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अगस्त के बाद नहीं होगा आटा, मैदा और सूजी का निर्यात,सरकार ने रखी ये शर्तें

भारत का गेहूं निर्यात दुनिया की हिस्सेदारी में बहुत कम होता है, लेकिन मांग बढ़ने से देसी मार्केट पर असर देखा जा रहा है. देसी मार्केट में गेहूं के दाम में भारी वृद्धि देखी जा रही है. यही हाल गेहूं के आटे, मैदा, सूजी आदि का भी है.

आप सोच रहे होंगे कि अचानक ऐसा क्या हो गया हो सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर झटके में रोक लगा दि. तो इसकी वजह देसी बाजारों में इन खाद्य सामानों की बढ़ती महंगाई है. सरकार पर महंगाई को रोकने के लिए दबाव है, इस बीच आटा जो कि हर व्यक्ति की जरूरत है, वह भी थाली से दूर हो जाए तो फिर बचेगा क्या. इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने गेहूं आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर बैन लगा दिया है. इससे पहले मई में गेहूं के निर्यात पर भी प्रतिबंध चस्पा किया गया था. आटे का थोक में निर्यात हो या किसी और जरिये से, सब पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.

निर्यात पर प्रतिबंध का ऐलान पहले केंद्रीय कैबिनेट ने किया जिसे बाद में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी कि डीजीएफटी ने अमल में ला दिया. हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में सरकार के आदेश पर इन चीजों के निर्यात को अनुमति दी जाएगी. आटा और मैदा के अलावा सूजी में रवा और सिरगी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. इससे पहले 25 अगस्त को सरकार ने गेहूं या मेस्लिन आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था. यह फैसला आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने लिया.

भारत ने क्यों लगाया प्रतिबंध

रूस और यूक्रेन दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातक देश हैं. इन दोनों देशों में युद्ध छिड़ने के बाद गेहूं की सप्लाई बंद हो गई है. इस वजह से भारत के गेहूं की मांग बढ़ गई है. भारत का गेहूं निर्यात दुनिया की हिस्सेदारी में बहुत कम होता है, लेकिन मांग बढ़ने से देसी मार्केट पर असर देखा जा रहा है. देसी मार्केट में गेहूं के दाम में भारी वृद्धि देखी जा रही है. यही हाल गेहूं के आटे, मैदा, सूजी आदि का भी है.

देश में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लोगों को राशन मिलता रहे, इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके चलते सप्लाई बाधित हुई और दुनिया के बाजारों में गेहूं के आटे की मांग तेजी से बढ़ गई. रूस-यूक्रेन की लड़ाई का ही असर है जो पिछले एक साल में इस वर्ष अप्रैल-जुलाई के दरम्यान आटे के निर्यात में 200 फीसद का उछाल दर्ज किया गया है.

क्यों बढ़े गेहूं, आटे के दाम

विदेशी बाजारों में गेहूं के आटे की मांग के कारण भारत के बाजारों में इसके दाम में बड़ी तेजी देखी जा रही है. पहले गेहूं के आटे के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने का नियम था, लेकिन सरकार ने इसमें संशोधन किया ताकि देश के भीतर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और कीमतों में उछाल को रोका जा सके.

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो गेहूं के दाम में 22 परसेंट का उछाल है और अगस्त में यह 31.04 रुपये पर पहुंच गया है. एक साल पहले यही दाम 25.41 रुपये प्रति किलो था. इसी तरह आटे का औसत भाव 17 परसेंट तक बढ़ गया है और 35.17 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है. पहले यह कीमत 30.04 रुपये प्रति किलो हुआ करती थी. पिछले सीजन में गेहूं के उत्पादन में कमी देखी गई थी. 1068 लाख टन तक कम गेहूं का उत्पादन हुआ था. गेहूं के उत्पादन में लगभग 3 फीसद तक कमी देखी गई. इसके चलते पहले से ही गेहूं के भाव बढ़े हुए थे. बाद में रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी हालत खराब कर दी. मील मालिकों की शिकायत है कि पिछले कई दिनों से उन्हें गेहूं की सप्लाई कम मिल रही है, जिससे कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है.

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Pooja Pandey

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