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ऑपरेशन सिंदूर ने खोली पाकिस्तान की पोल: संसद में गरजे अमित शाह, बोले- ‘राज्य प्रायोजित आतंक का पर्दाफाश’

सोमवार दोपहर लोकसभा में भारत के सशक्त, सफल और निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा शुरू हुई, जिसे हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में अंजाम दिया गया था।

देश की संसद में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जोरदार बहस छिड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान पाकिस्तान पर करारा हमला बोला और स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान द्वारा राज्य प्रायोजित आतंकवाद की सच्चाई को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है।” संसद में उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष ने जहां तालियों से उनका समर्थन किया, वहीं विपक्ष पूरी तरह असहज नजर आया।

क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
यह ऑपरेशन हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गुप्त रूप से चलाया गया एक व्यापक जवाबी अभियान था। इसमें भारतीय खुफिया एजेंसियों और सेना ने पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया।

शाह ने कहा: पाकिस्तान की भूमिका संदेह से परे
अमित शाह ने संसद में जोर देकर कहा, “इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की धरती से भारत के खिलाफ लगातार आतंक फैलाया जा रहा है और यह पूरी तरह से राज्य प्रायोजित है।” उन्होंने यह भी बताया कि पकड़े गए आतंकियों से जो सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, उससे इस बात की पुष्टि होती है कि ISI और पाकिस्तानी सेना की प्रत्यक्ष मिलीभगत इन हमलों के पीछे है।

दुनिया को दिखाया गया असली चेहरा
गृह मंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ सहने वाला नहीं, बल्कि जवाब देने वाला देश बन चुका है। “ऑपरेशन सिंदूर एक रणनीतिक सफलता है, जिससे न केवल आतंकियों का नेटवर्क ध्वस्त हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की छवि को भी गहरा झटका लगा है,” शाह ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में मजबूती से उठाएगा।

खुफिया तंत्र और सेना की तालमेल से मिली सफलता
शाह ने बताया कि इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत खुफिया एजेंसियों और सेना के बीच हुए बेहतरीन तालमेल में थी। उन्होंने कहा, “यह ऑपरेशन महीनों की तैयारी और तकनीकी निगरानी का नतीजा था, जिसमें ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और साइबर मॉनिटरिंग का प्रयोग किया गया।” उन्होंने IB, RAW, NIA और सेना को खुले मंच से बधाई दी।

विपक्ष पर भी साधा निशाना
अमित शाह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जब देश आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा था, तब कुछ विपक्षी नेता पाकिस्तान से ‘संवाद’ की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “राष्ट्र की सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ये समय है एकजुट होकर बोलने का, न कि दुश्मन को मौका देने का।”

विपक्ष का रुख: थरूर रहे मौन, राहुल गांधी नदारद
जहां एक ओर संसद में सत्तापक्ष का जोश चरम पर था, वहीं विपक्ष की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बहस में भाग लेने से इनकार करते हुए कहा कि वे ‘मौन व्रत’ में हैं। राहुल गांधी संसद में मौजूद ही नहीं थे, जिससे सत्ता पक्ष ने उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को उचित ठहराया है और आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों की सराहना की है। वहीं, पाकिस्तान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे ‘भारतीय आक्रामकता’ करार दिया है, लेकिन वैश्विक समुदाय ने पाकिस्तान की दलीलों को गंभीरता से नहीं लिया।

जनता में गूंज: ‘जय हिंद’ के नारों से सड़कों पर जोश
ऑपरेशन सिंदूर की खबर सामने आने के बाद देशभर में लोगों में जबरदस्त जोश देखा गया। सोशल मीडिया पर #OperationSindoor ट्रेंड करने लगा। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और श्रीनगर जैसे शहरों में लोगों ने भारत की कार्रवाई का समर्थन करते हुए रैलियां भी निकालीं।

विश्लेषण: क्या बदलेगा अब भारत की आतंक नीति?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की नई आतंक नीति का परिचायक है। यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी आतंक के खिलाफ एक आक्रामक नीति अपनाएगा। यह ऑपरेशन आने वाले समय में सीमा पार से आतंक फैलाने वाले संगठनों के लिए एक चेतावनी है।

निष्कर्ष: भारत का बदला हुआ रुख
संसद में अमित शाह का भाषण केवल एक बयान नहीं, बल्कि भारत की बदलती सुरक्षा रणनीति का प्रतीक था। ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अब केवल हमलों का जवाब देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि आतंक के गढ़ों तक घुसकर उसे खत्म करने की नीति पर काम कर रहा है।

अब दुनिया देख रही है कि भारत कैसे निर्णायक नेतृत्व और सशक्त रणनीति के साथ आतंक के खिलाफ खड़ा है। अमित शाह की संसद में हुई गर्जना सिर्फ पाकिस्तान के लिए चेतावनी नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि भारत अब हर मोर्चे पर तैयार है – कूटनीतिक, सैन्य और नैतिक रूप से।

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Harshita Ahuja

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