आरोपी महेंद्र प्रसाद (32) चंदन फील्ड फायरिंग रेंज स्थित DRDO गेस्ट हाउस में मैनेजर के रूप में कार्यरत था।

देश की रक्षा प्रणाली की सबसे अहम एजेंसियों में से एक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में जासूसी का बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली स्थित DRDO के गेस्ट हाउस के मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आरोप है कि वह पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI को देश की गोपनीय जानकारी भेज रहा था। यह खुलासा न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए झटका है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि देश की रक्षा से जुड़े ठिकानों में सुरक्षा की परतें कितनी मजबूत हैं।
गिरफ्तारी कैसे हुई? सुरक्षा एजेंसियों का ऑपरेशन
सूत्रों के मुताबिक, DRDO के गेस्ट हाउस मैनेजर की संदिग्ध गतिविधियों पर पिछले कई महीनों से निगरानी रखी जा रही थी।
- केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला था कि DRDO के भीतर से संवेदनशील जानकारी लीक हो रही है।
- जासूसी नेटवर्क का धागा खींचते-खींचते जांच टीम गेस्ट हाउस मैनेजर तक पहुँची।
- फोन कॉल रिकॉर्ड, मैसेजिंग ऐप चैट्स और ईमेल ट्रैक करने पर सामने आया कि वह लगातार पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर से संपर्क में था।
जांच अधिकारियों ने यह भी पाया कि मैनेजर को कई बार हवाला के जरिए पैसे भेजे गए, ताकि वह DRDO के उच्च अधिकारियों और विदेशी मेहमानों की आवाजाही, मीटिंग शेड्यूल और अन्य संवेदनशील विवरण जुटाकर भेजे।
पैसों और लालच का जाल
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मैनेजर को ISI एजेंटों ने पहले “फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट” और फिर “ऑनलाइन रिलेशनशिप” के जरिए फंसाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और चैट एप्लिकेशंस पर एक महिला के रूप में हैंडलर ने उससे संपर्क किया और धीरे-धीरे उसे भरोसे में लेकर जासूसी करवानी शुरू की।
- हर गोपनीय जानकारी के बदले उसे 5,000 से 20,000 रुपये तक मिलते थे।
- पैसों के अलावा उसे महंगे गिफ्ट, मोबाइल और विदेशी ब्रांड के कपड़े भी भेजे गए।
- कुछ रकम सीधे बैंक अकाउंट में डाली गई, जबकि ज्यादातर पेमेंट हवाला नेटवर्क के जरिए हुई।
यह वही क्लासिक “हनी ट्रैप” पैटर्न है, जिसे ISI कई बार भारतीय सैन्य और नागरिक अधिकारियों को फंसाने में इस्तेमाल करती रही है।
गोपनीय जानकारी का लीक होना कितना खतरनाक?
DRDO का गेस्ट हाउस सिर्फ मेहमानों के ठहरने की जगह नहीं है — यह वह लोकेशन है जहां देश और विदेश के टॉप डिफेंस साइंटिस्ट, इंजीनियर और सैन्य अधिकारी आते-जाते हैं।
- यहां होने वाली मीटिंग्स, आने-जाने वाले मेहमानों का रिकॉर्ड और उनके कमरों की बुकिंग की जानकारी अपने आप में संवेदनशील मानी जाती है।
- मेहमानों के शेड्यूल से उनकी प्रोजेक्ट मीटिंग्स, हथियारों के ट्रायल और टॉप-सीक्रेट डिफेंस प्रोजेक्ट्स का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अगर यह जानकारी दुश्मन देश के पास पहुँच जाए, तो वह भारत की रक्षा रणनीति और हथियार विकास योजनाओं को लेकर पहले से तैयारी कर सकता है।
पुलिस और एजेंसियों की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है।
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि —
- क्या DRDO के अन्य कर्मचारी भी इस नेटवर्क में शामिल थे?
- आरोपी ने कितनी बार जानकारी भेजी और किस-किस प्रोजेक्ट की डिटेल लीक हुई?
- पाकिस्तान में यह जानकारी किस लेवल तक पहुंची?
फॉरेंसिक टीम ने आरोपी के मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क जब्त कर ली है। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और ईमेल से निकाले गए डेटा की जांच जारी है।
ISI का पुराना पैटर्न, नई वारदात
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर भारत में जासूसी नेटवर्क चलाने के कई आरोप पहले भी लग चुके हैं। खासकर सेना, नौसेना और DRDO जैसी संस्थाओं के लोअर लेवल के कर्मचारियों को निशाना बनाना इसका पुराना तरीका है।
- 2018 में नौसेना के कई जवान हनी ट्रैप में फंसकर गोपनीय जानकारी लीक करते पकड़े गए थे।
- 2021 में राजस्थान में BSF जवान को फेसबुक पर महिला बनकर फंसाया गया और संवेदनशील लोकेशन की तस्वीरें भेजवाई गईं।
इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही है — फर्क सिर्फ इतना है कि टारगेट DRDO का गेस्ट हाउस मैनेजर बना।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
जैसे ही यह खबर सामने आई, विपक्ष ने सरकार पर सुरक्षा चूक का आरोप लगाया।
- कांग्रेस ने कहा, “जब देश की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा एजेंसी के भीतर से जानकारी लीक हो सकती है, तो सुरक्षा के बाकी मोर्चे पर जनता कितना सुरक्षित है?”
- वहीं, बीजेपी प्रवक्ताओं ने दावा किया कि “जासूसी नेटवर्क को समय रहते पकड़ना हमारी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता है।”
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा और #DRDO #ISI जैसे हैशटैग वायरल हो गए।
लोग क्या कह रहे हैं?
- रक्षा विशेषज्ञ: “गेस्ट हाउस में काम करने वाले कर्मचारियों की भी सुरक्षा क्लियरेंस अनिवार्य होनी चाहिए। अभी तक यह प्रोटोकॉल सिर्फ वैज्ञानिकों और उच्च अधिकारियों के लिए था।”
- सुरक्षा एजेंसियों के पूर्व अधिकारी: “ISI का नेटवर्क सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि देश के भीतर भी फैला है। छोटे-छोटे लीक भी लंबे समय में बड़े खतरे में बदल सकते हैं।”
- आम जनता: सोशल मीडिया पर लोग आरोपी को “देशद्रोही” बताते हुए कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
भविष्य में ऐसे मामलों को कैसे रोका जाए?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम हैं —
- सभी कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन — चाहे वह अधिकारी हो या सपोर्ट स्टाफ।
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग — संवेदनशील पदों पर काम करने वालों के सोशल मीडिया कॉन्टैक्ट्स पर नजर रखना।
- फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच — अचानक आने वाली बड़ी रकम की जांच जरूरी।
- साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग — कर्मचारियों को सिखाना कि किस तरह फर्जी प्रोफाइल और हनी ट्रैप से बचा जाए।
निष्कर्ष: भरोसे में सेंध, सुरक्षा को झटका
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस भरोसे के टूटने का है जो हम अपनी रक्षा एजेंसियों की दीवारों में देखते हैं। DRDO जैसी संस्था, जो देश की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता की रीढ़ मानी जाती है, वहां से अगर दुश्मन को जानकारी मिल सकती है, तो यह चेतावनी है कि हमें सुरक्षा तंत्र को और भी मजबूत करना होगा।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है, लेकिन जांच के बाद इस जासूसी कांड के और कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। सवाल अब भी वही है — क्या हम अपनी सुरक्षा के किले में मौजूद ‘अंदरूनी दुश्मनों’ को पहचानने और रोकने में सक्षम हैं?
