कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस्मानिया यूनिवर्सिटी के दौरे पर रोक लगने के बाद राजनीति शुरू हो गई है. मामले को लेकर कांग्रेस ने टीआरएस पर आरोप लगाए हैं.

कांग्रेस के राहुल गांधी के हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के प्रस्तावित दौरे को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है. श्री गांधी 6 और 7 मई को तेलंगाना का दौरा करने वाले हैं और उनके अन्य कार्यक्रमों के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करने की उम्मीद है। यह मामला अब अदालत में पहुंच गया है, जिसमें छात्रों ने श्री गांधी की यात्रा की अनुमति लेने के लिए अपील दायर की है।
श्री गांधी के 7 मई को परिसर का दौरा करने की उम्मीद थी, जिसे कांग्रेस ने छात्रों के साथ “गैर-राजनीतिक” बातचीत कहा था।
लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा है कि श्री गांधी को अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि परिसर में किसी भी राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जून 2017 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, विश्वविद्यालय ने राजनीतिक गतिविधियों सहित परिसर में गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देने का एक प्रस्ताव अपनाया था।
कांग्रेस ने लगाया TRS पर आरोप
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया है कि टीआरएस ने राहुल गांधी के दौरे को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी पर दवाब बनाया है. कांग्रेस विधायक जग्गा रेड्डी ने कहा है कि राज्य सरकार ने राहुल गांधी की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में विजिट को लेकर संस्थान पर दवाब बनाया है.
उन्होंने कहा कि ओयू हमेशा तेलंगाना आंदोलन समेत छात्र आंदोलनों के लिए जानी जाती है. जबकि हमने साफ कहा था कि ये दौरा गैर राजनीतिक होगा लेकिन फिर उन्होंने इसे कैंसिल कर दिया. 23 अप्रैल को इस कार्यक्रम के लिए आवेदन किया गया था. जिसमें कहा गया था कि ये दौरा गैर राजनीतिक होगा. इसके अलावा इसी मामले को लेकर कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख किया है. वो तेलंगाना हाईकोर्ट चले गए और कहा कि उनके कैंपस में राहुल गांधी के दौरे की अनुमति दी जाए.
2017 से संस्थान में गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर लगी है रोक
रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि साल 2017 में कार्यकारी परिषद ने एक प्रस्ताव रखा था जिसमें राजनीति के साथ-साथ गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर कैंपस में रोक लगा दी थी. ऐसा प्रस्ताव जून 2017 में रखा गया था और अपना लिया गया था. इसके एक साल पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी कैंपस में राजनीतिक और सार्वजनिक बैठकों की अनुमति नहीं देने के आदेश दिए थे. उस दौरान रानीतिक गतिविधियों को लेकर हो रही परेशानी को लेकर कोर्ट में एक याचिका डाली गई थी.