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ट्रंप का तंज: भारत संग रिश्तों की तारीफ़, पर ट्रेड को बताया ‘एकतरफ़ा सौदा’

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कड़े टैरिफ लगाए हैं, जिनमें भारतीय वस्तुओं पर 25% का प्रत्युत्तर शुल्क और रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त 25% का कर शामिल है। इस तरह भारत पर कुल 50% का टैरिफ बोझ डाल दिया गया है।



अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच संबंध बेहद अच्छे हैं, दोनों देशों की दोस्ती शानदार है, लेकिन व्यापारिक रिश्ते पूरी तरह “एकतरफ़ा” रहे हैं। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, क्योंकि यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और भारत दोनों व्यापारिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का दावा कर रहे हैं।


दोस्ती में मिठास, पर कारोबार में शिकायत

डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा – “U.S. gets along with India very well, but trade relationship was one-sided.”
यानी अमेरिका भारत से अच्छे संबंधों पर गर्व करता है, मगर व्यापारिक आंकड़े हमेशा भारत के पक्ष में झुके रहे हैं।

यह पहली बार नहीं जब ट्रंप ने भारत को लेकर “ट्रेड बैलेंस” का मुद्दा उठाया हो। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) के दौरान भी उन्होंने बार-बार यही आरोप लगाया था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर ऊँचे टैरिफ लगाता है और बदले में अमेरिकी बाज़ार से बड़े पैमाने पर मुनाफ़ा कमाता है।


ट्रंप का पुराना रवैया

ट्रंप का बयान अमेरिकी राजनीति में नया नहीं है। वह हमेशा से “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर ज़ोर देते रहे हैं।

  • उन्होंने भारत से आयातित स्टील और एल्युमिनियम पर शुल्क लगाया था।
  • जीएसपी (Generalized System of Preferences) के तहत भारत को मिलने वाली रियायतें भी वापस ले ली थीं।
  • कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ़ करने के बावजूद, व्यापारिक मोर्चे पर उन्होंने सख़्ती दिखाई।

यानी कूटनीतिक रिश्तों में गर्मजोशी और व्यापारिक रिश्तों में तल्ख़ी – यही ट्रंप की नीति का सार रहा है।


भारत-अमेरिका व्यापारिक समीकरण

भारत और अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है।

  • वर्ष 2023 में दोनों देशों का कुल व्यापार लगभग 191 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
  • इसमें भारत ने अमेरिका को 77 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात लगभग 60 अरब डॉलर रहा।
  • यानी भारत का व्यापार अधिशेष लगभग 17 अरब डॉलर का रहा।

यही अधिशेष ट्रंप जैसे नेताओं की आँखों में खटकता है। उनका मानना है कि अमेरिकी कंपनियाँ भारत को जितना देती हैं, उसके बदले में भारत उन्हें उतना अवसर नहीं देता।


अमेरिकी राजनीति में भारत की अहमियत

ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति की चुनावी ज़मीन से भी जुड़ा है। अमेरिका में जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और भारतवंशी समुदाय (Indian diaspora) वहाँ एक अहम वोट बैंक है।

ट्रंप की कोशिश है कि वह भारतीय मूल के वोटरों को यह संदेश दें कि वह भारत के साथ मजबूत रिश्ते चाहते हैं, लेकिन साथ ही अमेरिकी हितों से समझौता नहीं करेंगे। इस संतुलन की राजनीति ही उनके बयान के पीछे की असली रणनीति मानी जा रही है।


मोदी-ट्रंप दोस्ती की तस्वीरें और हकीकत

2019 में ह्यूस्टन में हुआ “Howdy Modi” कार्यक्रम आज भी चर्चा में रहता है। उस समय नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने मिलकर वैश्विक मंच पर दोस्ती का प्रदर्शन किया था। लाखों भारतीय मूल के लोगों की भीड़ के सामने ट्रंप ने मोदी को “India’s true friend” कहा था।

लेकिन इन चमकदार तस्वीरों के पीछे असलियत यह रही कि व्यापारिक मोर्चे पर ट्रंप का रवैया हमेशा कठोर रहा। उनके मुताबिक भारत ने अमेरिका को जितना दिया, उससे कहीं ज्यादा फायदा खुद उठाया।


बाइडेन बनाम ट्रंप: अलग दृष्टिकोण

अगर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन और डोनाल्ड ट्रंप के दृष्टिकोण की तुलना करें, तो फर्क साफ नज़र आता है।

  • बाइडेन प्रशासन भारत को रणनीतिक साझेदार मानता है और चीन के प्रभाव को रोकने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी को ज़रूरी बताता है।
  • वहीं ट्रंप व्यापारिक संतुलन पर अधिक ध्यान देते हैं और बार-बार “एकतरफ़ा संबंध” का मुद्दा उठाते हैं।

इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में ट्रंप दोबारा व्हाइट हाउस लौटते हैं, तो भारत को एक बार फिर व्यापारिक दबाव झेलना पड़ सकता है।


भारतीय दृष्टिकोण

भारत का कहना है कि व्यापारिक रिश्तों को केवल आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता।

  • भारत अमेरिकी कंपनियों को आईटी सेवाओं और फार्मा सेक्टर में बड़ा बाज़ार देता है।
  • लाखों भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई कर हर साल अरबों डॉलर वहाँ की अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं।
  • अमेरिकी रक्षा कंपनियों के लिए भारत आज सबसे बड़ा ग्राहक बन चुका है।

भारत का तर्क है कि अगर निर्यात-आयात के बीच अंतर है, तो उसकी भरपाई इन सेवाओं और निवेश से होती है।


पाकिस्तान और चीन का संदर्भ

ट्रंप के बयान में भले ही सीधा पाकिस्तान या चीन का ज़िक्र न हो, मगर रणनीतिक रूप से यह अहम है।

  • पाकिस्तान को अमेरिका ने पहले ही आर्थिक और सुरक्षा मदद कम कर दी है।
  • चीन के साथ अमेरिका की तनातनी तेज़ है।

ऐसे में भारत ही एकमात्र देश है जो अमेरिका के लिए सबसे भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है। मगर व्यापारिक असंतुलन ट्रंप के लिए एक बड़ा मुद्दा है।


क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान भारत-अमेरिका रिश्तों को कमजोर नहीं करेगा। यह केवल अमेरिकी चुनावी राजनीति का हिस्सा है। लेकिन अगर वह सत्ता में लौटते हैं तो –

  • भारत पर अमेरिकी बाजार खोलने का दबाव बढ़ेगा।
  • आयात शुल्क कम करने की मांग तेज़ होगी।
  • आईटी और दवा उद्योग पर कड़े नियम लगाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी शैली में भारत को लेकर सख़्त बयान दिया है। उन्होंने दोस्ती की तारीफ़ की, लेकिन व्यापार में भारत को “एकतरफ़ा लाभ उठाने वाला” करार दिया।

यह बयान अमेरिका की चुनावी राजनीति, व्यापारिक हितों और वैश्विक रणनीति – तीनों का मिश्रण है।

भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अमेरिका संग रिश्तों की गर्मजोशी को बनाए रखे और साथ ही अपने आर्थिक हितों से भी समझौता न करे।

ट्रंप चाहे कितना भी तंज कसें, सच्चाई यही है कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के लिए अनिवार्य साझेदार बन चुके हैं।

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Harshita Ahuja

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