निलंबित BRS नेता के. कविता ने अपने निष्कासन के बाद पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। पूर्व मुख्यमंत्री और अपने पिता के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली पार्टी से बाहर किए जाने के बाद कविता ने कहा कि वह “BRS से इस्तीफ़ा दे रही हैं” और साथ ही “विधान परिषद (MLC) से इस्तीफ़ा पत्र परिषद अध्यक्ष को सौंप रही हैं।”

तेलंगाना की सियासत में बड़ा धमाका हुआ है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी के. कविता ने पार्टी और अपनी विधान परिषद (MLC) की सीट से इस्तीफ़ा दे दिया है। इस्तीफ़े के बाद कविता ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी में साज़िश का शिकार बनाया गया और इस पूरी साज़िश में उनके चचेरे भाई और पार्टी वर्किंग प्रेसिडेंट के. टी. रामाराव (KTR) ने भी उनका साथ नहीं दिया।
इस्तीफ़ा और आंसू
इस्तीफ़े की घोषणा करते वक्त कविता भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि पार्टी में लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनके खिलाफ अंदरूनी राजनीति की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनकी आँखें नम हो गईं और उन्होंने कहा:
“मैंने हमेशा पार्टी को परिवार की तरह माना, लेकिन आज परिवार ने ही मुझे अकेला छोड़ दिया।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी में उनकी राजनीतिक हैसियत को जानबूझकर कमज़ोर किया गया और KTR ने उनकी पीठ में “राजनीतिक छुरा” घोंपा।
BRS में बढ़ती दरार
BRS यानी भारत राष्ट्र समिति, जिसे पहले TRS (तेलंगाना राष्ट्र समिति) कहा जाता था, हाल ही में विधानसभा चुनाव हारकर विपक्ष में बैठी है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर गुटबाज़ी खुलकर सामने आने लगी है।
- KCR बीमार चल रहे हैं और राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं।
- KTR पार्टी की कमान संभाले हुए हैं, लेकिन संगठन पर पकड़ ढीली बताई जा रही है।
- अब के. कविता का इस्तीफ़ा पार्टी के लिए बड़ा झटका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कविता का इस्तीफ़ा न सिर्फ़ पार्टी के भीतर संकट को और गहराएगा, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरण भी गढ़ सकता है।
साज़िश का आरोप
कविता ने अपने बयान में कहा कि पार्टी में उन्हें कमजोर करने की चाल लंबे समय से चली जा रही थी। उन्होंने कहा:
“मुझे हर मीटिंग से दूर रखा गया, मेरी राय को महत्व नहीं दिया गया। यहाँ तक कि चुनाव टिकटों के बंटवारे में भी मेरी बात को नज़रअंदाज़ किया गया। यह सब एक सुनियोजित साज़िश थी।”
उन्होंने सीधे-सीधे KTR का नाम लिए बिना कहा कि पार्टी नेतृत्व के शीर्ष स्तर पर ही उनके खिलाफ माहौल बनाया गया।
KTR पर निशाना
के. कविता का सबसे बड़ा आरोप यह है कि KTR ने कभी भी उनका साथ नहीं दिया।
उन्होंने कहा: “मैंने हमेशा KTR को भाई माना, लेकिन उन्होंने मुझे अकेला छोड़ दिया। आज मैं खुद को धोखा खाई हुई महसूस कर रही हूँ।”
तेलंगाना की राजनीति के जानकारों का कहना है कि कविता और KTR के बीच पहले भी मतभेद की चर्चाएँ थीं, लेकिन अब यह मतभेद खुले तौर पर सामने आ गए हैं।
ED और दिल्ली शराब नीति केस की पृष्ठभूमि
यह भी याद रखना होगा कि कविता लंबे समय से दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रही हैं। इस केस में उनका नाम कई बार सुर्खियों में रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ED की जांच के दबाव के बीच पार्टी ने कविता से दूरी बनाना शुरू कर दी थी। अब जब उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है, तो इसे “त्याग” और “राजनीतिक अलगाव” दोनों रूपों में देखा जा रहा है।
पार्टी की प्रतिक्रिया
BRS की ओर से आधिकारिक बयान आया है कि कविता का इस्तीफ़ा “उनका निजी निर्णय” है। पार्टी ने कहा कि संगठन किसी भी नेता से बड़ा है और सभी को अनुशासन का पालन करना चाहिए।
हालाँकि, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से यह माना कि कविता के जाने से BRS को बड़ा झटका लगेगा, खासकर महिला वोटरों और दक्षिणी जिलों में, जहाँ कविता की पकड़ मजबूत मानी जाती थी।
विपक्ष का हमला
तेलंगाना की सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर BRS को घेर लिया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह “परिवार की पार्टी” है और जब परिवार ही बिखर रहा है तो जनता पर क्या भरोसा किया जा सकता है।
बीजेपी ने भी इसे मौका बनाते हुए कहा कि BRS का अस्तित्व अब खतरे में है और यह पार्टी “ढहते हुए किले” की तरह है।
राजनीतिक भविष्य पर अटकलें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि के. कविता का आगे क्या होगा?
- क्या वह कांग्रेस या बीजेपी में शामिल होंगी?
- या फिर कोई नया राजनीतिक मंच तैयार करेंगी?
- क्या वह केवल ED केस पर फोकस करेंगी और राजनीति से अस्थायी दूरी बनाएँगी?
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि कविता इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं हैं। वह तेलंगाना में महिला राजनीति का बड़ा चेहरा बन चुकी हैं और उनके पास अपनी राजनीतिक ज़मीन है।
सोशल मीडिया में हलचल
कविता के इस्तीफ़े के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है।
- ट्विटर (X) पर #KKavitha और #BRSResigns जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
- समर्थकों ने कहा कि कविता ने पार्टी के लिए बहुत योगदान दिया, लेकिन उन्हें साज़िश का शिकार बनाया गया।
- विरोधियों ने तंज कसा कि यह “BRS का अंत” है।
पारिवारिक राजनीति में नया मोड़
तेलंगाना की राजनीति लंबे समय से KCR परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
- KCR – पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री।
- KTR – बेटे और वर्किंग प्रेसिडेंट।
- कविता – बेटी और अब पूर्व MLC।
लेकिन अब परिवार की यह तिकड़ी बिखरती नज़र आ रही है। इससे न केवल BRS बल्कि पूरे तेलंगाना की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।
निष्कर्ष
के. कविता का BRS और MLC पद से इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक व्यक्तिगत कदम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। यह साफ़ संकेत है कि पार्टी में अंदरूनी कलह गहराई तक पहुँच चुकी है।
KTR और कविता के रिश्तों में आई यह दरार न केवल BRS के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नए गठबंधन और नए समीकरण बना सकती है।
फिलहाल यह कहना गलत नहीं होगा कि तेलंगाना की सियासत में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है – जहाँ परिवार की एकता टूटी और राजनीति की नई कहानी लिखी जा रही है।
