इस हफ्ते की शुरुआत में मर्जर के लिए बीएसई और एनएसई से मंजूरी मिल गयी थी. एचडीएफसी बैंक ने इसकी जानकारी दी और अब आरबीआई की मंजूरी के बाद दोनों के मर्जर में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

लंबी प्रक्रिया के बाद एचडीएफसी लिमिटेड और एफडीएफसी बैंक के विलय का रास्ता साफ हो गया है. एचडीएफसी बैंक की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि उसकी मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के प्रस्ताव के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिल गई है.
एचडीएफसी बैंक ने कहा
एचडीएफसी बैंक ने कहा “एचडीएफसी को आरबीआई का 4 जुलाई, 2022 का पत्र मिला है जिसमें आरबीआई ने योजना के लिए अपनी ‘अनापत्ति’ व्यक्त की है और इसके लिए कुछ शर्तों का उसमें उल्लेख है.” मर्जर के लिए कुछ वैधानिक और रेगुलेटरी मंजूरी जरूरी होंगी. इस हफ्ते की शुरुआत में प्रस्तावित मर्जर के लिए बीएसई और एनएसई से मंजूरी मिल गयी थी. एचडीएफसी बैंक ने इसकी जानकारी दी थी और अब आरबीआई की मंजूरी के बाद दोनों के मर्जर में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
विलय की बड़ी बातें
आपको बता दें करीब 40 अरब डॉलर के इस अधिग्रहण से वित्तीय सेवा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी अस्तित्व में आएगी. एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय के साथ ही कंपनी एक नए वजूद में आ जाएगी. प्रस्तावित यूनिट का कम्बाइंड एसेट बेस लगभग 18 लाख करोड़ रुपये होगा
ग्राहकों पर पड़ेगा क्या असर
इस मर्जर डील का ग्राहकों और शेयरहोल्डर्स पर भी असर देखा जाएगा. एचडीएफसी के प्रत्येक शेयरहोल्डर को एचडीएफसी के 25 शेयरों के बदले एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर मिलेंगे. इसके अंतर्गत एचडीएफसी के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के पास एचडीएफसी बैंक का 41 फीसदी हिस्सा रहेगा और एचडीएफसी बैंक पूरी तरह यानी 100 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के स्वामित्व में हो जाएगा.