लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा की अध्यक्षता वाली समिति इस समय विभिन्न हितधारक समूहों से फीडबैक ले रही है। एनसीआर के सभी पड़ोसी शहरों — गुरुग्राम, नोएडा, गाज़ियाबाद और फरीदाबाद में शराब पीने की कानूनी उम्र 21 वर्ष है।

दिल्ली में शराब की कानूनी उम्र को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मौजूदा कानून के मुताबिक राजधानी में बीयर और अन्य हल्के मादक पेय पीने की उम्र 21 वर्ष है, जबकि व्हिस्की, रम और वोडका जैसे हार्ड ड्रिंक्स के लिए न्यूनतम उम्र 25 वर्ष तय है। लेकिन अब एक्साइज पैनल ने संकेत दिए हैं कि बीयर पीने की उम्र को घटाकर 18 वर्ष करने पर विचार किया जा रहा है।
यह प्रस्ताव सामने आते ही दिल्ली की सियासत से लेकर आम जनता और सोशल मीडिया तक, हर जगह बहस का दौर शुरू हो गया है।
पैनल की दलील: आधुनिक समाज की मांग
सूत्रों के अनुसार, एक्साइज पैनल का मानना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में शराब पीने की उम्र 18 वर्ष है। ऐसे में दिल्ली जैसे मेट्रो शहर में 21 या 25 साल की शर्त कुछ हद तक अव्यावहारिक लगती है।
पैनल का यह भी तर्क है कि युवाओं के लिए बीयर जैसी हल्की ड्रिंक पर सख्त पाबंदी से अवैध खपत और अवैध बिक्री को बढ़ावा मिलता है। अगर उम्र की सीमा घटा दी जाए तो इससे टैक्स की आमदनी भी बढ़ेगी और शराब की खपत नियंत्रित ढांचे में लाई जा सकेगी।
विपक्ष का पलटवार: ‘युवाओं को बर्बाद करने की साज़िश’
हालांकि इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध भी शुरू हो चुका है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे युवाओं को गलत दिशा में धकेलने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि जब देश नशा-मुक्ति अभियान चला रहा है, तब राजधानी में शराब पीने की उम्र घटाने का कदम समाज को गहरी खाई में धकेल देगा।
कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को घेरने में जुट गई हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सिर्फ राजस्व बढ़ाने के लिए युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रही है।
माता-पिता और अभिभावकों की चिंता
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले माता-पिता का कहना है कि पहले ही नशे की लत युवाओं में बढ़ रही है। अगर कानूनी उम्र घटा दी गई तो यह समस्या और भी भयावह हो जाएगी।
एक अभिभावक ने मीडिया से कहा —
“हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें, लेकिन अगर 18 साल की उम्र में बीयर पर वैध मुहर लगा दी जाएगी तो ये पीढ़ी और तेजी से बिगड़ेगी।”
युवाओं की राय बंटी हुई
दिल्ली के युवा इस मसले पर बंटे हुए नजर आते हैं। कुछ युवाओं का कहना है कि यह उनका ‘अधिकार’ है और 18 साल की उम्र में उन्हें वोट देने, शादी करने और गाड़ी चलाने की अनुमति है, तो बीयर पीने पर रोक क्यों?
वहीं, दूसरी तरफ कुछ जिम्मेदार युवा यह भी मानते हैं कि शराब की लत जीवन और करियर दोनों को बिगाड़ सकती है, इसलिए कानून को सख्त ही रहना चाहिए।
सोशल मीडिया पर गरमा-गरम बहस
जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोल्स की बाढ़ आ गई। ट्विटर (एक्स) पर हैशटैग #BeerAt18 और #DelhiExciseDebate ट्रेंड करने लगे।
कुछ यूज़र्स ने चुटकी ली —
“अब 18 की उम्र में किताबें नहीं, बीयर की बोतल मिलेगी।”
जबकि कुछ ने समर्थन जताते हुए लिखा —
“अगर वोट डाल सकते हैं तो बीयर क्यों नहीं पी सकते?”
शराब नीति और राजनीति का कॉकटेल
दिल्ली में शराब की नीति हमेशा से विवादों में रही है। एक्साइज पॉलिसी में बदलाव को लेकर पहले ही कई जांच और राजनीतिक आरोप लग चुके हैं। ऐसे में बीयर पीने की उम्र घटाने की चर्चा ने एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह प्रस्ताव युवाओं को लुभाने और राजस्व बढ़ाने की सोची-समझी रणनीति है। वहीं सरकार समर्थकों का मानना है कि यह वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम है।
विशेषज्ञों की राय: सेहत बनाम स्वतंत्रता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि 18 से 21 साल की उम्र में शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और इस समय शराब का सेवन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है।
लेकिन दूसरी ओर समाजशास्त्रियों का कहना है कि ‘बैन’ से ज्यादा ज़रूरी है ‘एजुकेशन’। यानी शराब पीने की उम्र घटाने या बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है युवाओं को इसकी खतरनाक आदतों के बारे में जागरूक करना।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो अमेरिका में शराब पीने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है। वहीं यूरोप के कई देशों जैसे जर्मनी, फ्रांस और इटली में बीयर और वाइन के लिए यह सीमा 16 से 18 वर्ष तक है।
दिल्ली सरकार के पैनल का मानना है कि भारत भी धीरे-धीरे वैश्विक मानकों की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि यहां की नीतियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेल खाएं।
आर्थिक पहलू: टैक्स और राजस्व
एक्साइज पैनल की सबसे बड़ी दलील यह है कि अगर बीयर की उम्र घटा दी जाती है तो इससे दिल्ली सरकार की आमदनी में करोड़ों रुपये की बढ़ोतरी होगी। शराब बिक्री से होने वाला टैक्स पहले से ही दिल्ली सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा है।
पैनल का तर्क है कि “जब लोग अवैध तरीके से पी ही रहे हैं तो क्यों न सरकार इसकी वैध बिक्री से राजस्व कमाए?”
छात्रों के बीच चिंता और उत्साह
दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसे कैंपसों में इस बहस का सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। छात्र संगठनों में बहस छिड़ गई है कि क्या यह कदम छात्रों के हित में है या उनके भविष्य के लिए खतरा।
कुछ छात्र संगठनों ने इस कदम का समर्थन किया है, जबकि कई ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर यह प्रस्ताव लागू किया गया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा का सवाल
बीयर की उम्र घटाने का एक बड़ा खतरा सड़क दुर्घटनाओं से भी जुड़ा है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पहले से ही नशे में गाड़ी चलाने के मामलों में बड़ी संख्या युवा ही पकड़े जाते हैं। अगर 18 साल में बीयर की इजाज़त मिल गई तो सड़क सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: जाम या जंजीर?
दिल्ली में शराब पीने की उम्र घटाने पर बहस सिर्फ कानून या नीतियों का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति — सभी से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
एक तरफ सरकार और पैनल इसे आधुनिक सोच और राजस्व वृद्धि की ओर कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष, सामाजिक संगठन और अभिभावक इसे युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाला कदम कह रहे हैं।
आखिरकार, यह फैसला तय करेगा कि दिल्ली की सड़कों और कॉलेजों में 18 साल की उम्र में बीयर खुलेगी या फिर अभी भी 21 की दीवार बनी रहेगी।
