इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 – राजधानी दिल्ली और एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में लाखों वाहन मालिकों के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद उन वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी गाड़ियां इन तय उम्र की सीमा में आती हैं और जिन्हें अब तक चालान, जब्ती या स्क्रैपिंग जैसी सख्त कार्रवाई का डर था।
पृष्ठभूमि: क्यों लगी थी पुरानी गाड़ियों पर रोक?
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2015 में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था, जिसके तहत 15 साल से अधिक पुरानी पेट्रोल गाड़ियां और 10 साल से अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों को सार्वजनिक सड़कों पर चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया था।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य राजधानी के बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करना था, क्योंकि पुरानी गाड़ियां न केवल ज्यादा धुआं छोड़ती हैं, बल्कि उनका प्रदूषण नियंत्रण स्तर भी कमज़ोर होता है।
इसके बाद दिल्ली सरकार, आरटीओ और पुलिस प्रशासन ने इस आदेश के तहत सख्ती से कार्रवाई शुरू की। हजारों पुरानी गाड़ियों को जब्त किया गया, चालान काटे गए और कई को स्क्रैपिंग यार्ड में भेजा गया।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा?
पुरानी गाड़ियों के मालिकों और कई वाहन संगठनों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका तर्क था कि —
- सभी पुरानी गाड़ियां पर्यावरण के लिए उतनी हानिकारक नहीं होतीं, खासकर वे जो सही मेंटेनेंस और फिटनेस टेस्ट पास करती हैं।
- कई लोगों के लिए पुरानी गाड़ियां आजीविका का साधन हैं, जिन्हें अचानक बंद करना आर्थिक रूप से भारी पड़ेगा।
- पुराने विंटेज वाहनों या शौकिया तौर पर रखी गाड़ियों को भी बिना भेदभाव के हटाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल इस आदेश के तहत चल रही कार्रवाई पर रोक लगाई जाती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा है कि वे अगले चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें, जिसमें यह बताया जाए कि पुरानी गाड़ियों के प्रदूषण स्तर को आंकने के लिए कौन-कौन से वैज्ञानिक और तकनीकी मानक अपनाए जा सकते हैं।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह अंतरिम आदेश है और अंतिम फैसला सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही लिया जाएगा।
वाहन मालिकों में खुशी की लहर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर में हजारों वाहन मालिकों ने राहत की सांस ली।
दिल्ली निवासी राकेश शर्मा, जिनके पास 2009 मॉडल की डीजल SUV है, ने कहा –
“हम जैसे लोगों के लिए यह फैसला राहत की तरह है। मेरी गाड़ी फिटनेस टेस्ट पास कर चुकी है, फिर भी उसे जब्त करने की कार्रवाई चल रही थी। अब कम से कम हमें थोड़ा समय मिल गया है।”
सरकार का रुख
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण उनकी प्राथमिकता है।
“हमारा मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना है। अगर कोर्ट के निर्देशानुसार वैज्ञानिक तरीके से गाड़ियों की जांच होगी, तो हम उसी का पालन करेंगे,” अधिकारी ने कहा।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता
पर्यावरण कार्यकर्ता और ‘ग्रीन अर्थ ट्रस्ट’ के संस्थापक डॉ. अनिल गुप्ता का कहना है कि यह फैसला वाहन मालिकों के लिए राहत भले ही हो, लेकिन इससे प्रदूषण कम करने की लड़ाई को झटका लग सकता है।
“पुरानी गाड़ियां औसतन नई गाड़ियों की तुलना में 5 से 10 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं। अगर इन्हें फिर से सड़कों पर उतरने की अनुमति दी गई, तो दिल्ली की हवा और खराब हो सकती है,” डॉ. गुप्ता ने चेतावनी दी।
अगला कदम क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। इसमें विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है —
- पुरानी गाड़ियों के प्रदूषण स्तर की जांच के लिए उन्नत तकनीक का इस्तेमाल
- फिटनेस टेस्ट पास करने वाली पुरानी गाड़ियों को सीमित अवधि के लिए चलाने की अनुमति
- सार्वजनिक परिवहन में पुरानी गाड़ियों को हटाने की प्राथमिकता
- प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान
लोगों की अलग-अलग राय
- राहुल मेहता, टैक्सी चालक: “अगर फिटनेस टेस्ट से गाड़ी सही साबित हो जाए, तो उसे चलाने की इजाजत मिलनी चाहिए।”
- सुनीता शर्मा, पर्यावरण कार्यकर्ता: “दिल्ली की हवा पहले ही खराब है, पुरानी गाड़ियों को फिर चलने देना खतरनाक होगा।”
- मोहित अग्रवाल, कार कलेक्टर: “मेरे पास कई विंटेज कारें हैं, जिन्हें मैं साल में सिर्फ 2-3 बार शो के लिए निकालता हूं। इन्हें भी बैन करना अनुचित है।”
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम फैसला लाखों वाहन मालिकों के लिए फिलहाल एक राहत की खबर है, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक बहस जारी रहेगी। एक तरफ वाहन मालिक आर्थिक और भावनात्मक कारणों से अपनी गाड़ियां बचाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ पर्यावरण विशेषज्ञ प्रदूषण के खतरों की ओर इशारा कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि आने वाले हफ्तों में अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या अंतिम रुख अपनाती है।
