बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने इस वीडियो के साथ “सभी हदें पार कर दी हैं।” उन्होंने लिखा— “प्रधानमंत्री की मां का अपमान करने पर पछतावा दिखाने के बजाय कांग्रेस ने झूठ के सहारे आरोपियों का बचाव और समर्थन किया। यह पार्टी अब गांधीवादी नहीं, बल्कि ‘गालीवादी’ बन चुकी है।”

भारतीय राजनीति में तकनीक के इस्तेमाल ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। बिहार कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम द्वारा पोस्ट किया गया एक एआई जनरेटेड वीडियो, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां हीराबेन को लेकर तंज कसा गया, ने सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया है। वीडियो सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आगबबूला हो गई और कांग्रेस पर ‘मां के नाम पर राजनीति करने’ का आरोप जड़ दिया।
बीजेपी का गुस्सा: ‘बीमार मानसिकता की झलक’
बीजेपी नेताओं ने इस वीडियो को “विकृत मानसिकता” करार दिया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा —
“मां का अपमान करके कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि उनकी सोच कितनी गिर चुकी है। जनता उन्हें इस बार ऐसा सबक सिखाएगी कि वे हमेशा याद रखेंगे।”
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सोशल मीडिया पर लगातार झूठ, फेक न्यूज़ और अब एआई तकनीक का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘कहाँ है अपमान?’
दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को बेवजह का हंगामा बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि एआई वीडियो व्यंग्यात्मक था, लेकिन उसमें कहीं भी पीएम मोदी की मां का अपमान नहीं किया गया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा —
“बीजेपी को मुद्दों से भागने की आदत है। असल मुद्दे जैसे बेरोज़गारी, महंगाई और किसान संकट पर बहस करने के बजाय वे एक एआई वीडियो में अपमान ढूंढ रहे हैं।”
सोशल मीडिया पर भिड़ंत
यह विवाद ट्विटर (एक्स), फेसबुक और व्हाट्सऐप पर छा गया।
- बीजेपी समर्थकों ने कांग्रेस पर ‘निजी हमले’ का आरोप लगाते हुए लिखा —
“मां को राजनीति में घसीटना शर्मनाक है।” - कांग्रेस समर्थकों ने पलटवार किया —
“सवाल यह है कि हर आलोचना को मोदी जी खुद और परिवार से क्यों जोड़ लेते हैं?”
#AIWar, #ModiMother और #CongressMockery जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे।
एआई तकनीक और राजनीति: नया खेल
यह विवाद भारत में राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी बहस छेड़ रहा है। जहां कुछ लोग इसे “आधुनिक चुनावी रणनीति” मानते हैं, वहीं कई विशेषज्ञ इसे “खतरनाक ट्रेंड” कह रहे हैं।
तकनीक विशेषज्ञों का कहना है कि एआई वीडियो का इस्तेमाल अगर व्यंग्य और रचनात्मक आलोचना तक सीमित रहे तो ठीक है, लेकिन किसी की परिवार, धर्म या निजी जीवन को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
मोदी की मां का नाम क्यों संवेदनशील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में मां का ज़िक्र भावनात्मक अंदाज़ में करते रहे हैं। उनकी मां हीराबेन मोदी के निधन के बाद भी वे कई मौकों पर उन्हें याद करके जनता से जुड़ते रहे। ऐसे में कांग्रेस द्वारा पोस्ट किए गए इस एआई वीडियो को बीजेपी ने “भावनाओं पर चोट” बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय समाज में ‘मां’ की छवि अत्यंत पूजनीय होती है। इसलिए किसी भी नेता की मां को लेकर तंज कसा जाना सीधे जनता की भावनाओं को भड़काने का काम करता है।
विपक्षी एकता पर असर?
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल बीजेपी को घेरने के लिए ‘इंडिया गठबंधन’ के तहत एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के इस कदम से कई विपक्षी सहयोगी असहज महसूस कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि कुछ क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस को सलाह दी है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों से बचा जाए, वरना बीजेपी को “पीड़ित कार्ड” खेलने का मौका मिलेगा।
जनता की राय: नाराज़गी और समर्थन दोनों
दिल्ली, पटना और लखनऊ जैसे शहरों में लोगों से बात करने पर मिला-जुला माहौल सामने आया।
- कुछ लोगों का कहना है कि राजनीति में व्यक्तिगत हमले नहीं होने चाहिए।
- वहीं, कुछ युवाओं का मानना है कि एआई वीडियो व्यंग्य था, जिसे बेवजह बड़ा बनाया जा रहा है।
एक कॉलेज छात्रा ने कहा —
“जब नेताओं को खुद जनता की तकलीफ़ नहीं दिखती, तो जनता भी अब व्यंग्य और तंज के ज़रिए उन्हें आईना दिखा रही है।”
चुनावी समीकरण पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद बीजेपी के लिए ‘राजनीतिक पूँजी’ बन सकता है। मोदी की मां पर तंज को जनता भावनात्मक रूप से ले सकती है, और बीजेपी इसे चुनावी रैलियों में ज़ोर-शोर से उठाएगी।
वहीं, कांग्रेस के लिए यह कदम “बैकफायर” साबित हो सकता है, क्योंकि जनता को ऐसा लगेगा कि वे मुद्दों की बजाय निजी स्तर पर वार कर रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और बीजेपी के बीच निजी टिप्पणियों को लेकर बवाल मचा हो।
- 2019 के चुनाव में कांग्रेस नेता के बयान “चौकीदार चोर है” पर भी खूब हंगामा हुआ था।
- कई बार सोशल मीडिया पोस्ट्स और कार्टून्स पर भी नेताओं ने एक-दूसरे को घेरा है।
लेकिन एआई वीडियो का मामला नया है, क्योंकि यह तकनीक भविष्य में और बड़े विवाद खड़े कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय: मर्यादा ज़रूरी
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में तंज और आलोचना स्वस्थ परंपरा है, लेकिन जब यह व्यक्तिगत हमलों में बदल जाए तो इसका नकारात्मक असर होता है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा —
“राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मां या परिवार को निशाना बनाना भारत जैसे समाज में आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।”
निष्कर्ष: एआई वीडियो से गरमाई सियासत
बिहार कांग्रेस के एआई वीडियो ने भारतीय राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। बीजेपी इसे जनता की भावनाओं से खिलवाड़ बता रही है, जबकि कांग्रेस कह रही है कि यह सिर्फ व्यंग्य था।
सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन इस विवाद ने यह ज़रूर दिखा दिया है कि आने वाले चुनावों में सोशल मीडिया और एआई तकनीक कितनी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि जनता इस विवाद को कैसे लेती है — इसे “मां के अपमान” के तौर पर या “राजनीतिक ओवररिएक्शन” के रूप में।
