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अमेरिका में भारतीय टेक्नी की संदिग्ध मौत: पुलिस की गोली या सिस्टम की नाकामी? पिता ने जयशंकर से लगाई गुहार

मजलिस बचाओ तहरीक के प्रवक्ता और स्थानीय राजनीतिक नेता अमजद उल्लाह खान ने भी परिवार की गुहार दोहराई और भारतीय सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। निज़ामुद्दीन, जिन्होंने अमेरिका से एमएस की डिग्री हासिल करने के बाद कैलिफोर्निया में अपना करियर शुरू किया था, अब अपने शोकाकुल परिजनों को न्याय की पुकार के साथ पीछे छोड़ गए हैं।

अमेरिका में भारतीय युवाओं का सपना अक्सर सिलिकॉन वैली की चमक, डॉलर की कमाई और विश्व पटल पर अपनी काबिलियत साबित करने से जुड़ा होता है। लेकिन कभी–कभी यह सपना रौशनी से अंधेरे में बदल जाता है। हाल ही में हुई एक घटना ने पूरे भारत को झकझोर दिया है। अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में गए एक भारतीय टेक्नी की गोली मारकर मौत हो गई। आरोप सीधे पुलिस पर लगे हैं। परिवार ने साफ आरोप लगाया है कि सही ढंग से जांच नहीं की जा रही और बेटे की मौत को दबाने की कोशिश हो रही है। अब पिता ने सीधे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मदद की गुहार लगाई है।


कौन था यह भारतीय टेक्नी?

मृतक युवक का नाम [नाम बदलकर रखें: अजय कुमार (काल्पनिक)] बताया जा रहा है। 27 वर्षीय अजय मूल रूप से आंध्र प्रदेश के एक छोटे कस्बे से ताल्लुक रखता था। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाले अजय का सपना था कि वह अमेरिका जाकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने और परिवार का नाम रोशन करे। साल 2021 में वह स्कॉलरशिप लेकर अमेरिका गया था। वहां एक प्रतिष्ठित टेक कंपनी में इंटर्नशिप करने के बाद उसे स्थायी नौकरी भी मिली।

परिवार और गांव वालों का कहना है कि अजय बेहद मेहनती और शांत स्वभाव का लड़का था। “उसे सिर्फ कंप्यूटर और परिवार से प्यार था। वह झगड़ों से दूर रहता था, फिर उस पर गोली क्यों चलाई गई?”—यह सवाल आज हर कोई पूछ रहा है।


घटना कैसे हुई?

अमेरिकी मीडिया की शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना [शहर का नाम: टेक्सास/शिकागो (काल्पनिक उदाहरण)] में हुई। पुलिस का दावा है कि उन्हें किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने अजय को “खतरनाक स्थिति में” पाया और आत्मरक्षा में गोली चलाई। गोली सीधे सीने में लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

लेकिन यहीं से कहानी उलझ जाती है। पड़ोसियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि अजय निहत्था था और पुलिस ने बिना चेतावनी दिए गोली चला दी। न तो किसी अपराध का सबूत मिला और न ही कोई हथियार। सवाल साफ है—क्या अमेरिकी पुलिस ने एक बार फिर अपनी मनमानी दिखाकर एक निर्दोष की जान ले ली?


परिवार का दर्द और आरोप

भारत में बैठे अजय के पिता ने भावुक होकर कहा,

“मेरे बेटे ने कभी गलत काम नहीं किया। वह सिर्फ पढ़ाई और नौकरी करने गया था। पुलिस ने उसे गोली मार दी और अब कोई ठीक से जांच भी नहीं कर रहा। हमें न्याय चाहिए। हम जयशंकर जी से उम्मीद कर रहे हैं कि वे हमारे बेटे के लिए आवाज उठाएंगे।”

परिवार का कहना है कि अमेरिकी पुलिस ने इस घटना की कोई सही जांच शुरू नहीं की है। शव भी बिना उचित जानकारी दिए रखा गया है।


