कई वाहन, दुकानें और मकान मलबे के नीचे दब गए। SDRF और NDRF की टीमें, एक मेडिकल टीम और तीन एंबुलेंस के साथ तुरंत मौके पर भेजी गई हैं।

उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। चमोली ज़िले में बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचा दी है। आसमान से बरसी मौत की बारिश ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। तेज़ धाराओं में मकान, सड़कें और खेत बह गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, पाँच लोग लापता हैं, जबकि कई घरों को गहरी क्षति पहुँची है। सेना, NDRF और SDRF की टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हैं।
चमोली में तबाही का मंजर
गुरुवार रात अचानक हुई भारी बारिश के बाद चमोली के ग्वालदम और आसपास के गाँवों में हालात बिगड़ गए। पहाड़ों से भयानक धाराएँ नीचे आईं और देखते ही देखते नाले नदी में तब्दील हो गए।
गाँवों में पानी और मलबा घुस आया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नज़र आए।
गवाहों ने बताया कि कुछ ही मिनटों में हालात इतने भयावह हो गए कि चारों ओर सिर्फ चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा – “हमने ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी। मिनटों में घर बहने लगे और खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए।”
पाँच लोग लापता, कई घायल
प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक़, इस घटना में पाँच लोग लापता हैं। इनमें तीन ग्रामीण और दो मजदूर शामिल हैं, जो उस समय खेतों के पास मौजूद थे।
इसके अलावा कई लोग घायल हुए हैं जिन्हें नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घायलों की स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
राहत-बचाव अभियान तेज़
राज्य सरकार ने तुरंत NDRF, SDRF और सेना की टीमों को मौके पर भेजा। राहतकर्मी तेज़ धाराओं में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
भारी बारिश और टूटी सड़कों के कारण बचाव कार्य में दिक़्क़त आ रही है, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर लोगों को सुरक्षित निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा – “हर संभव मदद लोगों तक पहुँचाई जाएगी। प्रभावित परिवारों को सरकार अकेला नहीं छोड़ेगी।”
मौसम विभाग का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के इस दौर में क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटना आम होता जा रहा है।
चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ ज़िले सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
बादल फटने की भयावहता
बादल फटना यानी सीमित इलाके में अचानक बेहद अधिक बारिश होना। यह बारिश सामान्य से कई गुना ज़्यादा होती है और पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा देती है।
चमोली में भी यही हुआ। कुछ ही मिनटों में 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज हुई।
नतीजा – नाले उफान पर, खेत तबाह और सड़कें ध्वस्त।
यात्रियों और चारधाम तीर्थयात्रा पर असर
उत्तराखंड में इस समय चारधाम यात्रा भी चल रही है।
भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से कई मार्ग बंद कर दिए गए हैं।
चमोली की ओर जाने वाली सड़कों पर जगह-जगह भूस्खलन हुआ है, जिससे यात्री फँसे हुए हैं।
सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे फ़िलहाल प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचें और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें।
स्थानीय लोगों की पीड़ा
गाँवों में तबाही का आलम देखकर लोग सहमे हुए हैं।
किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। पशुधन बह गए और घरों में मलबा भर गया।
कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए कहा – “हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं बचा। जान तो बच गई, लेकिन सबकुछ पानी में बह गया।”
आपदा से निपटने की तैयारी पर सवाल
हर साल मानसून के दौरान उत्तराखंड में ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और प्रशासन अब भी आपदा प्रबंधन के मामले में तैयार नहीं है।
भारी बारिश के अलर्ट के बावजूद गाँवों को खाली नहीं कराया गया, न ही सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था की गई।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण ऐसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में अनियंत्रित निर्माण, वनों की कटाई और ग्लेशियरों के पिघलने से स्थिति और बिगड़ रही है।
क्लाउडबर्स्ट का खतरा आने वाले वर्षों में और भी बढ़ सकता है।
राजनीति भी गरमाई
आपदा के बीच राजनीति भी तेज़ हो गई है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर तैयारी शून्य है।
वहीं बीजेपी का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है जबकि सरकार पूरी ईमानदारी से राहत कार्य कर रही है।
सोशल मीडिया पर दहशत और मदद की गुहार
चमोली की इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। कई NGO और समाजसेवी संगठनों ने राहत सामग्री भेजने की घोषणा की है।
#ChamoliCloudburst और #UttarakhandDisaster जैसे हैशटैग ट्विटर (X) पर ट्रेंड कर रहे हैं।
भविष्य की बड़ी चुनौती
उत्तराखंड में क्लाउडबर्स्ट अब सामान्य आपदा बन चुका है।
हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं, हज़ारों लोग विस्थापित होते हैं।
प्राकृतिक आपदा पर काबू नहीं पाया जा सकता, लेकिन आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी तंत्र को मज़बूत करके नुकसान कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि –
- संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य रोके जाएँ।
- ग्रामीणों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए।
- आधुनिक टेक्नोलॉजी से अलर्ट सिस्टम और मज़बूत किया जाए।
निष्कर्ष: पहाड़ों में तबाही और उम्मीद
चमोली में बादल फटने की यह घटना फिर साबित करती है कि उत्तराखंड हर पल आपदा के साए में जी रहा है।
पाँच लोग अब भी लापता हैं, दर्जनों परिवार बेघर हो चुके हैं।
राहत-बचाव जारी है, लेकिन सवाल वही है – क्या आने वाले वर्षों में राज्य इन आपदाओं से निपटने में सक्षम हो पाएगा?
जनता उम्मीद कर रही है कि सरकार इस बार केवल वादों तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस कदम उठाए। क्योंकि पहाड़ अब सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि आपदा की कहानी भी बनते जा रहे हैं।
