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14 बार पैरोल पर बाहर! क्या राम रहीम के लिए कानून भी मोम हो गया है?

कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच राम रहीम ने सुबह-सुबह जेल परिसर छोड़ा और सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हो गए। उनकी यह रिहाई एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि उन्हें बार-बार पैरोल और फरलो की राहत मिलती रही है, जिसकी संख्या और अवधि ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर हैं। इस बार उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली है, और यह कोई पहली बार नहीं, बल्कि पिछले आठ वर्षों में 14वीं बार है जब ‘बाबा’ को जेल से अस्थायी छुट्टी दी गई है। सवाल यही उठता है कि क्या भारत की जेल व्यवस्था और कानून व्यवस्था उनके लिए सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?

हरियाणा की सुनारिया जेल में दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलना न सिर्फ न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इसे लेकर जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दलों में गुस्सा भी है।


कौन हैं राम रहीम और क्यों हैं जेल में?

गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख हैं, जो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और यूपी में लाखों अनुयायियों का नेतृत्व करते हैं। लेकिन 2017 में दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया। बाद में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या और अन्य दो मामलों में भी उन्हें सजा सुनाई गई।

सुनारिया जेल में सज़ा काट रहे राम रहीम को 20 साल की कैद दी गई थी, लेकिन व्यवहार में वह अब तक कई बार जेल से बाहर आ चुके हैं – कभी “स्वास्थ्य कारणों” से, तो कभी “परिवार से मिलने”, और अब 40 दिन के लिए “पैरोल” पर।


पैरोल की राजनीति या पक्षपात?

विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में बीजेपी सरकार बनने के बाद से राम रहीम को जिस तरह से बार-बार राहत मिल रही है, वह एक बड़ा संकेत है कि डेरा वोट बैंक को साधने के लिए सरकार उनके प्रति नरमी बरत रही है।

हर बार पैरोल का समय किसी न किसी चुनावी मौसम से मेल खाता है। चाहे वह पंचायत चुनाव हों, बरोदा उपचुनाव या फिर नगर निकाय चुनाव, राम रहीम का बाहर आना अक्सर किसी राजनीतिक समयसीमा से जुड़ा होता है।

इस बार भी जब हरियाणा और पंजाब में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं, बाबा को फिर से बाहर आने का मौका मिल गया।


सरकार का बचाव – “कानूनी प्रक्रिया के तहत मिली राहत”

हरियाणा सरकार का कहना है कि राम रहीम को जो पैरोल मिली है, वह पूरी तरह नियमों के तहत है। गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि कोई भी कैदी अगर नियमों को पूरा करता है और जेल के भीतर उसका व्यवहार ठीक होता है, तो उसे राहत मिल सकती है।

“हमने किसी विशेष को लाभ नहीं दिया, यह एक कानूनी प्रक्रिया है। बाबा राम रहीम के मामले में भी यही हुआ है।” – अनिल विज, गृहमंत्री, हरियाणा

लेकिन जब उन्हीं नियमों के तहत कई विचाराधीन कैदियों को वर्षों तक पैरोल नहीं मिलती, तो सवाल उठना लाज़मी है।


राम रहीम की पैरोल टाइमलाइन: आठ साल, 14 राहतें!

क्रमवर्षकिस आधार परअवधि
12017मेडिकल5 दिन
22018परिवार मुलाकात7 दिन
32019स्वास्थ्य21 दिन
4-132020-2024धार्मिक त्यौहार, माता के बीमार होने, स्वास्थ्य आदि – कुल 10 बार5-40 दिन
142025वर्तमान 40 दिन की पैरोल40 दिन

इस लिस्ट से साफ़ है कि राम रहीम को औसतन हर 6-8 महीने में एक बार बाहर आने का मौका मिला है। क्या किसी और दोषी को ऐसी “विशेष सुविधा” मिलती है?


बाबा के बाहर आने पर क्या करते हैं अनुयायी?

हर बार जब राम रहीम बाहर आते हैं, तो डेरा समर्थकों में भारी उत्साह देखा जाता है। सोशल मीडिया पर उनका “जेल से बाहर निकलने” का वीडियो वायरल हो जाता है, डेरा के सोशल मीडिया पेजों पर ‘बाबा की माफी’ और ‘आशीर्वाद’ की पोस्टें छा जाती हैं।

इस बार भी जैसे ही बाबा बाहर आए, गुरुग्राम के डेरे में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, और समर्थकों को “ऑनलाइन सत्संग” के लिए बुलाया गया। बाबा राम रहीम ने पहले की तरह YouTube और सोशल मीडिया पर लाइव प्रवचन दिए और खुद को “मानवता का मसीहा” बताया।


न्यायिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पूर्व जज और सुप्रीम कोर्ट के वकील पृथ्वी सिंह चौहान कहते हैं:

“जिस तरह से बार-बार राम रहीम को पैरोल दी जा रही है, वह न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे गंभीर अपराधों के दोषी को इस तरह की रियायत देना गलत संदेश देता है।”

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह राहत किसी सामान्य कैदी को नहीं मिल सकती, तो राम रहीम को यह बार-बार क्यों?


विपक्ष का हमला – “ये है VIP न्याय!”

कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने इस मुद्दे पर कहा:

“जब सामान्य कैदी सालों पैरोल के लिए तरसता है, और बाबा को हर चुनाव से पहले पैरोल मिलती है – तो यह न्याय नहीं, ‘VIP न्याय’ है!”

आप नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने ट्वीट कर कहा:

“क्या हरियाणा की जेलें अब VIP धर्मस्थल बन गई हैं?”


FiveWs विश्लेषण:

  • Who: राम रहीम, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख – दुष्कर्म और हत्या का दोषी
  • What: 14वीं बार जेल से पैरोल पर रिहा
  • When: अगस्त 2025 – 40 दिन की छूट
  • Where: सुनारिया जेल से, हरियाणा
  • Why: “अच्छे व्यवहार” और “कानूनी प्रक्रिया” के आधार पर (सरकारी दलील)

समाज में संदेश क्या जा रहा है?

राम रहीम जैसे व्यक्ति को बार-बार जेल से बाहर आते देखना, उन पीड़ित महिलाओं और परिवारों के लिए कितना पीड़ादायक होता होगा जिन्होंने न्याय के लिए वर्षों संघर्ष किया। साथ ही, यह उन युवाओं को क्या सिखाता है जो सोचते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है?

क्या यह नारा अब केवल किताबों तक सीमित हो गया है – “कानून के सामने सब बराबर हैं”?


निष्कर्ष: अब अगली रिहाई कब?

राम रहीम का यह “छोटे-छोटे हिस्सों में रिहा” होने का ट्रेंड कहीं न कहीं उसे जेल की सजा को ‘घुलाकर’ खत्म करने जैसा है। जब हर साल 2-3 बार पैरोल मिले, अनुयायी सक्रिय रहें, राजनीतिक दल प्रसन्न हों – तो जेल की दीवारों का डर कहां बचता है?

अब जब यह 14वीं बार है, तो 15वीं पैरोल ज्यादा दूर नहीं लगती। शायद अगले किसी चुनाव से पहले बाबा फिर बाहर होंगे, फिर प्रवचन देंगे और फिर सवाल उठेंगे – लेकिन जवाब शायद फिर भी नहीं मिलेंगे।

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Harshita Ahuja

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