दिशा पाटनी हाउस फायरिंग केस: इस हमले की साज़िश कथित तौर पर गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और उसके सहयोगी रोहित गोडारा ने विदेश से रची थी। अपने हैंडलर के ज़रिए उन्होंने बरेली से पाँच शूटरों को भेजा, ताकि अभिनेत्री के घर को निशाना बनाकर डर का माहौल पैदा किया जा सके।

भारत में गैंगस्टर नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड की कहानी हमेशा से खतरनाक हथियारों से जुड़ी रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है – तुर्की की बनी ज़िगाना पिस्टल। पंजाब से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, बड़े गैंगवार, हाई-प्रोफाइल शूटआउट और धमकाने की वारदातों में यही पिस्टल सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती नज़र आ रही है।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल से लेकर हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर के बाहर हुई फायरिंग तक – हर जगह ज़िगाना का नाम उभरकर सामने आया है। सवाल यह है कि आखिर क्यों यह पिस्टल गैंगस्टरों की ‘फेवरेट’ बन गई है और कैसे यह हथियार भारत के अपराध जगत में इतनी गहराई से घुस चुका है?
सिद्धू मूसेवाला मर्डर: ज़िगाना का पहला हाई-प्रोफाइल इस्तेमाल
2022 में पंजाबी गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने पूरे देश को हिला दिया था। हमलावरों ने जिस हथियार का इस्तेमाल किया, वह थी तुर्की की ज़िगाना पिस्टल। इस घटना के बाद पहली बार भारत में आम जनता ने इस घातक हथियार का नाम सुना।
गैंगस्टरों ने मूसेवाला पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज हुआ कि उनके शरीर में 20 से अधिक गोलियां लगीं। जांच में पता चला कि वारदात में इस्तेमाल हुई पिस्टलें पाकिस्तान और तुर्की से स्मगल की गई थीं, जिनमें से ज़िगाना सबसे घातक मानी गई।
दिशा पाटनी के घर के बाहर फायरिंग
सितंबर 2025 में मुंबई में अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर के बाहर हुई फायरिंग ने फिर से सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया। इस घटना में भी जांच एजेंसियों ने पाया कि हमलावरों ने तुर्की की ज़िगाना पिस्टल का इस्तेमाल किया।
यह कोई साधारण मामला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी धमकी थी। माना जा रहा है कि इसके पीछे अंडरवर्ल्ड गैंग और बॉलीवुड से जुड़े वसूली नेटवर्क का हाथ है। इस वारदात ने यह साफ कर दिया कि ज़िगाना अब केवल गैंगवार तक सीमित नहीं, बल्कि बॉलीवुड और हाई-प्रोफाइल टारगेट्स तक पहुँच चुकी है।
आखिर क्यों ख़ास है तुर्की की ज़िगाना पिस्टल?
गैंगस्टरों की नज़र में ज़िगाना पिस्टल इतनी लोकप्रिय क्यों है? इसके पीछे कई कारण हैं:
- ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक फीचर – यह पिस्टल मिनटों में दर्जनों गोलियां बरसा सकती है।
- हल्की और कॉम्पैक्ट – आसानी से छुपाई जा सकती है, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बच निकलना आसान हो जाता है।
- कम कीमत, ज़्यादा दहशत – अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत अन्य हाई-टेक पिस्टल्स से कम है, लेकिन इसका असर घातक है।
- स्मगलिंग में आसान – पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रास्ते भारत तक यह आसानी से पहुँचाई जा रही है।
- हाई पावर इम्पैक्ट – गोली लगते ही टारगेट को गंभीर चोट या त्वरित मौत हो सकती है।
पाकिस्तान से सप्लाई का कनेक्शन
इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि ज़िगाना पिस्टल भारत में सीधे तुर्की से नहीं आती। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कराची और लाहौर रूट से तस्करी करके लाया जाता है।
पंजाब और राजस्थान की सीमाओं से होकर यह हथियार भारत में पहुँचता है। ड्रग्स और हथियारों का कॉकटेल स्मगलिंग का यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी जुड़ा माना जाता है।
दिल्ली और मुंबई के गैंगवार में बढ़ता इस्तेमाल
