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A से अखिलेश, D से डिंपल!” — मासूमों को सिखाई ‘सियासी ABC’, सपा नेता पर FIR, शिक्षा या प्रचार?

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता फरहाद आलम पर स्कूल के बच्चों को राजनीतिक रंग में रंगी वर्णमाला सिखाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इस घटना ने विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया की लहर छेड़ दी है।

जब किसी स्कूल के मासूम बच्चों की जुबान पर “A for Apple” की जगह “A for Akhilesh” और “D for Dog” की जगह “D for Dimple” सुनाई दे, तो समझ लीजिए कि अब शिक्षा भी राजनीति से अछूती नहीं रही।
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक हैरतअंगेज़ मामला सामने आया है, जहाँ समाजवादी पार्टी (सपा) के एक स्थानीय नेता पर आरोप है कि उसने स्कूली बच्चों को ‘राजनीतिक वर्णमाला’ सिखाई।
बच्चों को पढ़ाया गया —
A for Akhilesh, D for Dimple, M for Mulayam, S for Samajwadi…

यह मामला तब और गंभीर बन गया जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। अब सपा नेता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और पूरा प्रदेश इस विवाद पर गरमा गया है।


📹 वायरल वीडियो बना आफत का सबब

पूरा विवाद एक 2 मिनट 18 सेकंड के वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें दर्जनों बच्चे एक स्कूल की कक्षा में खड़े होकर ताली बजाते हुए ‘राजनीतिक ABC’ दोहरा रहे थे।
वीडियो में सपा नेता, जो खुद को “समाजवादी शिक्षाविद्” बता रहा था, बच्चों को रटवा रहा था:

“A for Akhilesh Yadav, B for Bicycle, C for Constitution, D for Dimple Yadav…”

वीडियो में बच्चे हँसते-खिलखिलाते दिख रहे हैं, लेकिन यह खिलखिलाहट अब विवादों की आंधी में तब्दील हो चुकी है।


📍 कहाँ हुआ यह कारनामा?

घटना इटावा जिले के जसवंतनगर इलाके की बताई जा रही है — वही जसवंतनगर जो समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का निर्वाचन क्षेत्र है।

इस कार्यक्रम को “राजनीतिक जागरूकता अभियान” का हिस्सा बताया गया, लेकिन यह आयोजन एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में किया गया, जो स्पष्ट रूप से आचार संहिता व शिक्षा नियमों का उल्लंघन है।


📝 FIR में क्या लिखा है?

इटावा के जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग की शिकायत पर सपा नेता राकेश यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को आहत करने), 505 (उकसाने), और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि:

एक शासकीय विद्यालय में छोटे बच्चों को सियासी विचारधारा से जोड़ना, उनके मानसिक विकास पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है और यह शिक्षा प्रणाली की गरिमा के खिलाफ है।


🔴 सपा नेता का बचाव — “यह सिर्फ जागरूकता थी”

सपा नेता राकेश यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि:

मैंने कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही। क्या बच्चों को अपने नेताओं के नाम नहीं पता होने चाहिए? यह तो लोकतंत्र की शिक्षा है।
आजकल A for Adani और M for Modi भी पढ़ाया जाता है, तो फिर सपा से इतनी दिक्कत क्यों?

उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया और सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं ने इसे ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार दिया।


🗣️ राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू — BJP vs SP

जैसे ही यह मुद्दा मीडिया में आया, भाजपा नेताओं ने सपा को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा:

ये वही समाजवादी लोग हैं, जो बच्चों के हाथों में किताबों की जगह बुलेट थमा देना चाहते हैं। अब वो उनके दिमाग में ‘वर्णमाला’ के नाम पर सियासी प्रोपेगेंडा भर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसे ‘शैक्षणिक आतंकवाद’ तक कह डाला।

वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हाफिज गांधी ने पलटवार करते हुए कहा:

जब प्रधानमंत्री मोदी स्कूलों में ‘मन की बात’ सुनवाते हैं, तब संविधान नहीं टूटता? लेकिन अगर बच्चे समाजवादी सोच सीखें, तो एफआईआर? ये दोहरा मापदंड नहीं तो क्या है?


🎓 शिक्षा विशेषज्ञ भी चिंतित

इस पूरे घटनाक्रम पर शिक्षा विशेषज्ञों ने भी नाराज़गी जताई है।
NCERT के पूर्व निदेशक प्रो. यशपाल सिंह कहते हैं:

बच्चों को राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसी गतिविधियाँ न केवल शिक्षा के मूल उद्देश्य को कमजोर करती हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

उन्होंने मांग की कि स्कूल परिसरों को ‘राजनीतिक मुक्त क्षेत्र’ घोषित किया जाना चाहिए।


📚 राजनीति का स्कूल में घुसपैठ — एक नई चिंता

हाल के वर्षों में भारत में शिक्षा और राजनीति के बीच की दूरी लगातार घट रही है।
कभी योगी आदित्यनाथ के नाम की पाठशाला, तो कभी मोदी की जीवनी पर आधारित प्रतियोगिता — अब ‘अखिलेश ABC’ ने इस बहस को नई ऊंचाई दे दी है।

क्या स्कूलों को राजनीतिक विचारधारा का प्रचार मंच बनाना उचित है?
क्या बच्चे इतने समझदार हैं कि वे ‘निष्पक्ष लोकतंत्र’ और ‘सियासी एजेंडे’ में फर्क कर सकें?


🔍 मामले की जांच शुरू, स्कूल पर भी शिकंजा

इटावा के जिलाधिकारी और बीएसए ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्राथमिक तौर पर स्कूल प्रशासन की अनुमति के बिना कार्यक्रम आयोजित करने की पुष्टि हुई है।
संभावना जताई जा रही है कि विद्यालय की मान्यता निलंबित की जा सकती है और प्रधानाचार्य पर भी कार्रवाई की जाएगी।


🎤 सोशल मीडिया पर भी बवाल

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, ट्विटर पर हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे:

  • #AforAkhilesh
  • #PoliticalABC
  • #SaveOurSchools

कुछ लोग इसे हास्यास्पद बता रहे हैं, तो कुछ लोग सपा के इस प्रयोग को “नई राजनीति की शुरुआत” बता रहे हैं।


🔚 निष्कर्ष: मासूमों की शिक्षा या सियासी पाठशाला?

सवाल ये नहीं कि “A” किसके लिए है या “D” का मतलब डिंपल है या डेमोक्रेसी,
सवाल ये है कि क्या हम आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के मंदिरों में राजनीतिक रंग भरकर तैयार कर रहे हैं?

स्कूल कक्षा है या पार्टी कार्यालय?
मासूम दिमाग हैं या वोट बैंक?

ये प्रश्न अब शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा, राजनीति की नैतिकता से जुड़े हैं।

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Harshita Ahuja

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