अनुराग ठाकुर ने दावा किया कि इटली में जन्मी सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में ही प्राप्त की थी।

भारतीय राजनीति में एक बार फिर पुराने विवाद की आग भड़क गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को एक सनसनीखेज दावा किया कि कांग्रेस नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भारत की मतदाता सूची में उस समय दर्ज कर दिया गया था, जब वह भारतीय नागरिक भी नहीं थीं। इस दावे ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि कांग्रेस पार्टी को भी रक्षात्मक मोड में ला दिया है।
BJP का सीधा आरोप — “कानून तोड़ा गया”
BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“सोनिया गांधी का नाम भारतीय वोटर लिस्ट में तब शामिल किया गया जब उन्हें अभी भारतीय नागरिकता भी नहीं मिली थी। यह न सिर्फ चुनाव कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र के साथ खुली धोखाधड़ी है।”
उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला उस समय का है जब सोनिया गांधी इटली की नागरिक थीं और भारत में शादी के बाद रह रही थीं। भाटिया के अनुसार, चुनाव आयोग के पास मौजूद ऐतिहासिक रिकॉर्ड में यह साफ देखा जा सकता है कि उनका नाम मतदाता सूची में पहले ही जोड़ दिया गया था।
कांग्रेस का पलटवार — “BJP चुनावी मुद्दा बना रही”
BJP के आरोपों पर कांग्रेस ने कड़ा जवाब दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा,
“BJP के पास जनता के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे दशकों पुराने मामलों को उखाड़कर लाने में लगे हैं। सोनिया गांधी ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है और इस तरह के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।”
कांग्रेस का कहना है कि यह आरोप सिर्फ आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जनता का ध्यान भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना गांव में हुआ था। 1968 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी से विवाह किया। विवाह के बाद सोनिया गांधी भारत में रहने लगीं, लेकिन भारतीय नागरिकता उन्हें 1983 में मिली। BJP का आरोप है कि 1980 के दशक की शुरुआत में ही उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो चुका था।
कानूनी दृष्टिकोण
भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत, किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवश्यक है कि वह भारतीय नागरिक हो। यदि कोई विदेशी नागरिक बिना नागरिकता के वोटर लिस्ट में शामिल हो जाता है, तो यह एक गंभीर कानूनी उल्लंघन है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा,
“अगर ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है, लेकिन हमें ठोस सबूत देखने होंगे। कई बार पुराने रिकॉर्ड में तकनीकी त्रुटियां भी पाई जाती हैं।”
BJP के पास सबूत?
BJP ने दावा किया है कि उनके पास 1980 के दशक की मतदाता सूची की कॉपी है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम स्पष्ट रूप से मौजूद है। पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग इस मामले की स्वतंत्र जांच करे और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
गौरव भाटिया ने यहां तक कहा,
“हम इस मामले को सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं बनाएंगे, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। देश के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
कांग्रेस का बचाव — ‘राजनीतिक साजिश’
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि BJP इस तरह के आरोप इसलिए ला रही है क्योंकि सोनिया गांधी अभी भी भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा हैं। पार्टी का आरोप है कि यह विवाद विपक्ष को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा,
“अगर BJP के पास सबूत हैं तो वे कोर्ट में जाएं, मीडिया में आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदल जाती। यह पूरी तरह से पॉलिटिकल ड्रामा है।”
चुनाव आयोग की भूमिका
अब नजरें चुनाव आयोग पर हैं कि वह इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि आयोग पुराने रिकॉर्ड की जांच कर सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है।
सोशल मीडिया पर गरमाहट
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #SoniaInVoterList और #BJPCharges ट्रेंड करने लगे।
- BJP समर्थक इसे “भारत के लोकतंत्र पर हमला” बता रहे हैं।
- कांग्रेस समर्थक इसे “BJP का पॉलिटिकल स्टंट” कह रहे हैं।
ट्विटर (X) पर कई मीम्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें इस मुद्दे को लेकर दोनों पार्टियों पर तंज कसे जा रहे हैं।
राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
- BJP इसे ‘राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद’ के नैरेटिव से जोड़ सकती है।
- कांग्रेस इसे ‘BJP की नकारात्मक राजनीति’ के उदाहरण के रूप में पेश करेगी।
राजनीतिक विश्लेषक संजय सिंह कहते हैं,
“चुनावी मौसम में इस तरह के पुराने मुद्दों का उठना आम बात है। सवाल यह है कि क्या जनता इसे गंभीरता से लेगी या इसे सिर्फ चुनावी नाटक समझेगी।”
अंतरराष्ट्रीय नजरिया
क्योंकि सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ था, यह विवाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी नजर में आ गया है। कई विदेशी अखबारों ने इसे “भारत में विदेशी मूल की नेता पर पुराना आरोप” के रूप में रिपोर्ट किया है। इससे भारत की राजनीति में विदेशी मूल के नेताओं की भूमिका पर फिर बहस शुरू हो गई है।
आगे क्या?
BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को यहां नहीं छोड़ेगी। पार्टी ने कहा है कि वह पुराने दस्तावेज और वोटर लिस्ट चुनाव आयोग और अदालत में पेश करेगी। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि BJP ने बिना सबूत के झूठे आरोप लगाए, तो वह मानहानि का केस दायर करेगी।
निष्कर्ष
सोनिया गांधी का नाम नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में होने का आरोप, चाहे सच हो या राजनीतिक रणनीति, इसने निश्चित रूप से देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग और अदालत इस पर क्या फैसला लेते हैं और जनता इसे कैसे लेती है।
