रिलायंस की वार्षिक आम बैठक जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में हो सकती है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार एजीएम में रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के डीमर्जर का ऐलान किया जा सकता है।

इस साल रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने रिटेल और टेलीकॉम बिजनेस को ऑयल-टू-केमिकल बिजनेस से अलग करने की घोषणा कर सकती है। इसके लिए रिलायंस रिटेल और रिलायंस जियो का आईपीओ लाने की तैयारी है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज इस साल की वार्षिक आम बैठक में अपने उपभोक्ता व्यवसाय, जिसमें दूरसंचार और खुदरा शामिल हैं, के लिए आईपीओ की घोषणा कर सकती है। पिछली तीन एजीएम बैठकों में समूह की ओर से कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में इस बार एजीएम की बैठक में बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में होगी।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के डी-मर्जर और आईपीओ की घोषणा इस साल की सालाना आम बैठक में की जा सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मुकेश अंबानी जियो और रिटेल बिजनेस के लिए अलग-अलग आईपीओ की घोषणा करेंगे। इस संबंध में भेजे गए ईमेल पर कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि उपभोक्ता कारोबार के प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है।
APRU में उछाल से JIO की स्थिति मजबूत
एवरेज रेवेन्यू पर यूजर की वजह से रिलायंस जियो का प्रॉफिट बढ़ रहा है। इसके अलावा रिटेल मार्केट में भी रिलायंस की पकड़ मजबूत होती जा रही है। यह रिटेल मार्केट में बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। साल 2019 की सालाना आम बैठक में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि वह अगले पांच साल में रिटेल और टेलीकॉम कारोबार को अलग कर देंगे। दुनिया भर के रणनीतिक और वित्तीय निवेशकों ने इसके लिए गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से कारोबार का विस्तार
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने खुदरा और दूरसंचार कारोबार दोनों के लिए दुनिया भर के निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए हैं। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का कोर रिटेल रेवेन्यू 45 फीसदी बढ़ा है। रिलायंस रिटेल ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। गोल्डमैन का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024-25 तक रिलायंस का ई-कॉमर्स राजस्व बढ़कर 14 अरब डॉलर हो जाएगा, जो वित्त वर्ष 22 में सिर्फ 3 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025 तक कुल खुदरा राजस्व 37 प्रतिशत सीएजीआर के साथ 38 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।