सरकार का कहना है अन्य देशों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 25-30 फीसदी के बीच है. अपने देश में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी है.

मोदी सरकार कैपिटल गेन टैक्स को लेकर नियम में बदलाव कर सकती है. मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अगले बजट में सरकार रेवेन्यू कलेक्शन को बढ़ाने के लिए कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव कर सकती है. इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर बाजार से कमाई पैसिव इनकम की तरह है. ऐसे में शेयर बाजार की कमाई पर लगने वाला टैक्स रेट बिजनेस इनकम पर लगने वाले टैक्स के मुकाबले कम नहीं होना चाहिए. बिजनेस इनकम में कई रिस्क जुड़े होते हैं, साथ में यह रोजगार का अवसर भी देता है. इसके अलावा सरकार कई वेलफेयर स्कीम के बारे में विचार कर रही है जिसके कारण एडिशनल रेवेन्यू जेनरेट करने की जरूरत है.
सूत्र ने बताया कि कैपिटल गेन टैक्स में किसी तरह का बदलाव लाने के लिए सरकार को कानून में बदलाव करना होगा. इसके लिए बजट सेशन सबसे उपयुक्त समय है. तब तक वित्त मंत्रालय इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार भी करेगा. कैपिटल गेन टैक्स की बात करें तो यह दो तरह का होता है. पहला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और दूसरा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन .
1 साल से ज्यादा होल्डिंग पर लगता है एलटीसीजी
अपने देश में अगर शेयर बाजार में 1 साल से ज्यादा के लिए निवेश करते हैं तो निवेश करने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दायरे में आता है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी है. 1 लाख तक लॉन्ग टर्म गेन टैक्स फ्री है. यह नियम 1 अप्रैल 2019 से लागू है. 12 महीने से कम समय के लिए निवेश करने पर यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहलाता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 15 फीसदी होता है. इस तरह होल्डिंग पीरियड के आधार पर कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है.
जानिए रेवेन्यू सेक्रेटरी ने क्या कहा था
बजट 2022 पेश करने के बाद 9 फरवरी को इंडस्ट्री के लोगों से बात करते हुए रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने कहा था कि अपने देश में कैपिटल गेन टैक्स का स्ट्रक्चर बहुत पेचीदा है. इसपर विचार करने की जरूरत है. 28 फरवरी को उन्होंने फिर से कहा था कि शेयर बाजार से 80 फीसदी कैपिटल गेन पाने वाले लोगों की सालाना इनकम 50 लाख से ज्यादा है.
अन्य देशों में कैपिटल गेन टैक्स 30 फीसदी तक
सरकार का कहना है अन्य देशों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 25-30 फीसदी के बीच है. अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स को बढ़ाती है तो निवेशकों के सेंटिमेंट पर बुरा असर होगा. ऐसे में बड़े निवेशक रियल एस्टेट की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं.