संसदीय कार्य मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत की राष्ट्रीय एकता और सभी रूपों में आतंकवाद से मुकाबले को लेकर देश के दृढ़ रुख का प्रतिनिधित्व करेगा।

नई दिल्ली – भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद की आती है, तो देश एकजुट होकर दुनिया को दो टूक संदेश देता है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाई “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद, भारत अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी आक्रामक रणनीति अपनाने जा रहा है। देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े नेताओं का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूती से रखने निकल रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदला भारत का रुख
पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन भारत ने सिर्फ शोक मनाकर रुकने के बजाय “ऑपरेशन सिंदूर” के जरिए आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि एक कड़ा संदेश भी भेजा — भारत अब सिर्फ सहन नहीं करेगा, बल्कि घर में घुसकर मारेगा।
राजनीति से परे राष्ट्रीय एकता का उदाहरण
इस बार जो बात सबसे खास है, वह है कि यह मुद्दा अब सिर्फ सत्तापक्ष या विपक्ष का नहीं रहा। बीजेपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी, आम आदमी पार्टी सहित कई दलों के प्रतिनिधि इस सर्वदलीय मंच पर साथ आ रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दिखी यह एकता, वैश्विक समुदाय को यह स्पष्ट संदेश देने के लिए पर्याप्त है कि आतंकवाद पर भारत की नीति न सियासी है, न सीमित — बल्कि यह एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।
विदेशी मंचों पर भारत की सख्ती
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, और ASEAN देशों के समक्ष भारत के पक्ष को मजबूती से रखेगा। प्रतिनिधिमंडल यह भी उजागर करेगा कि कैसे पाकिस्तान ने IMF जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों से मिली सहायता को आतंकियों की पोषणशक्ति में बदला है।
“IMF फंडिंग = आतंक को पोषण?” – राजनाथ सिंह का तीखा सवाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में भुज एयरफोर्स स्टेशन से अपने संबोधन में यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान अब सिर्फ ‘नज़र’ में नहीं है, बल्कि ‘प्रोबेशन’ में है। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान का रवैया नहीं बदला, तो उसे सख़्त सज़ा दी जाएगी। IMF को भी समझना चाहिए कि उसके द्वारा दिए जा रहे फंड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में हो रहा है।”
राजनीति से लेकर सेना तक – एक सुर में भारत
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की योजना के पीछे एक बड़ा कारण है – अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकता और विश्वास का प्रदर्शन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस जयशंकर, और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत समूची सुरक्षा व राजनीतिक नेतृत्व अब एक संगठित संदेश देने में जुटा है।
जनता का समर्थन और विपक्ष की समझदारी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे सुखद पहलू रहा जनता का समर्थन और विपक्ष की परिपक्वता। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले में सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा, “जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो हम सब एक हैं। आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
वहीं, टीएमसी की ममता बनर्जी और डीएमके के एमके स्टालिन ने भी अपने बयान में इस कदम की सराहना की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के प्रतिनिधित्व को अपना समर्थन देने की बात कही है।
पाकिस्तान की बौखलाहट – नकल में भी फेल
भारत की आक्रामक कूटनीति और सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान एक बार फिर बौखलाहट में दिखा। पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने भारत की तरह सैनिकों से मिलने की ‘नकल’ की, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल किया गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस नकलची रवैये पर सवाल उठा रहा है कि क्या पाकिस्तान अब खुद की कूटनीतिक दिशा भी भारत से कॉपी करने लगा है?
यूएन में क्या रखेगा भारत?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजू वार्ष्णेय के अनुसार, भारत निम्नलिखित बिंदुओं को उठाने जा रहा है:
पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को आर्थिक सहायता देना।
सीमा पार से बढ़ती ड्रोन घुसपैठ।
आतंक से लड़ने के नाम पर मिली वैश्विक सहायता का दुरुपयोग।
ऑपरेशन सिंदूर को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार आत्मरक्षा की वैध कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना।
‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को मिलेगी नई धार
भारत का यह कूटनीतिक कदम न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ उसकी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को और धार देगा, बल्कि वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये को भी बेनकाब करेगा। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को फंडिंग पर प्रतिबंध लगाने तक की सिफारिश हो सकती है।
निष्कर्ष: आतंक के खिलाफ नया मोर्चा
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी आतंकी हमला सिर्फ सीमा पर गोलीबारी का जवाब नहीं पाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर कूटनीतिक जवाब भी होगा। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इसका जीता-जागता उदाहरण है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध को सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अब एक वैश्विक लड़ाई बना दिया है – जहां भारत न सिर्फ सैनिक भेजेगा, बल्कि तर्क, तथ्य और नेतृत्व से पूरी दुनिया को साथ लाएगा।
