सोमवार दोपहर को लोकसभा में ‘भारत का सशक्त, सफल और निर्णायक ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा शुरू हुई, जिसे हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था।

संसद का मानसून सत्र आज सातवें दिन फिर से आरंभ हो गया है। सुबह जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के तेवर स्पष्ट दिखने लगे। इस दिन की सबसे बड़ी और चर्चित घटना है—गृह मंत्री अमित शाह का बहुप्रतीक्षित बयान, जो वे ऑपरेशन सिंदूर पर देने जा रहे हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में खासी हलचल है।
सत्र की शुरुआत: विपक्ष के हंगामे के बीच चला कामकाज
सत्र के आरंभ में विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी और कथित ‘सरकारी दमन’ के मुद्दे पर हंगामा किया। खासतौर पर कांग्रेस, टीएमसी और आरजेडी के सांसदों ने विपक्ष की एकता दिखाते हुए सरकार से जवाब मांगने की कोशिश की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आज का दिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम विषय—ऑपरेशन सिंदूर—पर गृह मंत्री के बयान का है और उसे बिना बाधा सुना जाना चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर: आखिर है क्या?
ऑपरेशन सिंदूर उस खुफिया और सैन्य अभियान का कोडनेम है जो हाल ही में कश्मीर और दिल्ली में आतंकी नेटवर्क्स का भंडाफोड़ करने के लिए चलाया गया था। इस ऑपरेशन के तहत स्लीपर सेल्स, विदेशी फंडिंग और राजनीतिक संरक्षण के मामलों की पड़ताल की जा रही है। अभी तक 18 संदिग्ध गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें कुछ कथित रूप से विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
गृह मंत्री का बयान: अमित शाह की हुंकार
अमित शाह ने अपने बयान में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख करते हुए इसे “भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की ऐतिहासिक जीत” बताया। उन्होंने कहा:
“हमारी एजेंसियों ने एक बेहद जटिल और खतरनाक आतंकी तंत्र को ध्वस्त किया है। यह ऑपरेशन हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है।”
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोग मीडिया, शिक्षण संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से आतंकी विचारधारा फैलाने की कोशिश कर रहे थे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष का पलटवार
जहाँ सत्ता पक्ष इस ऑपरेशन को भारत की सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे “सरकार की एकतरफा कार्रवाई” करार दे रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा:
“सरकार को सिर्फ गिरफ्तारियों से नहीं, सबूतों और निष्पक्ष जांच से जवाब देना चाहिए।”
वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) और आम आदमी पार्टी ने भी जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
राज्यसभा में भी उठा मुद्दा
राज्यसभा में भी ऑपरेशन सिंदूर पर गहमागहमी देखने को मिली। टीएमसी की महुआ मोइत्रा और बीएसपी के सतीश मिश्रा ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता रखनी चाहिए और गिरफ्तार लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए।
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा:
“जब देश की सुरक्षा की बात हो, तब राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति होनी चाहिए।”
शशि थरूर ने किया बहस से इनकार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस विषय पर संसद में बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे “मौन व्रत” में हैं और इस विषय पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे। इससे कांग्रेस की आंतरिक रणनीति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सत्र की अन्य कार्यवाहियां
संसद के दोनों सदनों में अन्य विधायी कार्य भी सूचीबद्ध थे, जिनमें जीएसटी परिषद की रिपोर्ट, महिला आरक्षण बिल पर चर्चा और एक नया डेटा सुरक्षा विधेयक शामिल थे। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा इन सभी चर्चाओं पर भारी रहा।
जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा #OpSindoor
ऑपरेशन सिंदूर पर अमित शाह के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #OpSindoor ट्रेंड करने लगा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लोग इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार साझा कर रहे हैं। एक पक्ष सरकार की प्रशंसा कर रहा है, तो दूसरा पक्ष पूछ रहा है: “क्या यह सब असहमति की आवाज़ दबाने के लिए किया गया है?”
निष्कर्ष: एक सत्र, कई सवाल
मानसून सत्र का सातवाँ दिन राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति के टकराव का गवाह बना। ऑपरेशन सिंदूर पर बहस ने स्पष्ट कर दिया कि यह मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा का केंद्र बना रहेगा। अमित शाह के बयान से जहां एक तरफ सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बढ़ा है, वहीं विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों ने राजनीतिक मोर्चे को और भी गर्मा दिया है।
