पुतिन के भारत दौरे को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कहा कि नई दिल्ली इस आगामी मुलाकात को लेकर “उत्साहित और प्रसन्न” है।
उन्होंने भारत-रूस के पूर्ववर्ती शिखर सम्मेलनों को “द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर” बताया और इस बार की प्रस्तावित बैठक को भी बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।

2025 का अगस्त महीना भारत के कूटनीतिक कैलेंडर में एक बेहद अहम मोड़ बनता दिख रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, और इस घोषणा ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मास्को में मौजूदगी के दौरान यह पुष्टि की कि राष्ट्रपति पुतिन अगस्त के अंतिम सप्ताह में भारत का दौरा करेंगे।
डोभाल का मास्को दौरा न केवल रणनीतिक रहा, बल्कि इसने भारत-रूस संबंधों में एक नई जान फूंक दी है।
डोभाल की मास्को यात्रा: गुप्त एजेंडा या घोषित मिशन?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 4 अगस्त को एक गोपनीय दौरे पर मास्को पहुंचे थे। शुरुआत में इस दौरे को एक “सामान्य द्विपक्षीय वार्ता” कहा गया, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि इसमें बड़े रणनीतिक और भू-राजनीतिक मसलों पर चर्चा हुई है।
डोभाल ने रूसी एनएसए निकोलाई पेत्रुशेव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कई घंटों की बैठकों में हिस्सा लिया। उसी बैठक में यह तय किया गया कि पुतिन इसी महीने भारत का दौरा करेंगे।
मोदी-पुतिन मुलाकात: कौन से मुद्दे होंगे चर्चा में?
यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी जब से यूक्रेन युद्ध का नया चरण शुरू हुआ है। भारत और रूस के बीच इस मुलाकात में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है:
- रक्षा सौदे: भारत को S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की अगली खेप, और उन्नत सैन्य तकनीक।
- ऊर्जा सहयोग: रूसी कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारत की स्थिति।
- ब्रिक्स विस्तार और वैश्विक शक्ति संतुलन।
- यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका और तटस्थता।
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के कारण संबंधों में तनाव भी है।
अमेरिका को संदेश?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ के बाद, यह मुलाकात भारत की एक रणनीतिक प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है।
भू-रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना होगा।
एक वरिष्ठ कूटनीतिक सूत्र के अनुसार,
“अगर भारत रूस को गले लगाता है, तो यह अमेरिका को स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के लिए किसी भी पक्ष पर झुकने वाला नहीं।”
भारत-रूस संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और रूस (पूर्व में सोवियत संघ) के संबंध दशकों पुराने हैं। 1971 की संधि हो, या 1990 के बाद के रक्षा सौदे — रूस हमेशा भारत का आज़माया हुआ रणनीतिक साझेदार रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में जब पश्चिमी देश रूस पर आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगा रहे हैं, तब भारत ने अपनी तटस्थ कूटनीति को कायम रखते हुए रूस के साथ संबंध बनाए रखा।
पुतिन की यात्रा क्यों है खास?
- यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन की विदेश यात्राएं सीमित रहीं हैं, ऐसे में भारत दौरा बेहद प्रतीकात्मक है।
- यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत G20 और SCO जैसी संस्थाओं में अहम भूमिका निभा रहा है।
- इससे यह संकेत जाएगा कि भारत अब केवल ‘गुटनिरपेक्ष’ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय हित आधारित कूटनीति’ पर चल रहा है।
चीन की निगाहें भी टिकी
भारत-रूस की नजदीकी से चीन भी असहज हो सकता है, क्योंकि बीजिंग खुद को रूस का प्रमुख साझेदार मानता रहा है। लेकिन अगर भारत और रूस के बीच मजबूत सामरिक और ऊर्जा सौदे होते हैं, तो यह चीन के लिए एक भू-राजनीतिक संतुलन का संकट बन सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस भारत और चीन दोनों से संबंध मजबूत रख कर खुद को संतुलन की धुरी बनाना चाहता है, लेकिन भारत को इसमें अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहिए।
पुतिन की यात्रा से पहले क्या हैं भारत की तैयारियाँ?
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC), विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर एक विशेष रणनीतिक दस्तावेज तैयार किया है, जो मोदी-पुतिन मुलाकात के एजेंडे को तय करेगा।
इसके अलावा, भारत की ओर से रूस को कई रणनीतिक प्रस्तावों पर चर्चा के लिए पहले ही ड्राफ्ट भेजे जा चुके हैं:
- रक्षा तकनीक का संयुक्त उत्पादन
- आर्कटिक क्षेत्र में ऊर्जा निवेश
- ब्रह्मोस मिसाइल का तीसरा संस्करण
- भारत में रूसी विश्वविद्यालयों की शाखाएँ खोलना
जनता की नजरें और मीडिया का फोकस
भारत में मीडिया और जनता की निगाहें इस यात्रा पर इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि यह मोदी सरकार की वैश्विक साख और रणनीतिक दृढ़ता का परीक्षण भी मानी जा रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत के बाद मोदी सरकार अब अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देने की दिशा में अग्रसर है।
इस यात्रा को भारत के विदेश नीति के ‘टर्निंग पॉइंट’ के रूप में भी देखा जा रहा है।
निष्कर्ष: कूटनीति का नया अध्याय
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि यह एक सशक्त कूटनीतिक संकेत है – अमेरिका को, चीन को और पूरी दुनिया को।
भारत अब ‘तटस्थ दर्शक’ नहीं, बल्कि निर्णायक रणनीतिक खिलाड़ी की भूमिका में है। डोभाल की मास्को यात्रा और उसके परिणामस्वरूप पुतिन का भारत आना इस बात की पुष्टि करता है कि भारत अब वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है।
