‘युद्ध की आग बुझाई ट्रंप ने!’— अमेरिकी मंत्री का सनसनीखेज खुलासा

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से तनावपूर्ण रिश्ते किसी से छुपे नहीं हैं, लेकिन अब एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारत-पाक के बीच जो युद्ध लगभग होने ही वाला था, उसे रोकने का श्रेय ट्रंप खुद को देते रहे हैं। अब इस दावे को और बल मिला है, जब अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रेमोंडो ने एक कोर्ट में बयान देते हुए इस कथित ‘सीजफायर डिप्लोमेसी’ की पुष्टि की।
क्या था ट्रंप का दावा?
डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 में दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को टाल दिया। हालांकि भारत सरकार ने उस समय इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। ट्रंप ने एक चुनावी रैली में कहा था, “अगर मैं नहीं होता, तो भारत और पाकिस्तान अब तक युद्ध में उलझ चुके होते।”
इस बयान को तब सिरे से खारिज कर दिया गया था, लेकिन अब अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने जब कोर्ट में इस बयान की पुष्टि की, तो भूचाल आ गया।
अमेरिकी मंत्री ने क्या कहा कोर्ट में?
अमेरिका की एक संघीय अदालत में पेशी के दौरान वाणिज्य सचिव जीना रेमोंडो ने कहा कि 2019-20 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था (विशेषकर पुलवामा हमले और बालाकोट स्ट्राइक के बाद), तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैकचैनल डिप्लोमेसी के ज़रिए दोनों देशों को बातचीत की मेज़ पर लाया।
उनके अनुसार, “अगर उस समय तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया होता, तो परमाणु हथियारों के प्रयोग की नौबत आ सकती थी।”
भारत की ‘नो-नॉनसेंस’ नीति पर सवाल?
भारत हमेशा से अपनी आतंकवाद विरोधी नीति को लेकर स्पष्ट रहा है — ‘आतंकवाद का जवाब आतंकवाद से’। लेकिन अमेरिकी मंत्री का यह बयान इस नीति पर भी सवाल खड़े करता है। क्या भारत दबाव में आया था? क्या पाकिस्तान को उस समय राहत मिली?
हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बीजेपी सूत्रों का कहना है कि भारत की रणनीति और सैन्य कार्रवाई पूरी तरह स्वतंत्र और सटीक थी।
‘सीजफायर’ या कूटनीतिक मजबूरी?
2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) पर ‘सीजफायर एग्रीमेंट’ हुआ, जिसे कई विश्लेषकों ने अमेरिका की ‘नरम दबाव’ नीति का नतीजा माना। अब जीना रेमोंडो के बयान से ये अटकलें तेज हो गई हैं कि शायद अमेरिका ने बैकडोर चैनल से पाकिस्तान को राहत दिलाई हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कूटनीति भारत की स्वायत्त नीति के खिलाफ जाती है।
पाकिस्तान में जश्न, भारत में संशय
ट्रंप के इस कथित ‘मध्यक्षता’ वाले मामले को पाकिस्तान मीडिया में उत्सव की तरह दिखाया जा रहा है। वहां के अखबारों और चैनलों ने इसे “अमेरिका की जीत” और “भारत पर दबाव की रणनीति” करार दिया है।
वहीं भारत में रक्षा विशेषज्ञों और राजनैतिक विश्लेषकों ने इस पर चिंता जताई है। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) सैयद अता हसनैन कहते हैं, “भारत ने उस समय पूरी तैयारी की थी और अमेरिका ने जो भूमिका निभाई, वह दबाव या साझेदारी – दोनों हो सकती है।”
2024 के चुनावों में ट्रंप की चाल?
डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मैदान में हैं। ऐसे में भारत-पाक सीजफायर को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करना उनकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वे खुद को ‘ग्लोबल पीसमेकर’ के तौर पर पेश कर रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है – क्या इस प्रचार में भारत को राजनीतिक मोहरा बनाया जा रहा है?
भारतीय राजनीति में भी उठे सुर
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका ने भारत को रोका था, तो इसका मतलब हमारी विदेश नीति अमेरिका के इशारों पर चल रही थी?”
वहीं बीजेपी प्रवक्ताओं ने इस बयान को ‘चुनावी ड्रामा’ करार देते हुए कहा कि भारत किसी के दबाव में नहीं आता।
मोदी सरकार की चुप्पी – रणनीति या असहजता?
भारत सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पीएमओ या विदेश मंत्रालय से भी कोई बयान नहीं आया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल है।
क्या सरकार इस मुद्दे को नजरअंदाज करना चाहती है या रणनीतिक चुप्पी अपनाकर किसी बड़े बयान की तैयारी में है?
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
पूर्व एनएसए अधिकारी और सामरिक विश्लेषक एस.के. नायर कहते हैं: “सीजफायर कूटनीति की भूमिका थी, लेकिन भारत के सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे फैसले पूरी तरह देश की आंतरिक नीति का हिस्सा थे। अमेरिका की भूमिका बैकग्राउंड में रही होगी।”
सोशल मीडिया पर बवाल
इस मामले ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी बवाल खड़ा कर दिया है। #TrumpStoppedWar और #IndiaUnderPressure जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। आम लोग भी सवाल कर रहे हैं कि क्या भारत की स्वायत्तता अमेरिका की कूटनीति के आगे झुकी?
निष्कर्ष: ट्रंप की चाल और भारत की गरिमा
इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें स्पष्ट होती हैं – पहला, अमेरिका के चुनावी मौसम में ट्रंप भारत के कूटनीतिक और सैन्य निर्णयों को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं। दूसरा, भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आना कई सवाल खड़े करता है।
क्या भारत अब भी अमेरिका की छाया से बाहर नहीं निकल पाया है? या यह चुप्पी एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं, लेकिन देश की जनता जरूर जानना चाहती है कि जब भारत की सैन्य गरिमा की बात हो – तो कौन ‘सीजफायर’ का नायक है – भारत या ट्रंप?
