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अमेरिका में खालिस्तानी उग्रवाद का नया चेहरा: BAPS मंदिर पर हमला, भारत-विरोधी नारे लिखकर भड़काया माहौल

BAPS स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की यह घटना reportedly 11 अगस्त को अमेरिका के इंडियाना राज्य के ग्रीनवुड शहर में हुई।

अमेरिका में खालिस्तानी तत्वों की करतूत एक बार फिर चर्चा में है। इस बार निशाना बना है वॉशिंगटन डीसी के पास स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर, जो न केवल भारतीय प्रवासियों की धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक भी माना जाता है। मंदिर की दीवारों पर खालिस्तान समर्थक नारे और भारत-विरोधी संदेश लिखे गए, जिससे न केवल हिंदू समुदाय, बल्कि पूरे भारतीय प्रवासी समाज में आक्रोश फैल गया है।

घटना की पूरी कहानी

मिली जानकारी के अनुसार, घटना देर रात हुई जब मंदिर परिसर में कोई मौजूद नहीं था। अज्ञात लोगों ने मंदिर की बाहरी दीवारों पर पीले और लाल रंग के स्प्रे पेंट से “Khalistan Zindabad” और “India Out” जैसे नारे लिख दिए। इसके अलावा, एक दीवार पर भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई।

स्थानीय लोगों ने सुबह मंदिर पहुंचने पर दीवारों पर लिखे नारे देखे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। फॉरेंसिक टीम ने मौके से स्प्रे पेंट के डिब्बे और सीसीटीवी फुटेज के कुछ हिस्से अपने कब्जे में लिए हैं।

खालिस्तानी उग्रवाद की विदेशी साजिश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना कोई अचानक हुई तोड़फोड़ नहीं है, बल्कि खालिस्तानी समर्थक संगठनों की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। खालिस्तान आंदोलन, जो भारत में पंजाब राज्य को अलग देश बनाने की मांग करता है, बीते कुछ सालों में कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में सक्रिय हुआ है।

अमेरिका में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं —

  • जनवरी 2023 में न्यू जर्सी के एक हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी नारे लिखे गए थे।
  • अगस्त 2022 में कैलिफोर्निया के एक मंदिर में भी इसी तरह की तोड़फोड़ हुई थी।

भारतीय दूतावास ने जताई कड़ी नाराज़गी

वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और अमेरिकी प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूतावास ने ट्वीट कर कहा —
“हिंदू मंदिरों पर इस तरह का हमला न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात है, बल्कि यह अमेरिका में भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश है।”

दूतावास ने अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर जांच में सहयोग देने की बात भी कही है।

स्थानीय पुलिस की कार्रवाई

वर्जीनिया पुलिस ने मामले को “हेट क्राइम” यानी घृणा-आधारित अपराध के तहत दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, मंदिर परिसर के बाहर लगे CCTV कैमरों में दो संदिग्ध दिख रहे हैं, जो हूडी और मास्क पहने हुए थे। दोनों के पास बैग थे, जिनमें से स्प्रे पेंट के डिब्बे निकाले गए थे।

पुलिस ने संदिग्धों की पहचान के लिए जनता से मदद मांगी है और जानकारी देने वाले को इनाम देने की घोषणा की है।

हिंदू समुदाय में भय और चिंता

अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लोग इस घटना से बेहद दुखी और चिंतित हैं। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने कहा —
“यह सिर्फ एक मंदिर पर हमला नहीं है, बल्कि हमारी पहचान और हमारे धर्म पर हमला है। हम यहां शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं हमें असुरक्षित महसूस कराती हैं।”

कई प्रवासी भारतीय संगठनों ने मंदिर परिसर में एकजुटता मार्च निकालने की घोषणा की है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए हैं। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #StopKhalistaniTerror और #ProtectHinduTemples जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने अमेरिकी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि खालिस्तानी तत्व अमेरिका की भूमि का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं और इस पर रोक लगनी चाहिए।

भारत में भी गूंज

दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और अन्य शहरों में हिंदू संगठनों ने अमेरिका में मंदिर पर हमले की निंदा की है। कई संगठनों ने भारतीय विदेश मंत्रालय से मांग की है कि वह अमेरिकी प्रशासन पर इस मामले में दबाव बनाए।

खालिस्तानी गतिविधियों पर बढ़ती नजर

भारत सरकार पहले ही खालिस्तानी आतंकवाद और उससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई तेज कर चुकी है। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और पंजाब पुलिस ने हाल के महीनों में कई खालिस्तानी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत ने कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका को कई बार चेतावनी दी है कि उनके देश में सक्रिय खालिस्तानी समूह न केवल भारत विरोधी हैं, बल्कि आतंकवाद से भी जुड़े हैं।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कितनी मजबूत है। खासकर ऐसे समय में जब नफरत फैलाने वाले समूह सोशल मीडिया और विदेशों में अपने नेटवर्क के जरिए भड़काऊ गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

मंदिर प्रबंधन ने प्रशासन से मांग की है कि न केवल दोषियों को सजा मिले, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाए।

अमेरिका-भारत संबंधों पर असर?

विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अमेरिका और भारत के रिश्तों पर भी असर डाल सकती हैं, खासकर तब जब भारत बार-बार अपने प्रवासी नागरिकों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की बात उठाता रहा है।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और दोषियों को जल्द पकड़ा जाएगा।


निष्कर्ष:
BAPS मंदिर पर हुआ यह हमला सिर्फ एक धार्मिक स्थल की दीवारों पर लिखी गई कुछ पंक्तियाँ नहीं हैं, बल्कि यह भारत की संस्कृति, उसकी एकता और उसके प्रवासी समाज की सुरक्षा पर सीधा हमला है। अब देखने वाली बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है, और क्या खालिस्तानी तत्वों के इस नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा।

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Harshita Ahuja

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