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मेट्रो उद्घाटन पर सियासी संग्राम: मोदी आएंगे, ममता नहीं!

“मुख्यमंत्री ने मेट्रो परियोजनाओं के उद्घाटन में शामिल होने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि भाजपा शासित क्षेत्रों में बंगाली प्रवासियों के साथ उत्पीड़न हो रहा है।”

पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से सियासी तल्ख़ी जारी है। अब इस तनाव की गूंज कोलकाता मेट्रो के तीन बड़े प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन में भी सुनाई दे सकती है। जानकारी के मुताबिक़, प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही कोलकाता पहुँचकर इन प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस कार्यक्रम से दूरी बना सकती हैं। यह केवल एक शहरी विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र की राजनीति के बीच खिंचती नई लकीर भी है।


कोलकाता की नई रफ्तार: तीन मेट्रो प्रोजेक्ट्स

कोलकाता, जो एशिया की पहली मेट्रो सेवा का गवाह रहा है, अब तीन नए प्रोजेक्ट्स के साथ और आगे बढ़ने वाला है।

  • पहला प्रोजेक्ट: जोका से टाराटाला लाइन
  • दूसरा प्रोजेक्ट: ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा
  • तीसरा प्रोजेक्ट: न्यू गड़ियाहाट से एयरपोर्ट कनेक्टिविटी विस्तार

इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने के बाद कोलकाता की ट्रैफिक समस्या में बड़ी राहत मिलेगी और लाखों यात्रियों को फायदा होगा। केंद्र सरकार इसे ‘न्यू इंडिया की नई रफ्तार’ बता रही है, वहीं राज्य सरकार चाहती है कि इसका श्रेय केवल दिल्ली को न मिले।


ममता बनर्जी का संभावित बहिष्कार

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। इसकी दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं—

  1. राजनीतिक दूरी: ममता लंबे समय से केंद्र सरकार पर ‘राज्य की उपेक्षा’ और ‘राजनीतिक भेदभाव’ के आरोप लगाती रही हैं।
  2. श्रेय की लड़ाई: मुख्यमंत्री का मानना है कि मेट्रो प्रोजेक्ट्स में राज्य सरकार की भी अहम भूमिका रही है, लेकिन उद्घाटन का पूरा श्रेय केवल पीएम मोदी को दिया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा—
“यह केवल लोकार्पण नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का राजनीतिक शो है। राज्य की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है।”


बीजेपी की पलटवार रणनीति

बीजेपी ने ममता बनर्जी के इस रुख को “जनविरोधी” बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री विकास से ज्यादा राजनीति पर ध्यान देती हैं।
बीजेपी सांसद ने तीखा बयान देते हुए कहा—
“जब देश का प्रधानमंत्री राज्य में विकास के नए द्वार खोलने आ रहा है, तब मुख्यमंत्री का न आना जनता के साथ अन्याय है। ममता बनर्जी बंगाल को राजनीतिक दुश्मनी की भेंट चढ़ा रही हैं।”


जनता का नजरिया

कोलकाता और आसपास के आम लोग इस सियासी खींचतान से ज्यादा परेशान नहीं, बल्कि राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। एक दफ्तर जाने वाले यात्री ने कहा—
“मेट्रो शुरू हो जाए तो हमारी रोज़ाना की जिंदगी आसान हो जाएगी। हमें इससे मतलब नहीं कि श्रेय किसे मिलता है।”
सोशल मीडिया पर भी यही माहौल दिख रहा है—जहां लोग ‘राजनीति छोड़ो, मेट्रो चलाओ’ जैसे कमेंट कर रहे हैं।


केंद्र बनाम राज्य की पुरानी खींचतान

यह पहला मौका नहीं है जब मोदी और ममता के बीच किसी प्रोजेक्ट को लेकर तनाव बढ़ा हो।

  • दिसंबर 2020 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कार्यक्रम में दोनों नेताओं के बीच मंच पर ही टकराव देखने को मिला था।
  • 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर ममता ने केंद्र पर तीखे आरोप लगाए थे।
  • 2022-23 में भी कई केंद्रीय योजनाओं पर ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र राज्य को उसका हिस्सा नहीं दे रहा।

अब मेट्रो प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन इस टकराव की नई कड़ी बन गया है।


तृणमूल कांग्रेस की रणनीति

टीएमसी का मकसद साफ है—वह यह संदेश देना चाहती है कि राज्य की मेहनत का श्रेय केंद्र नहीं ले सकता। पार्टी नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार हर बड़े प्रोजेक्ट को अपने खाते में डालकर ‘डबल इंजन सरकार’ की इमेज बनाना चाहती है।
टीएमसी प्रवक्ता ने कहा—
“कोलकाता मेट्रो बंगाल के टैक्सपेयर और राज्य की जनता की मेहनत का नतीजा है। केवल उद्घाटन करने से प्रधानमंत्री को मालिकाना हक नहीं मिल सकता।”


राजनीतिक समीकरण

विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह सियासी टकराव बेहद अहम है। बीजेपी बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि ममता बनर्जी अपने गढ़ को बचाने में जुटी हैं। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बन सकता है।


अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा और स्थानीय राजनीति

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय भारत दुनिया में अपनी अंतरिक्ष और अवसंरचना परियोजनाओं से चर्चा में है, उसी समय बंगाल में विकास परियोजनाएं राजनीतिक संघर्ष का कारण बन रही हैं। यह दिखाता है कि भारत में विकास और राजनीति कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हैं।


सोशल मीडिया की गूंज

ट्विटर (X) पर #KolkataMetro और #MamataVsModi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

  • बीजेपी समर्थक इसे “मेट्रो की रफ्तार, मोदी सरकार” कह रहे हैं।
  • जबकि टीएमसी समर्थक लिख रहे हैं—”बंगाल की मेहनत, दिल्ली की शोहरत”।

निष्कर्ष

कोलकाता के तीन नए मेट्रो प्रोजेक्ट्स जहाँ लाखों यात्रियों की जिंदगी आसान बनाने वाले हैं, वहीं इसने केंद्र और राज्य के बीच पुरानी खींचतान को फिर सामने ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका उद्घाटन करने वाले हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का संभावित बहिष्कार इस खुशी के मौके को भी राजनीतिक रंग दे सकता है।
अब देखना यह होगा कि मेट्रो की रफ्तार सियासत की दीवारों को तोड़ पाएगी या फिर यह प्रोजेक्ट भी श्रेय की लड़ाई में उलझकर रह जाएगा।

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Harshita Ahuja

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