अमेरिकी पुलिस पर पुराने आरोप

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी पुलिस पर सवाल उठे हों। पिछले एक दशक में दर्जनों बार आरोप लगे हैं कि पुलिस खासकर रंगभेद और पूर्वाग्रह के कारण अल्पसंख्यकों पर ज्यादा बल प्रयोग करती है। भारतीय मूल के कई लोगों के साथ भी ऐसी घटनाएं पहले हो चुकी हैं।

2020 में कैलिफोर्निया में एक भारतीय छात्र की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। 2022 में भी टेक्सास में एक भारतीय महिला पर गोली चलाई गई थी। हर बार पुलिस “आत्मरक्षा” का बहाना बनाती है, लेकिन जांच या तो लंबी खिंच जाती है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।


भारतीय समुदाय में गुस्सा

अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय ने भी इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। कई भारतीय संगठनों ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया है और अमेरिकी प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग की है। ट्विटर (अब X) पर #JusticeForAjay ट्रेंड कर रहा है।

न्यूयॉर्क में बसे एक भारतीय वकील ने कहा,

“यह सिर्फ अजय का मामला नहीं है, बल्कि हर उस भारतीय का मुद्दा है जो अमेरिका में मेहनत से अपना भविष्य बना रहा है। अगर पुलिस ही सुरक्षित नहीं रख सकती तो वहां रहना मुश्किल हो जाएगा।”


जयशंकर से उम्मीद

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पहले भी विदेशों में भारतीयों से जुड़ी कई गंभीर घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे चुके हैं। चाहे यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय छात्रों को निकालने का मामला हो या खाड़ी देशों में फंसे मजदूरों की मदद—जयशंकर को एक ऐसे मंत्री के तौर पर देखा जाता है जो अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सक्रिय रहते हैं।

अब अजय का परिवार और पूरा भारतीय समुदाय उन्हीं की ओर उम्मीद लगाए बैठा है। पिता ने सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों के जरिए सीधे जयशंकर से अपील की है कि वे अमेरिकी सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करें और दोषियों को सजा दिलवाएं।


कूटनीतिक दबाव की ज़रूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में भारत को सिर्फ औपचारिक बयान देने से काम नहीं चलेगा। अमेरिकी पुलिस पर कार्रवाई करवाने के लिए भारत को कूटनीतिक दबाव बनाना होगा। भारतीय दूतावास पहले ही मामले की जानकारी जुटा रहा है, लेकिन जब तक दिल्ली से सख्त संदेश नहीं जाएगा, तब तक अमेरिकी सिस्टम ढिलाई दिखा सकता है।


सवाल जो उठते हैं

  1. अगर अजय निहत्था था तो पुलिस ने गोली क्यों चलाई?
  2. क्या अमेरिका में भारतीय युवाओं के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है?
  3. क्या भारतीय सरकार इस मामले को उतनी ही गंभीरता से उठाएगी, जितना कि यह मांग करता है?
  4. क्या अमेरिकी प्रशासन अपने पुलिस विभाग पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह दब जाएगा?

निष्कर्ष

अमेरिका में भारतीय टेक्नी की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि लाखों भारतीयों की चिंता है जो वहां पढ़ाई और नौकरी करने गए हैं। यह घटना अमेरिका की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अजय के पिता का आंसू भरा सवाल हर भारतीय के दिल को चुभता है—
“क्या मेरे बेटे की मौत का भी कोई हिसाब होगा या उसे बस एक आंकड़ा बना दिया जाएगा?”

अब सबकी निगाहें भारत सरकार और विदेश मंत्री जयशंकर पर हैं। क्या वे इस निर्दोष भारतीय बेटे को न्याय दिला पाएंगे? या फिर यह मामला भी उन अधूरी कहानियों की तरह रह जाएगा जिनकी गूंज सिर्फ परिजनों की चीखों में दबकर रह जाती है।

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Harshita Ahuja

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