प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो श्रीलंका की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं, को स्वतंत्रता चौक पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार
दिसनायके द्वारा शाही स्वागत किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे। इस यात्रा के दौरान, उन्हें श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसनायके द्वारा कोलंबो के प्रतिष्ठित स्वतंत्रता चौक पर एक भव्य और शाही स्वागत प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारतीय और श्रीलंकाई रिश्तों को और मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। श्रीलंका के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों में विविध पहलुओं पर चर्चा और सहयोग के नए रास्तों की संभावना पर बात की जा रही है।
स्वतंत्रता चौक पर प्रधानमंत्री का स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका आगमन के बाद उन्हें स्वतंत्रता चौक पर औपचारिक रूप से स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक स्थल पर उनके स्वागत के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री का आतिथ्यपूर्ण और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार डिस्सanayake के अलावा, श्रीलंका के अन्य उच्च अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। इस स्वागत समारोह में भारतीय और श्रीलंकाई दोनों देशों के प्रमुख नेताओं ने आपसी सहयोग और रिश्तों को और गहरा करने की बात की।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के दौरान भारतीय ध्वज के साथ-साथ श्रीलंकाई ध्वज भी लहराए गए। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच साझेदारी की अहमियत को रेखांकित किया और कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच हमेशा एक मजबूत दोस्ती रही है, जो सांस्कृतिक, आर्थिक और सामरिक सहयोग के साथ आगे बढ़ेगी।
भारत-श्रीलंका रिश्तों का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और श्रीलंका के बीच रिश्तों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते बहुत गहरे हैं। श्रीलंका में बौद्ध धर्म की शुरुआत और भारतीय संस्कृति का प्रभाव वहां की सामाजिक और धार्मिक संरचना में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसके अलावा, भारतीय समुद्र सीमा श्रीलंका से बेहद करीब है, जिससे दोनों देशों के लिए सामरिक महत्व भी अत्यधिक है।
श्रीलंका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध भी सशक्त हैं, और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का उद्देश्य इन संबंधों को और मजबूत करना था। मोदी ने यात्रा के दौरान यह स्पष्ट किया कि भारत श्रीलंका के साथ अपने सहयोग को नई दिशा देने के लिए तैयार है, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, व्यापार और सुरक्षा क्षेत्रों में।
प्रधानमंत्री मोदी का द्विपक्षीय बैठक और चर्चाएँ
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार डिस्सanayake के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, सुरक्षा, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय सहयोग पर विचार विमर्श किया गया। मोदी ने विशेष रूप से श्रीलंका के विकास के लिए भारत द्वारा समर्थन की बात की और श्रीलंकाई सरकार के साथ मिलकर साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जाहिर की।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत श्रीलंका के साथ अपने सहयोग को और गहरा करने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाएगा, खासकर बंदरगाह, सड़क निर्माण, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्रों में। दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठाने की बात भी हुई, जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा।
श्रीलंकाई नागरिकों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की छवि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा का श्रीलंकाई नागरिकों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। मोदी के स्वागत के दौरान श्रीलंकाई नागरिकों ने भी अपनी खुशी और गर्मजोशी का इज़हार किया। कई जगहों पर मोदी के पोस्टर और बैनर लगाए गए थे, और नागरिकों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।
मोदी की यात्रा से यह स्पष्ट हो गया कि भारत और श्रीलंका के बीच एक मजबूत सामरिक साझेदारी है और दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के प्रति दोस्ती और सम्मान की भावना रखते हैं। मोदी के श्रीलंका में स्वागत के दौरान भारतीय समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे, और उन्होंने मोदी का स्वागत किया। यह दिखाता है कि श्रीलंका में भारतीय समुदाय का प्रभाव और योगदान महत्वपूर्ण है।
भारत-श्रीलंका संबंधों के भविष्य के दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी की श्रीलंका यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू किया है। मोदी की यात्रा ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है। इसके साथ ही, श्रीलंका में भारत के निवेश और परियोजनाओं का विस्तार हो सकता है, जो दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, भारत और श्रीलंका के बीच सुरक्षा मामलों में भी गहरा सहयोग हो सकता है, खासकर समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में। दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करने की जरूरत है, खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में बढ़ते सुरक्षा खतरे के मद्देनज़र।
भारत और श्रीलंका के बीच जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, स्वास्थ्य और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भविष्य में और अधिक साझेदारी की संभावना जताई।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवसर है, जो दोनों देशों के रिश्तों में न केवल सामरिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और श्रीलंका के रिश्ते सिर्फ भूगोल और राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये दोनों देशों के नागरिकों के बीच दोस्ती और सहयोग की भावना को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता चौक पर स्वागत इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी, और उनकी यह यात्रा दोनों देशों के बीच साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने का एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।