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राजस्थान के जालोर में दर्दनाक हादसा! स्लीपर बस- बाइक की टक्कर के बाद भीषण आग, तीन की मौके पर मौत

यह हादसा राजस्थान के जालोर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 68 पर हुआ।

राजस्थान के जालोर जिले में मंगलवार देर रात एक ऐसा सड़क हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। एक तेज रफ्तार स्लीपर बस ने सामने से आ रही मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी, जिसके बाद दोनों वाहन आग की लपटों में घिर गए। इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। आग इतनी भीषण थी कि पास खड़े लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन तेज लपटों और धमाकों के कारण कोई भी पास नहीं जा सका।


घटना कैसे हुई

पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह हादसा जालोर-पाली हाईवे पर हुआ। देर रात लगभग 12:15 बजे, स्लीपर बस अहमदाबाद से जयपुर जा रही थी। बस जैसे ही भाडसर गांव के पास पहुंची, सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक बस के आगे के हिस्से में फंस गई और कुछ ही सेकंड में चिंगारियां उठने लगीं। देखते ही देखते बस में आग लग गई, जो धीरे-धीरे पूरी गाड़ी में फैल गई।


भीषण आग और चीख-पुकार

हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। बस में मौजूद यात्री चीखते-चिल्लाते हुए खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। कुछ लोग तुरंत बस से कूद गए, जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन कई लोग आग और धुएं में फंस गए। मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

एक चश्मदीद ने बताया —

“टक्कर के बाद बस के आगे से जोरदार धमाका हुआ, फिर आग ने पूरी बस को घेर लिया। कुछ ही पलों में सब कुछ जलकर राख हो गया।”


दमकल और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलते ही जालोर पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने में लगभग 45 मिनट लग गए। इस दौरान हाईवे पर दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। पुलिस ने घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जबकि मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया।

जालोर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और लापरवाही प्रतीत हो रही है। उन्होंने कहा कि घटना की पूरी जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।


घायलों का हाल

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, हादसे में बस के चालक और कुछ यात्री गंभीर रूप से झुलस गए हैं। कुछ को जयपुर और जोधपुर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है।


स्थानीय लोगों का आक्रोश

घटना के बाद भाडसर गांव और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि हाईवे पर तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग के कारण इस तरह के हादसे बार-बार हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर, सिग्नल और निगरानी कैमरे लगाए जाएं, ताकि यातायात नियमों का पालन हो सके।


स्लीपर बसों पर सवाल

स्लीपर बसें लंबे रूट पर रात में चलती हैं और अक्सर इन पर यात्रियों की नींद और आराम के लिए विशेष सीटिंग अरेंजमेंट होता है। लेकिन कई बार इन्हें तेज रफ्तार में चलाया जाता है, ताकि समय पर गंतव्य तक पहुंचा जा सके। कई हादसों में देखा गया है कि ड्राइवर की लापरवाही, थकान या सड़क की खराब स्थिति बड़ी दुर्घटनाओं की वजह बनती है।


पिछले हादसों की याद

जालोर-पाली हाईवे पहले भी कई जानलेवा हादसों का गवाह बन चुका है।

  • 2022 में एक ट्रक और बस की टक्कर में 8 लोगों की मौत हुई थी।
  • 2023 में एक मिनी बस के पलटने से 5 लोग मारे गए थे।
    स्थानीय लोग लंबे समय से इस मार्ग को “डेथ हाईवे” कहकर संबोधित कर रहे हैं।

प्रशासन की चुनौतियां

राजस्थान में सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार ने हाल ही में सड़क हादसों को कम करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव धीमा है। पुलिस के पास संसाधनों की कमी है और हाईवे पर गश्त की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।


पीड़ित परिवारों का दर्द

मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक मृतक के भाई ने बताया —

“मेरा भाई मजदूरी करके घर लौट रहा था। उसे क्या पता था कि यह उसकी आखिरी रात होगी।”

सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन परिवारों का कहना है कि यह रकम उनके दर्द को कम नहीं कर सकती।


सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं:

  1. ड्राइवरों का नियमित प्रशिक्षण और मेडिकल जांच।
  2. वाहनों की तकनीकी जांच और मेंटेनेंस।
  3. हाईवे पर निगरानी बढ़ाना और ओवरस्पीडिंग पर सख्त जुर्माना।

निष्कर्ष — सबक और जिम्मेदारी

जालोर का यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि सड़क पर लापरवाही की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है। यह सिर्फ पीड़ित परिवारों की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज और सिस्टम की असफलता है।

जरूरत है कि प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और आम नागरिक मिलकर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दें। जब तक यह नहीं होगा, तब तक हाईवे पर मौत का यह सिलसिला नहीं रुकेगा।

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Harshita Ahuja

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