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शराब कांड में घिरे बघेल और बेटे को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका – कहा, पहले हाईकोर्ट जाओ!

यह मामला कथित ₹2,161 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले ने एक बार फिर सियासी गलियारों में उथल-पुथल मचा दी है। इस बार विवाद की सीधी चपेट में आए हैं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए उन्हें फिलहाल किसी भी राहत से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर उन्हें कोई राहत चाहिए तो पहले हाईकोर्ट का रुख करें। इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल और बीजेपी खेमे में उत्साह देखा जा रहा है।

❖ कौन-कौन हैं आरोपी?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस कथित शराब घोटाले में दर्जनों अधिकारियों, व्यापारियों और नेताओं पर शिकंजा कसा है। हाल ही में जो नाम चर्चा में आया है, वह है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे का। ईडी का आरोप है कि बघेल सरकार के दौरान शराब कारोबार को संगठित भ्रष्टाचार की शरण में पनपने दिया गया, जिससे हजारों करोड़ों रुपये का कालाधन उत्पन्न हुआ।

❖ सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: “सीधे हमसे क्यों?”

सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा,

“आप सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आ रहे हैं? राहत पाने का पहला मंच हाईकोर्ट होता है। पहले वहां जाइए।”

यानी बघेल और उनके बेटे की याचिका को SC ने अनुचित मंच पर दाखिल बताते हुए खारिज कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। इससे पूर्व मुख्यमंत्री के लिए राहत की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है।

❖ करोड़ों का शराब घोटाला: ईडी के बड़े दावे

ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में एक संगठित शराब सिंडिकेट ने कथित तौर पर अवैध वसूली और कमीशन के ज़रिए एक बड़ा आर्थिक घोटाला रचा। अनुमान है कि इसमें 2,000 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ।

  • सरकारी शराब दुकानों से लेकर निजी ठेकों तक,
  • विभागीय अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी नेताओं तक,
  • सबके नाम जांच के घेरे में हैं।

ईडी ने दावा किया है कि इस सिंडिकेट को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, और पैसों का बड़ा हिस्सा कथित रूप से राजनीतिक फंडिंग और व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

❖ ईडी के पास क्या हैं सबूत?

प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी के दौरान करोड़ों की नकदी, फर्जी कंपनियों के दस्तावेज, WhatsApp चैट्स और कथित लेन-देन की बैंक डिटेल्स जब्त की हैं।
ईडी का कहना है कि उसने एक “अवैध शराब टैक्स वसूली नेटवर्क” का खुलासा किया है जो CMO (मुख्यमंत्री कार्यालय) तक जुड़ा हुआ था।

ईडी ने जो दावा किया, उसमें पूर्व सीएम और उनके नजदीकी लोगों की “निगरानी सूची” में शामिल होना इस पूरे मामले को और पेचीदा बना देता है।

❖ कांग्रेस का बचाव: “राजनीतिक प्रतिशोध”

इस मामले में कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा:

“2024 के लोकसभा चुनावों में हार के डर से केंद्र सरकार ईडी और अन्य एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। भूपेश बघेल जैसे लोकप्रिय नेता को निशाना बनाना इसी का प्रमाण है।”

कांग्रेस नेताओं ने आगे कहा कि बीजेपी चाहती है कि राज्य में विपक्ष कमजोर हो, और इसी के तहत भूपेश बघेल व उनके परिवार को घसीटा जा रहा है।

❖ बीजेपी का पलटवार: “कानून से ऊपर नहीं कोई”

वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा पलटवार करते हुए कहा:

“कांग्रेस अब बौखला गई है। ये कोई राजनीतिक षड्यंत्र नहीं बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट का मामला है।
अगर बघेल निर्दोष हैं तो उन्हें डर किस बात का है? अदालत में सच सामने आएगा।”

बीजेपी के मुताबिक, यह मामला जनता से जुड़ा है, और इसमें अगर बघेल परिवार दोषी पाया गया, तो कानून उन्हें सजा जरूर देगा

❖ बघेल की चुप्पी, बेटे ने क्या कहा?

भूपेश बघेल ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके बेटे ने एक ट्वीट में कहा:

“हम कानून में विश्वास रखते हैं। यह मामला सच्चाई की जीत का है, और अंत में वही होगी।”
हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक नाटक बता रहा है।

❖ हाईकोर्ट में अगली रणनीति?

अब जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है, तो बघेल परिवार के वकील जल्द ही बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं।
कानूनी जानकारों के मुताबिक,

  • अगर हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली,
  • तो ईडी समन जारी कर सकती है,
  • और पूछताछ के लिए साक्ष्यों के साथ पेशी की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है।

❖ जानिए, क्यों है यह मामला बेहद संवेदनशील?

छत्तीसगढ़ में शराब से जुड़ा मुद्दा सीधे जनता की आजीविका और सामाजिक ताने-बाने से जुड़ा है।

  • हजारों परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं,
  • शराब की खपत और सरकारी नियंत्रण पर पहले भी विवाद हो चुके हैं,
  • लेकिन इतने बड़े स्तर पर घोटाले का आरोप पहली बार इस तरह से सामने आया है।

यदि यह सिद्ध हो गया कि करोड़ों की वसूली सरकारी मशीनरी की मिलीभगत से हुई थी, तो यह देश के सबसे बड़े घोटालों में एक बन सकता है।

❖ निष्कर्ष: अग्निपरीक्षा में बघेल परिवार

SC के फैसले के बाद अब बघेल और उनके बेटे के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौतियां बढ़ गई हैं।
जहां एक ओर कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘भ्रष्टाचार पर कार्यवाही’ का नाम दे रहा है।

अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट में क्या रुख अपनाया जाता है, और क्या बघेल परिवार खुद को निर्दोष साबित कर पाएगा?


FiveWsNews आपके लिए लाता रहेगा इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट। अगर आप चाहते हैं कि हम अगली रिपोर्ट में कोर्ट की सुनवाई या ईडी की कार्रवाई का ब्योरा दें, तो बताइए – हम तैयार हैं।

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Harshita Ahuja

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