बाइक, स्कूटर और स्कूटी ही नहीं ट्रैक्टरों की बिक्री में भी कमी आई है. लेकिन इसकी वजह क्या है? ग्रामीण भारत के लोग ट्रैक्टर और दोपहिया खरीदने से परहेज क्यों कर रहा है? जानने के लिए पढ़ें ये खास रिपोर्ट

देश में केवल कारें ही नहीं बल्कि दो-पहिया वाहनों की बिक्री भी कम हो रही है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स यानी फाडा के आंकड़े बता रहे हैं कि 4 महीने से दोपहिया वाहनों की सेल लगातार घट रही है…इसका प्रमुख कारण सेमीकंडक्टर्स की पर्याप्त आपूर्ति न होना है. फाडा के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी का कहना है कि चिप शॉर्टेज ने दो-पहिया वाहन बाजार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. कोरोना की तीसरी लहर के कारण लग रहे प्रतिबंधों से यह समस्या और बढ़ सकती है.
फाडा के आंकड़ों के अनुसार सितंबर से दिसंबर तक देश में टू व्हीलर सेल लगभग 10 फीसद घटकर 45 लाख से नीचे रही है, वित्त वर्ष 2020-21 में इस दौरान बिक्री का आंकड़ा 50 लाख के करीब पहुंच गया था…कार और टू-व्हीलर के इतर गांव में खुशहाली का प्रतीक ट्रैक्टर की बिक्री की रफ्तार भी धीमी पड़ रही है. सितंबर से दिसंबर के दौरान देश में ट्रैक्टर सेल 16 फीसदी से ज्यादा घटी है और सिर्फ 2 लाख 5 हजार ही ट्रैक्टर बिक पाए हैं, वित्त वर्ष 2020-21 में इस दौरान 2 लाख 45 हजार ट्रैक्टर बिक गए थे.
भारत की जीडीपी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का योगदान 7.1 फीसदी है. इस क्षेत्र में 3.7 करोड़ लोगों को काम मिला हुआ है. अगर बिक्री का यही हाल रहा तो सरकार के लिए एक नई मुश्किल खड़ी हो सकती है.
सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर काजीडीपी में योगदा बढ़ाकर 12 फीसदी करने की योजना बनाई है. इसके सहारे सरकार इस क्षेत्र में एक करोड़ से ज्यादा रोजगार के नए अवसर भी पैदा करना चाहती है. ऑटो क्षेत्र की इस हालत को देखते हुए सरकार के लिए यह लक्ष्य दूर की कौड़ी हो जाएगा.
भारत जैसे देश की इकोनॉमी की स्थिति समझने के लिए उसके ग्रामीण इलाकों को समझना जरूरी है. ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री से ये अनुमान लगाया जाता है कि ग्रामीण इकोनॉमी के चेहरे पर उदासी है या रौनक.
भारत की अधिकतर आबादी गांवों में ही बसती है. ऐसे में अगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर धीमेपन के संकेत मिल रहे हैं तो उसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. शायद इसी को भांपते हुए कई एजेंसियों ने भारत का जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटा दिया है.