श्रीलंका की तरह पाकिस्तान भी भारी कर्ज के बोझ तले दब रहा है. अब यह सामने आ रहा है कि भारत का पड़ोसी देश अपने बढ़ते कर्ज को चुकाने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को पट्टे पर दे सकता है।

श्रीलंका की तरह पाकिस्तान भी भारी कर्जे के बोझ में लगातार दबता जा रहा है. अब यह बात निकलकर सामने आ रही है कि भारत का पड़ोसी मुल्क अपने बढ़ते कर्ज का भुगतान करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को पट्टे पर दे सकता है. अल अरबिया पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि काराकोरम नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष मुमताज नगरी ने भी आशंका जताई है कि पाकिस्तान ऐसा कदम उठा सकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान भविष्य में युद्ध का मैदान बन सकते हैं.
गिलगित-बाल्टिस्तान बन सकता है युद्ध का मैदान?
अल अरबिया पोस्ट के बात करते हुए काराकोरम नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष मुमताज नगरी ने आशंका जताई है कि पहले से अलग-थलग और उपेक्षित गिलगित-बाल्टिस्तान ग्लोबल पॉवर्स से लिए भविष्य में युद्ध का मैदान बन सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को चीन को सौंप सकता है। रिपोर्ट बताती है कि पूरी तरह से पाकिस्तान सरकार और सैन्य नियंत्रण के बावजूद भी पाकिस्तान के लिए इस तरह का कदम उठाना आसान नहीं होगा।
आर्थिक संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान उठा सकता है यह कदम?
गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को चीन को सौंपता है तो यह ड्रैगन के लिए वरदान साबित होगा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस कदम से इस्लामाबाद को एक मोटी रकम मिल सकती है जिससे मौजूदा आर्थिक संकट से निपटा जा सकता है।
पाकिस्तान में ही अलग-थलग पड़ा है गिलगित-बाल्टिस्तान
गिलगित-बाल्टिस्तान की आबादी लगातार घट रही है क्योंकि लोग पलायन करने को मजबूर हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में होने वाली आत्महत्याओं में से नौ फीसद गिलगित-बाल्टिस्तान में होती हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में औसतन दो घंटे बिजली मिलती है क्योंकि यह पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही गिलगित-बाल्टिस्तान का जल विद्युत या अन्य संसाधनों पर कोई नियंत्रण नहीं है।
चीन पर अमेरिका की नजर
अमेरिका एशिया में चीन के विस्तार को रोकने के लिए कदम उठा रहा है और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अमेरिका यह कभी बर्दाश्त नहीं करेगा कि किसी नए क्षेत्र पर चीन का कब्जा हो जाए। अमेरिका खुद चीन पर नजर रखने के लिए बलोचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्रों पर नजर रखे हुए है। अमेरिकी कांग्रेस से जुड़ी बॉब लैंसिया का मानना है कि अगर गिलगित-बाल्टिस्तान भारत में होता और बालोचिस्तान आजाद होता तो अफगानिस्तान में अमेरिका की यह स्थिति नहीं होती।