स्वच्छ सर्वेक्षण: इस वर्ष के सर्वेक्षण को “घटाओ, पुन: उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो” (Reduce, Reuse, Recycle) थीम के तहत आयोजित किया गया। इसमें 10 प्रमुख मापदंडों और 54 प्रदर्शन संकेतकों के मजबूत ढांचे को शामिल किया गया।

एक बार फिर देश को दिखाई इंदौर ने सफाई की मिसाल, बना ‘स्वच्छ भारत’ का ब्रांड एंबेसडर
प्रस्तावना: स्वच्छता में फिर इंदौर ने मारी बाज़ी
भारत सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण 2024–25 के नतीजे जैसे ही घोषित हुए, एक बार फिर पूरा देश इंदौर के नाम पर गर्व से झूम उठा। लगातार आठवीं बार ‘भारत का सबसे स्वच्छ शहर’ बनने का गौरव इंदौर ने प्राप्त किया है। स्वच्छ भारत मिशन के इस सबसे बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण में इंदौर ने सभी मानकों पर अव्वल प्रदर्शन कर यह मुकाम हासिल किया है। इंदौर ने सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता, अपशिष्ट प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी अपना लोहा मनवाया।
स्वच्छता में इंदौर की अटूट बादशाहत: कैसे कर दिखाया कमाल?
2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी, तब से इंदौर इस मिशन की पहचान बन चुका है। इस वर्ष के सर्वेक्षण में 4500 से अधिक शहरों ने भाग लिया, लेकिन इंदौर का प्रदर्शन एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ साबित हुआ।
यह संभव हो पाया शहर की जनभागीदारी, प्रशासन की इच्छाशक्ति और आधुनिक कचरा प्रबंधन तकनीकों के प्रयोग से।
इंदौर नगर निगम के आयुक्त हर्षिका सिंह ने कहा,
“यह जीत सिर्फ निगम की नहीं, पूरे इंदौर की है। हर नागरिक ने सफाई को अपनी जिम्मेदारी माना और उसी ने हमें देश में सिरमौर बना दिया।”
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024–25 में क्या था खास?
इस साल के स्वच्छ सर्वेक्षण में कुछ नए मापदंड जोड़े गए थे, जैसे:
- कचरा अलग-अलग करने की दर (Waste Segregation Rate)
- प्लास्टिक न्यूट्रलिटी
- सीवेज ट्रीटमेंट और रीसायक्लिंग
- नागरिक फीडबैक और डिजिटल ट्रैकिंग
- सतत अपशिष्ट प्रबंधन
इंदौर ने इन सभी नए और पुराने मापदंडों पर 95% से अधिक अंक प्राप्त किए। शहर में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कम्पोस्टिंग, बायो-सीएनजी प्लांट और कचरा मुक्त ग्रीन ज़ोन जैसी योजनाओं ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
स्वच्छता का असली नायक: इंदौर का आम नागरिक
इंदौर में स्वच्छता अब केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन बन चुकी है। स्कूलों में बच्चों को ‘स्वच्छता मित्र’ बनाया जाता है, महिलाएं ‘गृहिणी ग्रीन टीम’ बनाकर मोहल्लों की निगरानी करती हैं, और हर रविवार को “स्वच्छता संकल्प यात्रा” निकाली जाती है।
65 वर्षीय स्थानीय निवासी रामनाथ शर्मा बताते हैं,
“अब तो कचरा फेंकते वक्त भी डर लगता है कि कोई वीडियो न बना ले! यहां सफाई केवल व्यवस्था नहीं, परंपरा बन गई है।”
तकनीकी नवाचार और स्मार्ट सिटी मॉडल का मिश्रण
इंदौर ने सफाई व्यवस्था में तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल किया है:
- RFID आधारित कचरा गाड़ियों की ट्रैकिंग
- जनभागीदारी ऐप ‘Indore 311’
- सीसीटीवी निगरानी से खुले में शौच रोकने की पहल
- AI आधारित रूट ऑप्टिमाइज़ेशन से ईंधन की बचत
- बायो-सीएनजी प्लांट से रोज़ाना 17,000 किलोग्राम गैस उत्पादन
- इन सभी तकनीकों ने इंदौर को स्मार्ट और स्वच्छ शहर का आदर्श मॉडल बना दिया है।
‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना को दी दिशा
इंदौर ने यह साबित कर दिया कि यदि नगर निगम, जनता और सरकार मिलकर प्रयास करें, तो कोई भी शहर साफ-सुथरा बन सकता है। यहाँ के सफाई कर्मचारी, जिन्हें सम्मानपूर्वक ‘स्वच्छता सैनिक’ कहा जाता है, ने कड़ी मेहनत से शहर को चमकाया है। नगर निगम ने उन्हें बीमा, यूनिफॉर्म, और हेल्थ कार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई हैं।
इन स्वच्छता सैनिकों में काम करने वाली 38 वर्षीय शालिनी राठौड़ कहती हैं,
“जब लोग हमें सम्मान से देखते हैं, तो लगता है हमारा काम पूजा से कम नहीं।”
अन्य शहरों का प्रदर्शन: कौन रहा पास, कौन फेल?
इस बार के सर्वेक्षण में टॉप 10 में आने वाले अन्य शहर थे:
- इंदौर
- सूरत
- नवी मुंबई
- विशाखापत्तनम
- भोपाल
- अम्बिकापुर
- वडोदरा
- गांधीनगर
- नागपुर
- मैसूर
दिलचस्प बात यह रही कि मध्यप्रदेश के दो शहर—इंदौर और भोपाल—इस सूची में रहे, जो राज्य की स्वच्छता नीति की सफलता को दर्शाता है। वहीं, दिल्ली, पटना और कानपुर जैसे बड़े शहर फिर पीछे रह गए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: पीएम से लेकर सीएम तक ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदौर को ट्वीट के माध्यम से बधाई देते हुए लिखा:
- “स्वच्छता का नेतृत्व करने के लिए इंदौर को बधाई! यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है।”
- वहीं, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा,
- “इंदौर का स्वच्छता प्रेम अब विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।”
- पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसे “जनता की जीत” करार दिया और इंदौरवासियों को ‘स्वच्छ भारत के असली सिपाही’ बताया।
आगे की राह: क्या इंदौर रुकने वाला है?
इंदौर के अधिकारियों का कहना है कि अब उनकी निगाह “ग्लोबल ग्रीन सिटी” बनने पर है। नगर निगम अगले 3 वर्षों में शहर को जीरो वेस्ट सिटी, कार्बन न्यूट्रल ज़ोन, और प्लास्टिक फ्री हब में तब्दील करने की योजना बना रहा है।
शहर में अब ‘सस्टेनेबल स्मार्ट पार्क’, ग्रीन बिल्डिंग प्रमोशन, और ई-वाहन आधारित कचरा वाहन लाने की तैयारी की जा रही है।
निष्कर्ष: इंदौर की कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा
इंदौर की सफाई की कहानी अब एक शहर की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के नए स्वच्छता संस्कार की पहचान बन चुकी है। आठ वर्षों से निरंतर सफाई का झंडा बुलंद करना केवल एक लक्ष्य को पाना नहीं, बल्कि एक सोच को स्थायीत्व देना है।
इंदौर ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी शहर गंदगी से लड़ सकता है और देश को एक नई दिशा दे सकता है।
