आज की ताजा खबर बिजनेस

अनिल अंबानी को टैक्स चोरी में हाई कोर्ट से मिली राहत,420 करोड़ रुपये के IT नोटिस का है मामला!

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन Anil Ambani को ब्लैक मनी एक्ट के तहत नोटिस भेजा गया था, लेकिन अब कोर्ट ने 17 नवंबर तक कार्रवाई पर रोक लगा दी है.

दिग्गज कारोबारी अनिल अंबानी को बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को रिलायंस ग्रुप के चेयरपर्सन के खिलाफ काला धन अधिनियम के तहत पैसों का खुलासा नहीं करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के प्रॉसिक्युशन नोटिस पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही 17 नवंबर तक अनिल अंबानी के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। आयकर विभाग ने 63 वर्षीय अनिल अंबानी को काला धन कानून के तहत नोटिस भेजकर पूछा था कि उन पर मुकदमा क्यों न चलाया जाए।

जानबूझकर टैक्स चोरी का आरोप

आयकर विभाग ने 63 वर्षीय अनिल अंबानी पर जानबूझकर टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया है. विभाग का कहना है कि अनिल ने जानबूझकर विदेशी बैंक खातों का ब्योरा और वित्तीय ब्याज की जानकारी भारतीय टैक्स अधिकारियों को नहीं दी है.

विभाग के नोटिस के मुताबिक, अंबानी पर इस टैक्स चोरी के लिए ब्लैक मनी (अज्ञात विदेशी आय व संपत्ति) कर कानून, 2015 की धारा 50 व 51 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, जिसकी अधिकतम सजा जुर्माना व 10 साल कैद है.

कोर्ट का निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि सेक्शन 50 और 51 के तहत अनिल अंबानी को इनकम टैक्स विभाग की ओर से अगस्त में दी गई नोटिस वैध नहीं थी. कोर्ट ने माना कि आईटी विभाग का कानून 2015 में आया लेकिन उसके सेक्शन के अंतर्गत 2006 से 2012 के मामले में नोटिस दिया गया है. कानून आने से पहले के दिनों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट को बताया गया कि पिछली तारीख में नोटिस दिया गया है, इसलिए उसे अवैध ठहराया गया.

क्या है पूरा मामला

‘एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट की बेंच को आगे बताया गया कि एसेसिंग ऑफिसर ने इस साल मार्च में अधिनियम की धारा 10 (3) के तहत एक आदेश पारित किया था जिसमें कहा गया था कि अंबानी के पास 2006 और 2012 में किए गए लेनदेन के आधार पर अघोषित विदेशी आय और संपत्ति थी, और इसलिए, इसके लिए इनकम टैक्स के रूप में 420 करोड़ रुपये का भुगतान करें. बेंच को सूचित किया गया कि अनिल अंबानी के खिलाफ कार्यवाही बेबुनियाद और झूठे आरोपों पर आधारित थी और इसलिए आदेश को आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष चुनौती दी गई है.

इस पर विचार करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगस्त में जारी किया गया नोटिस समय से पहले था और इसलिए उन्हें आईटी विभाग द्वारा किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी जानी चाहिए. अदालत को यह भी बताया गया कि नोटिस को रद्द करने के अलावा याचिका में 2015 के अधिनियम की अलग-अलग धाराओं की वैधता को भी चुनौती दी गई थी, जो अधिनियम के लागू होने से पहले किए गए लेनदेन पर की अनुमति देता है.

Avatar

Pooja Pandey

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Welcome to fivewsnews.com, your reliable source for breaking news, insightful analysis, and engaging stories from around the globe. we are committed to delivering accurate, unbiased, and timely information to our audience.

Latest Updates

Get Latest Updates and big deals

    Our expertise, as well as our passion for web design, sets us apart from other agencies.

    Fivewsnews @2024. All Rights Reserved.