- दिल्ली के बदमाश गिरोहों में ज़िगाना पिस्टल तेजी से लोकप्रिय हो चुकी है। तिलक नगर और नजफगढ़ में हुई हाल की गैंगवार में यही हथियार इस्तेमाल हुआ।
- मुंबई में अंडरवर्ल्ड से जुड़े गैंगस्टर अब पुराने देसी कट्टों की जगह यही पिस्टल ले रहे हैं।
- हाल ही में गाजीपुर और गुरुग्राम में पकड़े गए अपराधियों के पास भी यही पिस्टल मिली।
बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन
दिशा पाटनी के घर के बाहर फायरिंग ने एक पुरानी कहानी को फिर जिंदा कर दिया – बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता।
90 के दशक में दाऊद इब्राहिम और अंडरवर्ल्ड का फिल्म इंडस्ट्री पर गहरा असर था। प्रोड्यूसरों से वसूली, अभिनेताओं को धमकियाँ और फिल्म फाइनेंसिंग में काला धन – सबका संचालन अंडरवर्ल्ड करता था।
अब उसी कहानी का नया चेहरा सामने आया है। फर्क बस इतना है कि पुराने AK-47 और स्टेनगन की जगह अब तुर्की की ज़िगाना पिस्टल ने ले ली है।
सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई
जाँच एजेंसियों का मानना है कि ज़िगाना पिस्टल का इस्तेमाल बढ़ना बेहद चिंताजनक है। वजह यह है कि –
- इसका ट्रेस करना मुश्किल है क्योंकि ये अक्सर बिना सीरियल नंबर वाली ब्लैक मार्केट कॉपीज़ होती हैं।
- स्मगलिंग नेटवर्क इतना मज़बूत है कि सीमाओं पर कड़ा पहरा होने के बावजूद यह आसानी से अंदर आ जाती हैं।
- पुलिस और ATS (एंटी-टेरर स्क्वॉड) ने हाल के महीनों में ज़िगाना पिस्टल की दर्जनों खेप जब्त की हैं।
आम जनता में डर और खौफ
सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लेकर दिशा पाटनी के घर फायरिंग तक की घटनाओं ने आम जनता के दिलों में डर बैठा दिया है।
लोग अब सवाल करने लगे हैं कि क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में भी गैंगस्टरों के पास इतने घातक हथियार खुलेआम कैसे पहुँच रहे हैं?
पंजाब और हरियाणा में रहने वाले लोग बताते हैं कि वहाँ युवाओं को गैंगस्टर रैपर्स और अपराधी आइकन मानने लगे हैं। इन हथियारों का दिखावा सोशल मीडिया पर बढ़ रहा है, जिससे गैंग कल्चर युवाओं को आकर्षित कर रहा है।
राजनीति में उठे सवाल
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से सवाल उठाए हैं कि आखिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने हथियार भारत में कैसे पहुँच रहे हैं।
वहीं बीजेपी का कहना है कि राज्यों की पुलिस को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और केंद्र के साथ मिलकर इस पर सख्त एक्शन लेना होगा।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संकेत
जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल भारत की समस्या नहीं है।
तुर्की से बनने वाली ज़िगाना पिस्टल एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में गैंगस्टरों और आतंकी संगठनों की पसंद बन चुकी है।
भारत में इसका फैलाव इस बात का सबूत है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट अब यहाँ अपनी पकड़ और मज़बूत कर रहे हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि –
- स्मगलिंग नेटवर्क ध्वस्त किया जाए।
- सीमाओं पर निगरानी और मज़बूत की जाए।
- युवाओं को गैंग कल्चर से बचाया जाए।
- बॉलीवुड और हाई-प्रोफाइल लोगों को विशेष सुरक्षा दी जाए।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की और पाकिस्तान पर दबाव डाला जाए।
निष्कर्ष: ‘ज़िगाना’ का साया भारत पर
सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लेकर दिशा पाटनी के घर फायरिंग तक – हर घटना यह साबित करती है कि तुर्की की ज़िगाना पिस्टल अब भारत में गैंगस्टरों की ‘सिग्नेचर वेपन’ बन चुकी है।
यह केवल एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह हथियार आने वाले दिनों में बड़े आतंकी हमलों और राजनीतिक हत्याओं का कारण बन सकता है।
भारत की जनता और सुरक्षा एजेंसियाँ अब यही सवाल पूछ रही हैं – “क्या सरकार ज़िगाना के साए को खत्म कर पाएगी, या यह हथियार अंडरवर्ल्ड का नया चेहरा बनकर कायम रहेगा?”
