आग सबसे पहले कॉलेज की लाइब्रेरी में लगी, जिसके बाद मौके पर तुरंत दमकल की 11 गाड़ियाँ भेजी गईं।

नई दिल्ली, 13 मई: राजधानी दिल्ली में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स की लाइब्रेरी में अचानक भीषण आग भड़क उठी। यह घटना सुबह के समय हुई, जब कॉलेज में नियमित गतिविधियाँ चल रही थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि चंद मिनटों में पूरी लाइब्रेरी धुएं और लपटों से घिर गई।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 11 गाड़ियाँ घटनास्थल पर पहुँचीं और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस हादसे ने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चिंता की लहर दौड़ा दी है।
📚 कैसे भड़की आग?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले लाइब्रेरी के भीतर से धुएं के गुबार उठते देखे गए। शुरू में लगा कि शायद कोई मामूली शॉर्ट सर्किट हुआ हो, लेकिन चंद मिनटों में ही पूरा हॉल लपटों से घिर गया। स्टाफ और छात्र जैसे-तैसे बाहर निकले, लेकिन तब तक लाइब्रेरी की किताबें, कंप्यूटर और दस्तावेज जल चुके थे।
आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन और दमकल विभाग की संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी है।
🔥 दमकल की रेस अगेंस्ट टाइम
दिल्ली फायर सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमें सुबह 9:42 बजे कॉल मिली थी। आग बेहद तेजी से फैल रही थी, लिहाजा तत्काल 11 फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। दो घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति को काबू में किया गया।”
दमकल कर्मियों को कॉलेज के भीतर घुसने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि वहां धुएं का गुबार इतना घना था कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। कई दमकलकर्मियों ने ऑक्सीजन मास्क लगाकर काम किया।
😱 छात्र-छात्राओं में डर का माहौल
घटना के समय कॉलेज परिसर में करीब 200 से अधिक छात्र मौजूद थे। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो भी डाले, जिसमें आग की भयावहता साफ देखी जा सकती है। एक छात्रा ने बताया, “हम क्लास में थे, तभी बाहर हड़कंप मच गया। सभी लोग चिल्लाते हुए दौड़ने लगे। जब बाहर निकले तो देखा कि लाइब्रेरी से धुआं और आग की लपटें निकल रही थीं।”
कई छात्रों की व्यक्तिगत नोटबुक, प्रोजेक्ट फाइलें और सर्टिफिकेट भी लाइब्रेरी में ही रखे थे, जो आग में जल गए।
🧾 कितनी क्षति? कौन जिम्मेदार?
हालाँकि, कॉलेज प्रशासन ने अभी तक नुकसान की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन अनुमान है कि लाखों रुपये की किताबें, इलेक्ट्रॉनिक संसाधन और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज आग की भेंट चढ़ चुके हैं। खास बात यह है कि इस लाइब्रेरी में दुर्लभ किताबों का बड़ा संग्रह था, जिनकी पुनः प्राप्ति असंभव मानी जा रही है।
छात्र संगठन और शिक्षक संघ ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा, “अगर आगजनी की वजह शॉर्ट सर्किट है, तो इसका मतलब है कि सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी थे। क्या कॉलेज में नियमित फायर ऑडिट नहीं होता?”
🚨 प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। शिक्षा मंत्री अतिशी ने ट्वीट कर कहा, “श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज की लाइब्रेरी में लगी आग दुर्भाग्यपूर्ण है। हम कॉलेज प्रशासन के संपर्क में हैं और छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”
उधर, दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है जो 72 घंटों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
🛡️ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। राजधानी के कई कॉलेजों में फायर सेफ्टी इक्विपमेंट केवल कागज़ों पर ही मौजूद हैं। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेजों में अग्निशमन ड्रिल नियमित तौर पर होनी चाहिए और फायर ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
📚 शिक्षा के मंदिर में लापरवाही?
इस हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपने शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित मान सकते हैं? एक ऐसी जगह जहाँ भविष्य गढ़ा जाता है, अगर वहीं सुरक्षा के इंतज़ाम लचर हों, तो यह पूरे तंत्र की विफलता है।
छात्रों का कहना है कि कॉलेज में फायर अलार्म सिस्टम निष्क्रिय था और किसी को आग लगने का पता तभी चला जब धुआं पूरे हॉल में फैल गया।
📌 आगे क्या?
फिलहाल, कॉलेज प्रशासन ने अगले तीन दिनों तक शैक्षणिक गतिविधियाँ स्थगित कर दी हैं। लाइब्रेरी को पूरी तरह सील कर दिया गया है और विशेषज्ञों की टीम आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। दमकल विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही किसी पर ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।
✍️ निष्कर्ष
श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज की लाइब्रेरी में लगी भीषण आग ने शिक्षा व्यवस्था को एक गहरी चोट दी है। जहां किताबें ज्ञान का प्रकाश होती हैं, वहीं आज वे लपटों में जलकर राख हो गईं। यह घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि हमारी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर एक सख्त तमाचा है।
अब सवाल यह है कि क्या कॉलेज प्रशासन और दिल्ली सरकार इस आग से सबक ले पाएंगे? क्या अन्य कॉलेजों में भी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा होगी? और सबसे ज़रूरी, क्या छात्रों की सुरक्षा अब प्राथमिकता बनेगी?
