महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम के बीच एक बात पर सभी का ध्यान जा रहा है कि आखिर क्या कारण है जो पिछले 9 महीने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर का पद खाली है. क्या उद्धव को इस बगावत का अहसास था?

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी उठापटक के बीच कुछ सवाल लगातार अपनी जगह पर बने हुए हैं, जिनमें से एक यह है कि क्या कारण है जो महाराष्ट्र विधानसभा का स्पीकर का पद पिछले करीब 9 महीने से खाली है? अगर संवैधानिक व्यवस्था के तहत इस सवाल का जवाब खंगाले तो यह संकेत मिलेंगे कि उद्धव को शायद इस बगावती स्थिति का आभास था, क्योंकि ऐसी स्थिति में स्पीकर शिंदे गुट के साथ होते तो उद्धव को इस्तीफा देना पड़ सकता था. शायद इसीलिए शिंदे गुट डिप्टी स्पीकर को हटाना चाहते हैं.
शिंदे गुट छीनना चाहता है डिप्टी स्पीकर की ताकत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NCP के विधायर नरहरि जिरवाल इन दिनों डिप्टी स्पीकर का काम देख रहे हैं. शिंदे गुट ने 24 जून को डिप्टी स्पीकर को पद से हटाने का नोटिस दिया था. इससे ठीक एक दिन पहले शिवसेना ने डिप्टी स्पीकर को 12 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की याचिका दी थी. यानी कि शिंदे गुट फिलहाल जिरवाल को डिप्टी स्पीकर की कुर्सी से हटाकर उनसे स्पीकर की ताकत छीनना चाहता है.
डिप्टी स्पीकर को हटाने के लिए शिंदे गुट को महाराष्ट्र विधानसभा के 144 विधायकों का समर्थन चाहिए. अगर नंबरों की गणित को समझें तो अगर शिंदे और बीजेपी साथ आ जाएं तो इस आंकड़े को पार कर सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो डिप्टी स्पीकर की कुर्सी जानी तय है. ऐसी स्थिति में उद्धव को भी इस्तीफा देना पड़ सकता है.
क्या होगा अगर डिप्टी स्पीकर हट जाए?
साफ है कि अगर डिप्टी स्पीकर हटेंगे को शिंदे गुट अपना या फिर अपने समर्थक दल के विधायक को विधानसभा का स्पीकर बना दिया जाएगा. अगर उद्धव इस्तीफा नहीं देते हैं तो शिंदे अविश्वास प्रस्ताव की सिफारिश करेंगे, अपना स्पीकर होने से शिंदे गुट दलबदल की कार्रवाई से बचने के साथ-साथ अविश्वास प्रस्ताव भी आसानी से पारित करवा सकेंगे.