रूस का एक रॉकेट अनियंत्रित होकर धरती की तरफ गिर गया है. इस घटना से पूरी दुनिया में खलबली मची हुई थी. गनीमत रही कि इसका मलबा धरती की उन जगहों पर नहीं गिरा, जहां लोग रहते हैं.

रूसी रॉकेट क्रैश: पूरी दुनिया पर से एक बड़ा खतरा टल गया है. रूस के अनियंत्रित रॉकेट के एक हिस्से ने पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर लिया है. इससे किसी तरह की तबाही ही खबर सामने नहीं आई है. दरअसल इस रॉकेट का लॉन्च सफल नहीं रहा था, जिसके बाद ये अनियंत्रित हो गया. अमेरिकी स्पेस कमांड लगातार इस घटना पर नजर बनाए हुए है. उसका कहना है कि रूस के रॉकेट ने पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर लिया है. इसके अधिकतर हिस्से वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद जल गए, जिसके चलते इंसानों को कम खतरा माना जा रहा है. ऐसी आशंका थी कि इससे कुछ बड़े हिस्से धरती पर गिरकर तबाई मचा सकते हैं.
भारी-भरकम रॉकेट अंगारा-ए5 को बीते साल 27 दिसंबर को रूस के उत्तर-पश्चिमी आर्कान्जेस्क क्षेत्र के प्लासेत्स्क स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया गया था. सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, लॉन्च के जरिए नए अपर स्टेज रॉकेट का परीक्षण किया गया है, जिसे पर्सी बूस्टर के तौर पर जाना जाता है. जिसके बाद इसके इंजन फेल हो गए. इससे पहले बुधवार को अमेरिकी स्पेस कमांड ने बताया था कि रॉकेट ने पृथ्वी के वातावरण में दोबारा दोपहर के 2:08 बजे प्रवेश किया था. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह प्रशांत महासागर में गिरा है. लेकिन सागर के कौन से स्थान पर गिरा है, ये पता लगा पाना मुश्किल है.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने क्या कहा?
एक दिन पहले यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के स्पेस डेबरिस ऑफिस के प्रमुख, होल्गर क्राग ने कहा था कि रूसी रॉकेट का एक हिस्सा 7.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड (4.7 मील प्रति सेकंड) की गति से यात्रा कर रहा था. क्राग ने कहा, ‘इसकी संभावना बहुत कम है कि रॉकेट किसी को नुकसान पहुंचाएगा या किसी को चोट पहुंचाएगा, लेकिन फिर भी इसके जोखिम असल में हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’ इससे पहले मई 2021 में नासा ने चीन को भी काफी फटकार लगाई थी. क्योंकि उसके अनियंत्रित रॉकेट का मलबा अंतरिक्ष स्टेशन से हिंद महासागर में गिर गया था. नासा ने कहा था कि चीन मलबे के ‘जिम्मेदार मानकों को पूरा करने’ में विफल रहा है.
चीन ने कई बार खतरा बढ़ाया
चीनी लॉन्ग मार्च रॉकेट कक्षा से बाहर गिरने के बाद पृथ्वी पर गिरने वाली सबसे बड़ी वस्तुओं में से एक था. इससे पहले साल 2018 में एक चीनी स्पेस लैब का टुकड़ा प्रशांत महासागर के ऊपर गिर गया था और 2020 में चीन के लॉन्ग मार्च रॉकेट ने पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर लिया. हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन में सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के एस्ट्रेनॉमर जोनाथन मैकडॉवेल का कहना है, 32 मीटर (105 फुट) वाले चीनी लॉन्ग मार्च 5 बी रॉकेट की तुलना में पर्सी बूस्टर लगभग 10 मीटर (33 फीट) लंबा है. इसका वजन भी कम है. उन्होंने कहा, ‘इसका कुल मास लगभग चीनी स्टेज के समान है, लेकिन इसमें से अधिकांश शायद लिक्विड रूप में है और वातावरण में ही जल जाएगा, इसलिए धरती पर जोखिम काफी कम है.’