, मंजन से लेकर बिस्किट और नमकीन तक के दाम एक बार फिर से बढ़ सकते हैं. ऐसे उत्पादों को तैयार करने वाली अधिकतर FMCG कंपनियों ने दिसंबर में ही अपने उत्पादों के दाम बढाए थे लेकिन अब बढ़ी हुई लागत की दुहाई देकर फिर से कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं.

फीएमसीजी प्राइस हाइक सून :तेल, साबुन, मंजन से लेकर बिस्किट और नमकीन तक के दाम एक बार फिर से बढ़ सकते हैं. ऐसे उत्पादों को तैयार करने वाली अधिकतर कंपनियों ने दिसंबर में ही अपने उत्पादों के दाम बढाए थे लेकिन अब बढ़ी हुई लागत की दुहाई देकर फिर से कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं.एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिस्किट बनाने वाली कंपनी पारले इस साल अपने उत्पाद के दाम 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ाएगी.शैंपू, पर्सनल केयर और डेयरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी केविन केयर ने कहा है कि सालभर में वे दाम 4-5 परसेंट तक बढ़ा सकते हैं. साबुन और अन्य पर्सनल केयर बनाने वाली एक और कंपनी गोदरेज कंज्यूमर ने दिसंबर में ही कह दिया था कि जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान उनके प्रोडक्ट 9-10 फीसद महंगे हो जाएंगे.
क्यों बढ़ेंगी कीमतें?
दरअसल इस तरह के प्रोडक्ट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल लगातार महंगा हो रहा है. खाने का तेल, गेहूं, चीनी जैसी चीजों के दाम बढ़ने से बिस्किट और नमकीन बनाने की लागत बढ़ गई है.
इसके अलावा कच्चा तेल महंगा होने की वजह से प्लास्टिक के दाम बढ़ गए हैं जो पैकेजिंग मैटेरियल की लागत बढ़ा रहा है. रोजमर्रा के इस्तेमाल आने वाली अन्य चीजों को बनाने में लगने वाला अन्य कच्चा माल भी महंगा हुआ है. इस वजह से कंपनियों की लागत बढ़ रही है और वे दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं.
संभावना ये भी है कि सभी प्रोडक्ट के दाम एक साथ नहीं बढ़ेंगे. लागत बढ़ने के बाद आम तौर पर कंपनियां अपने सभी प्रोडक्ट की कीमतें एक साथ नहीं बढ़ाती.
कंपनियां पहले डिस्काउंट बंद करती हैं और उसके बाद कीमतों को बढ़ाने का फैसला लेती हैं. हालांकि यह भी कई बार देखा गया है कि जब लागत कम हो जाती है तो कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें नहीं घटाती बल्कि कई जगहों पर डिस्काउंट देना शुरू कर देती हैं..देखना होगा इस बार कंपनियां कौन सी चाल चलती हैं